शराबबंदी के बाद बिहार में क्राइम ग्राफ तेजी से गिरा

वर्ष 2016 में तो बिहार कई वजहों से चर्चा में रहा मगर सबसे ज्यादा शराबबंदी के कारण बिहार पूरे देश भर में सुर्खियों में बना रहा। शराबबंदी के कारण फायदे और नुकसान की तो कई बातें हो रही है मगर शराबबंदी के कारण एक बहुत बड़ा बदलाव दिख रहा है वह है अपराधिक मामलों में कमी।

पुलिस ने दावा किया है कि राज्य में 1 अप्रैल 2016 से शराबबंदी के बाद बीते वर्ष के मुकाबले आपराधिक घटनाओं में कमी आई है। हत्या, लूट, डकैती समेत अन्य संगीन अपराध कम हुए हैं। उन्होंने लोगों को आश्वस्त किया कि पुलिस मुस्तैदी से अपने दायित्वों को निभाती रहेगी।

एडीजी (मुख्यालय) सुनील कुमार ने शुक्रवार को सचिवालय स्थित अपने कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में वर्ष 2015 की तुलना में 2016 के दौरान सभी तरह के आपराधिक घटनाओं में सम्मिलित रूप से औसतन 20 फीसदी की कमी आयी है। हत्या के मामले में 24 फीसदी, डकैती की घटनाओं में 26 प्रतिशत, लूट में 19 प्रतिशत, गृभेदन या चोरी में तीन फीसदी, फिरौती के लिए अपहरण के मामलों में 42 प्रतिशत, रेप में छह प्रतिशत व सड़क दुर्घटनाओं में 20 फीसदी की कमी आयी है। उन्होंने कहा कि आंकड़े बताते हैं कि शराबबंदी से अपराध में कमी आयी है।

1 अप्रैल से 30 दिसंबर तक हुई कार्रवाई
एफआइआर- 11 हजार 172
गिरफ्तारी- 15 हजार 02
देसी शराब जब्ती- एक लाख 78 हजार 166 लीटर
विदेशी शराब- 2 लाख 50 हजार 85 लीटर

एडीजी मुख्यालय सुनील कुमार ने कहा कि 2015 में जहां स्पीडी ट्रायल के जरिये चार हजार 226 लोगों को सजा दिलायी गयी थी। वहीं, 2016 में नवंबर तक के आंकड़ों के अनुसार पांच हजार 143 अपराधियों को स्पीडी ट्रायल के जरिये सजा दिलायी जा चुकी है। इसमें 21 को फांसी, 1410 को आजीवन कारावास, 1377 को 10 से कम की सजा व 478 अपराधियों को 10 साल से अधिक की सजा मिली है।

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नक्सलियों के खिलाफ बड़ी सफलता
इसी तरह नक्सलियों के खिलाफ अभियान में वर्ष 2016 के दौरान उनके 20 कुख्यात एरिया कमांडर को पकड़ा गया। साथ ही दर्जनों इनामी नक्सली भी पकड़े गये हैं. इनके पास से 125 सामान्य हथियार, 12 हजार 474 कारतूस, 35 हजार 497 देसी डेटोनेटर और चार लाख 35 हजार लेवी के रुपये भी बरामद किये गये हैं।

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