बिहार के छात्रों ने ढूंढा बाढ़ का समाधान,15 हजार खर्च कर 2 घंटे में तैयार किया ब्रिज

बाढ़ बिहार की नियति है और हरेक साल इससे लाखों लोग प्रभावित होते हैं। उत्तर बिहार के तकरीबन 20 जिले हरेक साल बाढ़ से प्रभावित होते हैं और कई लोगों की जान जाती हैं। कटिहार के सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज के छात्रों और शिक्षकों ने बाढ़ की इस विभिषिका को कम करने का तरीका ढूंढ निकाला है।

कटिहार पॉलिटेक्निक कॉलेज के छात्रों का कहना है कि 14 से 16 हजार खर्च कर दो घंटे में पोर्टेबल बम्बू ब्रिज बनाकर बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाई जा सकती है। कॉलेज के शिक्षक अमित कुमार गुप्ता ने बताया कि एक मजदूर के 100 घंटे की मेहनत से इस पुल का निर्माण किया जा सकता है। इस ब्रिज की खासियत है कि इसमें किसी स्किलड लेबर की जरुरत नहीं है।

25 फीट लंबा (स्पैन) पुल बनाने के लिए 100 बांस की जरूरत होगी। रस्सी और नट बोल्ट के जरिए इसे खड़ा दो घंटे में खड़ा किया जा सकता है। इस ब्रिज को ट्रांसपोर्ट कर कहीं भी पुल को खड़ा किया जा सकता है।

कॉलेज के छात्र शांतनु का कहना है कि फिलहाल इसका डेमो तैयार किया गया है। ब्रिज के डिजाइन और मॉडल बनाने में 6 महीने लगे हैं। पोर्टेबल ब्रिज बनाने में सुरक्षा के सभी पहलूओं पर गौर किया गया है। इस ब्रिज की अवधि दो- तीन साल की होगी। इस ब्रिज पर से दोपहिया समेत बैलगाड़ी और ऑटो जैसे हल्के वाहनों को आसानी से गुजारा जा सकता है।

प्रोफेसर अमित गुप्ता का कहना है कि हमलोग इसपर अभी आगे काम कर रहे हैं। इस ब्रिज को हमलोग पीपा पुल की तरह बनाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि पुल के बहने की स्थिति में किसी को मुश्किल न हो।

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कटिहार पॉलिटेक्निक कॉलेज के इस आइडिया पर भारत सरकार की संस्था नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल टीचर ट्रेनिंग एंड रिसर्च ने भी मुहर लगाई है। कोलकाता में आयोजित नेशनल इनोवेशन टैलेंट कांटेस्ट फॉर पॉलिटेक्निक में इस प्रोजेक्ट को स्पेशल डायरेक्टर अर्वाड से नवाजा गया है। इस कांटेस्ट में सिविल, मेकेनिकल और इलेक्ट्रिक कैटेगरी में देशभर के 47 पॉलिटेक्निक कॉलेजों ने हिस्सा लिया था। 21-22 फरवरी को आयोजित इस कांटेस्ट में सिविल कैटेगरी में कटिहार पॉलिटेक्निक कॉलेज को यह अवार्ड दिया गया। इस कंटेस्ट के जज के रूप में दिल्ली आईटीआई के प्रोफेसर भी शामिल थे।

गुरु-शिष्य की इस टोली ने बिहार का मान में एक बार फिर चार चांद लगाया। अपने क्षेत्र के सबसे बड़ी समस्या बाढ़ की विभिषिका में यातायात व्यवस्था ठप होने पर तत्कालीन राहत के लिए कम खर्च में पोर्टेबल बम्बू ब्रिज को बनाया जा सकता है।

इस आइडिया के पीछे अमित उनके छात्रों नरेंद्र, शांतनु, शशांक की मेहनत और दिमाग है। प्रिंसिपल रवि कुमार कॉलेज की इस उपलब्धि से खुश हैं। सबसे बड़ी खुशी उनको इस बात की है कि यह पूरा इलाका बाढ़ग्रस्त है और इस क्षेत्र के लालों ने ही इस समस्या का निदान ढूंढा हैं। उनका कहना है कि हमलोग चाहते हैं कि मुख्यमंत्री से मिलकर इस प्रोजेक्ट पर और काम करने की दिशा में मंजूरी मिले।

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