तेजप्रताप ने छिनी गरीब रिक्शेवाले की रोजी तो लालू ने घर बुलाकर दिया मुआवजा

बिहार के स्वास्थ्य मंत्री और लालू यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव की ड्राइविंग के शौक जगजाहिर हैं. कभी वो घोड़े पर दिखते हैं तो कभी ऑडी कार चलाते हुए. लेकिन इस बार उनके शौक से एक रिक्शावाले को 17 दिनों तक परेशानियों का सामना करना पड़ा. पटना के चिड़ैयाटाड़ के अरुण कुमार ई-रिक्शा चलाकर अपनी घर-गृहस्थी की गाड़ी खींच रहे थे. 12 दिसंबर को इनसे एक गलती हो गई. एक ठेकेदार के कहने पर ये अपनी ई-रिक्शा में कुछ सामान लादकर 3 देशरत्न मार्ग यानि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव के घर पहुंच गए.

जैसे ही तेजप्रताप ने इनका ई-रिक्शा देखा तो इसे चलाने की डिमांड कर डाली. पहले अरुण ने रिक्शा देने में आनाकानी की लेकिन मंत्री जी के जिद के कारण अरुण की एक ना चली. अरुण ने उन्हें रिक्शा दे दिया. ई-रिक्शा न सिर्फ मंत्री तेजप्रताप ने बल्कि उनके ड्राइवर प्रमोद ने भी चलाया. इसी दौरान मंत्री जी के ड्राइवर ने अरुण की ई-रिक्शा एक खंभे में ठोंक डाली.

मंत्रीजी ने अरुण को फौरन कहा कि आप जाइए, आपका ई-रिक्शा बनवा दिया जाएगा. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. अरुण कुमार रिक्शा बनाने के लिए 17 दिनों तक भाग दौड़ करते रहे लेकिन उनका रिक्शा नहीं बना और ना ही कोई मुआवजा मिला.

ई-रिक्शा बनने के लिए जरूरी पैसा न मिलते देख अरुण बुधवार को राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के नोटबंदी के खिलाफ चल रहे महाधरने में पहुंच गए और वहीं लोगों से अपनी बात कहनी शुरू कर दी. मामला लालू यादव तक पहुंचा तब जाकर इन्हें 17 दिनों बाद गाड़ी बनवाने के लिए जरूरी पैसे मिले.

मीडिया में खबर आने के बाद लालू प्रसाद ने खुद अरुण कुमार को फोन किया और रिक्शा बनाने के लिए अरुण कुमार को 15 हजार रुपये दिये.

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अरुण कुमार के अनुसार उन्होंने एक लाख चालीस हजार में ई-रिक्शा में खरीदी थी और प्रतिदिन 600-700 कमा कर परिवार का भरण-पोषण करते थे लेकिन रिक्शा टूटने के बाद पिछले 17 दिनों से परेशान थे. अब पैसे मिलने से वो संतुष्ट हैं.

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