नियोजित शिक्षक, संविदा कर्मियों और सभी के लिए 7वां वेतन आयोग से जुड़ी बड़ी खबर…

बिहार. राज्य के सात लाख से अधिक राज्यकर्मियों व पेंशनधारियों को सातवें वेतनमान का लाभ दिलाने के लिए बनी वेतन कमेटी गठित होने की अधिसूचना अगले सप्ताह जारी हो जायेगी। मगर नियोजित शिक्षकों या संविदा पर  नियुक्त कर्मियों  के लिए बुरी खबर है। राज्य के नियोजित शिक्षकों या संविदा पर  नियुक्त कर्मियों को सातवां वेतन कमेटी की अनुशंसा का लाभ नहीं मिलेगा। कमेटी नियोजित शिक्षकों या संविदा पर  नियुक्त कर्मियों के वेतन बढ़ाने संबंधी मामले पर विचार नहीं करेगी। नियोजित शिक्षकों या संविदा पर  नियुक्त कर्मियों को राज्य सरकार उनके द्वारा बहाल नहीं मानती है। राज्य सरकार का कहना है कि इन नियोजित शिक्षकों या संविदा पर  नियुक्त कर्मियों का नियोजन इकाई पंचायत या नगर निकाय है।

राज्य के अधिकारियों और कर्मचारियों को सातवें वेतन का लाभ दिलाने के लिए पूर्व मुख्य सचिव जीएस कंग की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। कमेटी को तीन माह में रिपोर्ट देना है। कमेटी ने राज्य के कर्मियों और कर्मचारी व अधिकारी संगठनों से 20 जनवरी तक सलाह मांगी है। फरवरी के दूसरे सप्ताह में कमेटी इससे संबंधी सुनवाई करेगी। मार्च तक कमेटी सरकार को रिपोर्ट देगी। इसके बाद राज्य सरकार के स्तर पर इसे लागू करने का फैसला लिया जायेगा। कमेटी के कामकाज लिए सरकार ने विकास भवन (नया सचिवालय) में जगह उपलब्ध करा दी है। कमेटी के सदस्य व वित्त (व्यय) राहुल सिंह ने कहा कि नियोजित शिक्षक और अन्य अनुबंध पर काम कर रहे कर्मी राज्य सरकार के कर्मचारी नहीं हैं। पंचायत सहित अलग-अलग नियोजन इकाईयां हैं। राज्य सरकार द्वारा सीधे तौर पर इन्हें नियोजित नहीं किया गया है।

राज्य कैबिनेट ने पिछले साल 21 दिसंबर को वेतन कमेटी को मंजूरी दी थी। केंद्र सरकार पहले सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू कर चुकी है। केंद्र के तर्ज बिहार सरकार भी अपने कर्मचारियों को वेतन कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर सातवें वेतनमान का लाभ देगी। इससे राज्य के खजाने पर 10-11 हजार करोड़ अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

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केंद्र और राज्य के कई पदों और वेतनमान में काफी अंतर
राज्य सरकार ने इस बार फिटमेंट कमेटी की जगह वेतन कमेटी का गठन किया गया है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि केंद्र के अनुरूप या उनके समानुपात में पदों के स्टैंडर्ड या कैटोगराइजेशन की जरूरत इस बार नहीं पड़ेगी। राज्य में केंद्रीय पदों के अनुरूप पदों का समानुपातिक सृजन 1975 में गठित की गयी फिटमेंट कमेटी में कर दिया गया था। इसी के आधार पर इस बार भी पद के अनुसार वेतन की समानुपातिक रूप से बढ़ोतरी कर दी जायेगी। यह काम वेतन कमेटी के जरिये ही हो जायेगा। केंद्र और राज्य के कई पदों और वेतनमान में काफी अंतर है और कई पद ऐसे हैं, जो सिर्फ राज्य में ही हैं। वेतन कमेटी समीक्षा करके सभी पदों के लिए नये वेतनमान का निर्धारण करेगी। राज्य में सर्विस और कैडर पदों को मिला कर इनकी संख्या करीब 45 है।

20% तक की हो सकती है बढ़ोतरी
राज्य सरकार के कर्मचारियों को उनके मूल वेतन में करीब 14%, एचआरए में पांच प्रतिशत समेत अन्य भत्तों को मिला कर कुल 20% के आसपास वेतन बढ़ोतरी का लाभ सकता है हो। वित्त विभाग के आकलन के अनुसार, यह बढ़ोतरी 20 से 21% के बीच ही रहेगी। इसका सीधा लाभ राज्य सरकार के करीब तीन लाख 60 हजार कर्मचारियों और चार लाख 10 हजार पेंशनधारकों को होगा।

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