किसानों के लिए सब्जी बेचना होगा आसान, बनेगा सब्जी कलेक्शन सेंटर

जी हाँ अब किसानों को सब्जी और फल कम दामों में बेचने की मजबूरी नहीं रहेगी। सब्जी और फल उत्पादक किसानों को गवर्मेंट लाभकारी रेट दिलाएगी। ब्लाकों में फल-सब्जी पैदा करने वाले किसानों की कमेटी बनेगी। कमेटी के माध्यम से कलेक्शन सेंटर पर किसानों से फल और सब्जी एकत्र कर जिलों में भेजी जाएगी।

  • स्थानीय आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद बचे फल-सब्जी को कोल्ड स्टोरेज में जमा किया जाएगा। यहां से प्रोसेसिंग यूनिट और अन्य राज्यों को भी भेजा जाएगा। इससे स्टेट में करीब 30 प्रतिशत तक सब्जी की बर्बादी रोकने में मदद भी मिलेगी। को-ऑपरेटिव विभाग ने 1327 करोड़ का डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) बनाया है। इस माह के अंत में इसे कैबिनेट से मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
  • समस्तीपुर, वैशाली, मुजफ्फरपुर, कटिहार, भागलपुर, पटना और नालंदा में करीब 50 सब्जी उत्पादक किसानों की कमेटी का निबंधन हो चुका है।
  • ब्लॉक स्तर पर फल-सब्जी प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) और मार्केटिंग सहकारी कमेटीयां होंगी। समितियों को फल-सब्जी प्रोसेसिंग यूनिट लगाने और मार्केटिंग के लिए सरकार मदद देगी।
  • इस साल के अंत तक नालंदा, वैशाली, मुजफ्फरपुर व समस्तीपुर सहित आठ जिलों में प्रोसेसिंग व मार्केटिंग सहकारी कमेटीयां गठित कर कॉम्फेड की तर्ज पर काम शुरू हो जाएगा। अगले साल से अन्य जिलों में इसका विस्तार किया जाएगा।

कैसे काम करेगी कमेटी :
छोटे-छोटे लेवल पर फूड प्रोसेसिंग यूनिट इस कमेटी के सदस्य होंगे। मार्केटिंग समितियां फल-सब्जी उत्पादक कमेटीयों से उत्पाद लेकर फूड प्रोसेसिंग यूनिट को उपलब्ध कराएंगी। इससे अधिक फल-सब्जी की खपत जिला स्तर की कमेटीयों के माध्यम से होगी। प्रोसेसिंग और मार्केटिंग से होने वाली टोटल इनकम की डिटेल भी इन कमेटीयों में होगा।

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-फल-सब्जी उत्पादक कमेटीयां भी प्रोसेसिंग और मार्केटिंग के लिए कमेटी बना सकती हैं। कमेटी किसानों से सब्जी संग्रह करेगी। इसे निर्धारित पैकेजिंग व ग्रेडिंग सेंटर भेजा जाएगा। यहां से पैकेजिंग व ग्रेडिंग के बाद इसे रेफ्रीजेनरेटर गाड़ी के माध्यम से फल व सब्जी बिक्री बूथ तक भेजा जाएगा। यहां सब्जी ग्राहकों को निर्धारित रेट पर मिलेगी।

राज्य स्तर पर होगा फेडरेशन :
पंचायत व ब्लॉक स्तर पर फल-सब्जी प्रोसेसिंग और मार्केटिंग की अलग-अलग को-ऑपरेटिव कमेटीयां होंगी। इससे ऊपर जिला लेवल पर सेंट्रल को-ऑपरेटिव कमेटीयां होंगी। स्टेट लेवल पर फेडरेशन होगा। माना जा रहा है कि इस साल के अंत का फेडरेशन तैयार कर अगले साल से इस योजना को जमीनी लेवल पर लागू किया जाएगा। इससे बिहार की इकोनॉमी भी सुधरेगी।

अबतक बन चुकी हैं 50 समितियां :
प्रखंड स्तर पर अबतक सब्जी व उत्पादकों की 50 कमिटियां बन चुकी हैं। किसानों से उचित कीमत पर सब्जी व फल की खरीद होगी और ग्राहकों को सही मूल्य पर उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए डीपीआर तैयार कर लिया गया है। पिछले दिनों दिल्ली में मिटिंग में इस पर डिस्कशन भी हुआ था। उत्पादकों और ग्राहकों के बीच से ब्रोकरों को हटाने में सुविधा होगी।
– नरेंद्र प्रसाद मंडल, रजिस्ट्रार सहयोग समितियां

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