बिहार के इस स्कूल का कोई छात्र विदेश में डॉक्टर तो कोई डीयू में है प्रोफेसर, …जानिए

बिहार के भागलपुर के दो दोस्तों की यह कहानी है। एक मरीज और दूसरा डॉक्टर। मरीज को देखते-देखते दोनों में दोस्ती का ऐसा रंग चढ़ा कि इन्होंने मुस्लिम लड़कियों के लिए स्कूल खोल दिया। कोशिश 48 साल पहले शुरू हुई, जो आज फलक तक जा पहुंचा है। अब ये दोनों दोस्त इस दुनिया में नहीं रहे लेकिन इनकी लगन, मेहनत, जुनून की आज भी यहां के लोग तारीफ करते नहीं थकते।

दो दोस्तों में एक थे मैलचक, कोतवाली के डॉ. मोहम्मद युनुस और दूसरे थे हुसैनाबाद के मो. हसन इमाम कुरैशी। मोहम्मद युनूस शहर में आंख, नाक, कान और गले के प्रसिद्ध डॉक्टर थे और हसन इमाम कुरैशी एक व्यापारी थे। बात 1969 की है। उस वक्त मुस्लिम समाज में शिक्षा का स्तर काफी खराब था, खासकर लड़कियों में। मुस्लिमों में पढ़ी-लिखी महिलाओं की संख्या उंगलियों पर गिनी जा सकती थी। लड़कियों को घर से बाहर पढ़ाई के लिए जाने नहीं दिया जाता था। तब ये दोनों लड़कियों में शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए आगे आए और 1969 में उर्दू गर्ल्स हाईस्कूल की स्थापना की।

पांच लड़कियों से शुरू हुए स्कूल में आज 3000 छात्राएं
स्कूल शुरू होने के समय यहां लड़कियों की संख्या पांच थी। भवन निर्माण के लिए दोनों दोस्तों ने मिलकर चंदा किया और खड़े रहकर भवन बनवाया। आज स्कूल में तीन हजार मुस्लिम लड़कियां पढ़ाई कर रही हैं। स्कूल की पूर्व प्राचार्य अंजीलिना अली बताती हैं कि 1973 में जब मैंने स्कूल ज्वाइन किया तो उस वक्त स्कूल में 12 बच्चियां थीं। दाई को घर भेजकर लड़कियों को स्कूल लाते थे और फिर दाई के हाथ लड़कियों को घर भेजते थे। यह दोनों दोस्तों की मेहनत का नतीजा है।

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डॉ. युनुस अपनी कार से शिक्षिका को लाते थे स्कूल
मुस्लिम एजुकेशन कमेटी के महासचिव डॉ. फारूक अली बताते हैं कि जब स्कूल की स्थापना हुई थी तो शिक्षिकाओं को पैसा नहीं मिलता था। शुरुआत में स्कूल की टीचर को डॉ. युनुस अपनी कार से लाते थे। फिर बाद में रिक्शा कर दिया गया। उनके प्रयास को आज भी लोग याद करते हैं।

कोई विदेश में डॉक्टर तो कोई डीयू में प्रोफेसर
स्कूल की पूर्व प्राचार्य अंजीलिना अली ने बताया कि आज उर्दू गर्ल्स हाईस्कूल की पढ़ी बरइचक की एक लड़की विदेश में डॉक्टर है। हुसैनाबाद की लड़की दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर है। इनके अलावा बहुत सारी लड़कियां इंजीनियर, शिक्षिका और अन्य जगहों पर प्रोफेसर हैं।

हर दिन याद आती है इनकी मेहनत : प्राचार्य
स्कूल की वर्तमान प्राचार्य नैयर परवीन ने बताया कि आज स्कूल में तीन हजार लड़कियां पढ़ती हैं। 1978 में स्कूल को मान्यता मिली। भागलपुर की लड़कियों की शिक्षा में शानदार योगदान के लिए मुस्लिम समाज डॉक्टर मोहम्मद युनुस और मो. हसन इमाम कुरैशी को हर दिन याद करता है।

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