अब महंगाई में नहीं होगी जेब ढीली: 15 रुपए में यहां मिलेगा भरपेट खाना, …जानिए

कहते हैं कि आग की लपट से अधिक भूख की तपिश होती है। पेट ऐसी बला है जिसके लिए आदमी क्या नहीं करता है लेकिन इसके बावजूद शहर में कई लोग भूखे सोते हैं। सब के पास चमचमाते रेस्तरां के जायकों का आनंद लेने का पैसा नहीं होता। ऐसे लोगों के पेट भरने का जिम्मा उठाया है विजय कुमार ने। विजय बिहार के राजधानी पटना में गांधी मैदान के पास भामाशाह फाउंडेशन के द्वारा पिछले एक सप्ताह से 15 रुपये में लोगों को लजीज भोजन उपलब्ध करा रहे हैं।

सुबह 10 बजे से रात 10 तक लगती है कतार
गांधी मैदान में दिन के साढ़े बारह बज रहे हैं। एक कतार से खाने की लाइन लगी हुई है। लोग अपने नंबर का इंतजार कर रहे हैं। चावल, बेसन की कढ़ी और चने की सब्जी का चटपटा स्वाद गांधी मैदान में फैल चुका है।

ये कोई लंगर नहीं है ये है भामाशाह भोजन सेवा केंद्र का दृश्य जहां सुबह दस बजे से लेकर रात के दस बजे तक ये भीड़ पिछले मंगलवार से ही लग रही है। इस भोजनालय की खासियत है कि इसमें 15 रुपये में भरपेट खाने की व्यवस्था है। महंगे महंगे रेस्तरां से इतर ये उस तबके का फूड कोर्ट है जहां लोग बेहद सस्ती कीमत पर लजीज खाना खा रहे हैं।

ये नेक शुरुआत करने वाले विजय कुमार राजधानी के 40 अन्य स्थानों पर ऐसी ही भोजन करने की व्यवस्था करना चाह रहे हैं। जिसके लिए उन्होंने सरकार से भी मदद मांगी है। लावारिश वार्ड के मसीहा के नाम से जाने जाने वाले विजय कुमार के इस कदम से कइय्यों के पेट भर रहे हैं। 25 जुलाई को शुरु हुए इस भोजनालय में दिन से लेकर रात तक लोग खाने के लिए आते रहते हैं।

मिलता है सस्ता और हाइजेनिक खाना
इस भोजनालय की खासियत जहां सस्ता होना है वहीं इसमें खाना बनाने और हाइजीन का भी भरपूर ध्यान रखा गया है। इसके लिए खास तौर पर रसोई की व्यवस्था की गई है जिसमें साफ सफाई का खास ध्यान रखा जाता है। सप्ताह के सातों दिन इसके खाने का मेन्यू अलग अलग है।

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टोकन सिस्टम से मिलता है खाना
यहां खाने के लिए टोकन सिस्टम है। खाना बनाने के लिए 14 कुक हैं। जहां दिन भर खाना बनाने के लिए इनकी अपनी रसोईं भी है।

सभी खा रहे हैं इस भोजनालय में
हर रोज करीब 1000-1200 लोग इसमें खाना खाने आते हैं। भामाशाह फाउंडेशन के प्रमुख एसपी सिंह बताते हैं कि यह उन लोगों तक खाना पहुंचाने का एक प्रयास है जो भरपेट भोजन नहीं कर पाते हैं।

रोजाना करीब छह क्विंटल बनता है खाना
विजय कुमार बताते हैं कि रोजाना करीब छह क्विंटल खाना बनता है। इसमें ढाई क्विंटल सब्जी, एक क्विंटल दाल और चावल ढाई क्विंटल बन रहा है। प्रति व्यक्ति 40 ग्राम दाल, 160-200 ग्राम चावल और 40 ग्राम सब्जी दी जाती है। इसके अलावा भूनी हुई मिर्च और भुजिया की भी व्यवस्था की गई है।

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