अगला ‘कलाम’ बिहार का लाल होगा, 14 देशों के वैज्ञानिकों ने लगा दी मुहर

बिहार में प्रतिभावानों की कमी नही है, बिहार के युवा हर जगह अपना परचम अपने कार्यो की बदौलत लहराते रहे हैं। आज हम बात कर रहे है बिहार के मानस नंदन की। जी हाँ मानस नंदन का नाम सुनते ही बिहार के दरभंगा जिले के एक महान वैज्ञानिक मानस बिहारी वर्मा की याद आ जाती है। मानस बिहारी वर्मा जिन्होंने ‘तेजस’ को साकार किया। पूर्व राष्ट्रपति कलाम साहब के सहयोगी मानस बिहारी वर्मा और युवा वैज्ञानिक मानस नंंदन में कई समानताएं हैं। मानस बिहारी वर्मा और मानस नंदन दोनों ही बिहार के दरभंगा जिले के रहने वाले हैं। मानस बिहारी वर्मा की तरह मानस नंदन भी लाइमलाइट से दूर रहकर काम में मशगूल रहना पसंद करते हैं।

तारीख 24 दिसंबर (शुक्रवार) को RML हॉस्पीटल ऑडिटोरियम, नई दिल्ली में वर्ल्ड साइंस कांग्रेस के 6th वार्षिक कॉनफ्रेंस के मौके पर 14 देशों के जाने-माने वैज्ञानिक जुटे थे। तीन दिन के इस कार्यक्रम में दूसरे दिन क्विज कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। विज्ञान के जटिल प्रश्नों को सुनकर दर्शक दीर्धा में मौजूद लोगों का सर चकराने लगा था लेकिन इन कठिन सवालों का सातवीं कक्षा का एक छात्र यूं जवाब दे रहा था मानो ये सवाल उसके लिए हलवा खाने के समान हो। दिल्ली के भारतीय विद्या भवन का छात्र मानस नंदन हर प्रश्न के जवाब के बाद दर्शकों से तालियां बटोर रहा था और पैनल में बैठे जजों से स्कोर। और आखिर में जब साइंस क्विज प्रतियोगिता के विजेता के नाम का ऐलान किया गया तो ऑडिटोरियम में बैठे अपने पुत्र को निहार रहे मानस के पिता मनीष कुमार मिश्रा भाव विह्वल हो उठे। हम आपको बता दें कि मनीष कुमार मिश्रा बिहार के दरभंगा जिले के मिश्रटोला मोहल्ले के रहने वाले हैं और वर्तमान में संसद भवन में बतौर अधिकारी कार्यरत हैं। मानस नंदन को साइंस क्विज में प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया।

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इंटरनेशनल साइंस कांग्रेस के आखिरी दिन बारी थी स्पीच प्रतियोगिता की। मानस ने अपने प्रेजेंटेशन का जो विषय चुना था अब आप उसके बारे में भी जान लीजिए। मानस ने “The Origin Of Universe” पर जब बोलना शुरू किया तो सब दंग रह गए कि आखिर सातवीं कक्षा का एक छात्र इस गंभीर विषय के बारे में कैसे बोल सकता है और फिर जब मानस ने अपने विचारों को दुनियाभर के मशहूर वैज्ञानिकों के सामने रखा तो सब दंग रह गए।

मानस की प्रतिभा से प्रभावित होकर काठमांडू विश्वविद्यालय के संस्थापक प्रो.भद्रमान तुलाधर ने मानस को किसी भी शोध में हर प्रकार से सहयोग करने का भरोसा दिलाया है। भाभा परमाणु शोध संस्थान के पूर्व वैज्ञानिक डॉ के पी मिश्र के शब्दों में मानस के रूप में देश को एक विलक्षण वैज्ञानिक मिला है। ईरान के डॉ घासेम नफ्पौर ने मानस की भरपूर तारीफ की और उनके माता-पिता को बधाई दी है। इनके अलावा कई देशों के वैज्ञानिकों ने मानस को भविष्य का महान वैज्ञानिक बताया है।

इससे पहले साल 2015 में आयोजित वर्ल्ड साइंस कांग्रेस के कॉनफ्रेंस में मानस को S.N.Bose अवॉर्ड से तत्कालीन केंद्रीय मंत्री नजमा हेपतुल्ला ने सम्मानित किया था। मानस यंग साइंटिस्ट कैटेगरी में सबसे कम उम्र के प्रतियोगी थे और उन्होंने प्लांट एनर्जी पर अपना प्रेजेंटेशन दिया था।

अब आप ये भी जान लीजिए की मानस नंदन बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। साइंस और संगीत का भला क्या तालमेल लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी की मानस की रूचि संगीत में भी है। मानस के पिता मनीष कुमार मिश्रा सामाजिक तौर पर काफी सक्रिय रहते हैं लिहाजा उनके घर पर कई मशहूर हस्तियों का आना-जाना लगा रहता है। रामायण फेम मशहूर संगीतकार रविंद्र जैन को भला कौन नहीं जानता है…संगीत की बारीकियों के बारे में खुद रविंद्र जैन ने बालक मानस को सीखाया था और आज भी मानस नंदन को जब भी मौका मिलता है तो वो संगीत की साधना में लीन हो जाते हैं।

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