बिहार के इस 15 वर्षीय युवा साइंटिस्ट ने सबको चौंकाया, वैज्ञानिकों ने दी शाबाशी

मुंगेर. बिहार के 15 वर्षीय बाल/युवा वैज्ञानिक प्रभाकर जयसवाल ने अपने प्रोजेक्ट से सबको चौंका दिया। पूरी दुनिया के वैज्ञानिक उसे शाबाशी दे रहे हैं। उसने सोलर वेपन तकनीक विकसित की है। यह तकनीक सफल हो गई, तो भारत को मिसाइल के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हासिल होगी।

इससे एक ऐसा हथियार तैयार हो सकेगा, जिसके जरिये हम किसी भी मिसाइल और रॉकेट लॉन्चर की दशा और दिशा को बदल सकते हैं। साथ ही उसे नष्ट भी कर सकते हैं।

जिले के छोटे से मोहल्ले रामपुर भिखारी के रहने वाले प्रमोद जयसवाल के 15 वर्षीय बेटे प्रभाकर जयसवाल ने 18 जुलाई को चेन्नई में यंग इंडिया साइंटिस्ट-2016 में एक ऐसे प्रोजेक्ट को पेश किया, जिसे देखकर देश-विदेश से आये सभी साइंटिस्ट वैज्ञानिकों ने उसे शाबाशी दी। प्रभाकर ने यह प्रोजेक्ट ‘सोलर वेपन’ के नाम से पेश किया।

विद्युत उत्पादन में भी सोलर वेपन का कर सकते हैं इस्तेमाल 

मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे प्रभाकर ने बताया कि, सोलर वेपन के जरिये देश में आने वाले मिसाइल और रॉकेट लॉन्चर जैसे हथियार को हम नष्ट कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि, ‘इस यंग साइंटिस्ट सम्मेलन में हमारा प्रोजेक्ट था कि जियो स्टेशनरी सेटेलाइट में सोलर एनर्जी को किस तरह और कैसे इसे वेपन के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। जिसको मैने दिखाया था।’ प्रभाकर ने बताया कि, इस सोलर वेपन को हम एंटी बैलेस्टिक मिसाइल, एंटी न्यूक्लियर मिसाइल और एंटी टैंक में इस्तेमाल कर सकते हैं। साथ ही विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में भी सोलर वेपन का इस्तेमाल किया जा सकता है।

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523 छात्रों में से हुआ चयन 

प्रभाकर ने बताया की ‘स्पेस इंडिया किड्ज़’ चेन्नई में अपने मॉडल  सोलर वेपन के लिए ऑनलाइन अप्लाय किया था। जिसको ‘स्पेस इंडिया किड्ज़’ ने हमारे मॉडल को पसंद किया और मुझे चेन्नई बुलाया। उन्होंने बताया कि, यंग साइंटिस्ट इंडिया-2016 के लिए 523 छात्रों ने पूरे भारत में ऑनलाइन अप्लाय किया था। जिसमें से 93  बच्चों को चुना गया। ईस्ट जॉन में सिर्फ एक ही यंग साइंटिस्ट इंडिया-2016 का अवॉर्ड मुझे दिया गया। उन्होंने कहा कि, इस अवॉर्ड से खुश हूं, क्योंकि इस तरह की संस्था में बच्चों को साइंटिफिक ज्ञान के साथ-साथ साइंस का नॉलेज भी दी जाती है।

बता दें कि, ‘स्पेस इंडिया किड्ज़’ संस्था में अब्दुल कलाम इंटरनेशनल फाउंडेशन और रशियन सेंटर ऑफ़ साइंस एंड कल्चर आदि जैसी संस्था साइंटिस्ट बच्चों को बढ़ावा देती है।

बचपन में प्रभाकर को खूब पड़ती थी डांट 

प्रभाकर को अवॉर्ड मिलने से परिवार वालों में काफी खुशी है। शहर में छोटे से इलेक्ट्रॉनिक का दुकान चलाने प्रभाकर के पिता का कहना है कि, बचपन से ही प्रभाकर छोटे-मोटे अविष्कार करते रहता था। जिसको लेकर उसे घरों में बार-बार डांट भी पड़ती थी। उन्होंने बताया कि, आज हमें अपने बेटे पर गर्व है की वो देश के लिए ऐसा अविष्कार करें जिससे पूरा देश गौरव करें। प्रभाकर की बहन प्रेरणा जयसवाल ने बताया कि, उसे अपने छोटे भाई पर गर्व है।

10+2 का छात्र है प्रभाकर 

प्रभाकर की शुरूआती शिक्षा मुंगेर के सरस्वती विद्या मंदिर से हुई है।  आज भी वह इसी स्कूल में साइंस से 10+2 की पढ़ाई कर रहा है। दसवीं में प्रभाकर को 96 प्रतिशत मार्क्स मिले थे।

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