मजदूरों के साथ आज भी होता है भेदभाव

मजदूर दिवस पर विशेष……..
मेहनत उसकी लाठी है
मजबूत उसकी काठी है
हर बाधा वो कर देता है दूर
दुनिया उसे कहती है मजदूर

महेंद्र प्रसाद, सहरसा

💡 भारत में मई दिवस पहली बार चेन्नई में सन 1923 में मनाया गया था।

  • मनरेगा योजना भी मजदूर का नही बदल सका किस्मत

पूर्व काल में मजदूर एवं कामगार वर्ग की स्थिति अत्यंत दयनीय थी। मजदूरों को दिन में दस से पंद्रह घंटे काम कराया जाता था। कार्य स्थल इतने विषम और प्रतिकूल होते थे की वहाँ आये दिन काम पर मजदूरों की अकस्मात मृत्यु की घटनायेँ होती रहती थीं। इन्हीं परिस्थितियों के चलते अमरीका में कुछ मजदूर समस्या निवारण संघ और समाजवादी संघ द्वारा मजदूरों के कल्याण के लिये आवाज़ उठाई जाने लगी।सोमवार को पूरी दुनिया में मजूदर दिवस मनाया जाएगा।

मजदूरों को लेकर बड़ी-बड़ी बातें और घोषणा की जाएंगी, लेकिन सुदूर गाँव-देहात में दो जून की रोटी के लिए खून-पसीना बहा रहे खेतिहर मजूदरों पर शायद ही कोई चर्चा होगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि देश के अधिकतर जो मजदूर संगठनों के एजेंडे में खेतिहर मजदूर हैं ही नहीं। खेतिहर मजदूरों को सरकार की तरफ से जारी न्यूनतम मजदूरी भी नसीब नहीं हो रही है, लेकिन इसके बाद भी इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। गाँव के बड़े किसान के खेत में काम करने वाली इन खेतिहर मजबूरों को बहुत कम पैसा या इसके बदले इतने मूल्य का धान और गेहूं मिलता है, जिससे इनकी आर्थिक स्थिति दयनीय है।

पेंशन के लिए संसद में उठी थी आवाज

खेतिहर मजूदरों की दयनीय स्थिति को देखते हुए संसद में खेतिहर मजूदरों के लिए पेंशन योजना की मांग दो साल पहले उठी थी, लेकिन इस पर अभी तक कोई काम नहीं हुआ। लोकसभा में भाजपा के हुकुमदेव नारायण यादव ने किसानों एवं खेतिहर मजदूरों के लिए पेंशन योजना लाने की मांग की थी। उन्होंने श्रम एवं रोजगार मंत्री से इस बारे में एक प्रस्ताव प्रधानमंत्री के समक्ष पेश करने का आग्रह किया। चर्चा में हुकुमदेव नारायण यादव ने कहा कि किसान और खेतिहर मजदूरों में से काफी संख्या में लोग दलित समाज से आते हैं, लेकिन उनके लिए ऐसी कोई योजना नहीं है कि 60 वर्ष के बाद जब वे शारीरिक रूप से अक्षम हो जाएं, तब उन्हें पेंशन या कोई सामाजिक सुरक्षा योजना का लाभ मिल सके। भाजपा सदस्य ने कहा कि ऐसे में किसान और खेतिहर मजदूरों के लिए कम से कम 3000 रुपए की पेंशन सुनिश्चित की जाए। हुकुमदेव नारायण यादव ने कहा कि संविधान में हर व्यक्ति बराबर है और सभी को समान अधिकार हैं, ऐसे में किसानों और खेतिहर मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान देने की जरुरत है।

पढ़े :   बिहार दिवस: क्यों पड़ा "बिहार" नाम, जानें...

Leave a Reply

error: Content is protected !!