फूलों की बारिश और आतिशबाजी के बीच मना प्रकाशोत्सव, देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं का बिहार ने जीत लिया दिल

गुरुगोविंद सिंह महाराज के 350वें प्रकाशोत्सव का आयोजन ऐतिहासिक रहा। चारों ओर से फूलों की बारिश, आतिशबाजी, तख्त परिसर में जुटी तीन लाख से अधिक संगत। जुबां पर- वाहे गुरु-वाहे गुरु का जाप। यह दृश्य था तख्त साहिब में गुरुवार की देर रात का। सफेद संगमरमर पर रंगीन रोशनी से तख्त साहिब की आभा अनोखी लग रही थी।

समारोह में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु शामिल होने पटना आए। चीन, स्पेन, यूके, इटली, कनाडा और फ्रांस के श्रद्धालु आए। गुरु की नगरी आए श्रद्धालु अपने को धन्य मान रहे हैं। पांच दिनों तक गांधी मैदान और तख्त साहिब के आसपास का इलाका बोले सो निहाल, सतश्री अकाल… से गुंजायमान रहा। पटना में दिन-रात का फर्क मिट गया।

बैंड-बाजों पर शुरू हुई गुरुवाणी की धुन
विशेष दरबार साहिब से लेकर बाहरी परिसर तक संगत दिखी। बैंड-बाजों पर गुरुवाणी की धुन शुरू हुई। विशेष कीर्तन दरबार शुरू हुआ। कीर्तनी जत्थों ने गुरु महाराज की जन्मकथा व संदेश को कीर्तन के जरिए बताया। सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब अमृतसर के भाई रविंदर सिंह हजूरी रागी जत्था, भाई लखविंदर सिंह, भाई इंद्रजीत सिंह व भाई राय सिंह हजूरी रागी जत्था ने कीर्तन पेश किया। प्रकाशोत्सव के वक्त तख्त साहिब की ओर से फूलों की बारिश हुई। इसके बाद आतिशबाजी हुई।

मिठाई वितरण
तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी इकबाल सिंह ने गुरु गोविंद सिंह महाराज की जन्मकथा कही। संगत के बीच सूखे मेवे व मिठाइयों का वितरण किया गया। मौके पर केंद्रीय मंत्री एसएस आहलुवालिया समिति के अध्यक्ष अवतार सिंह, महासचिव सरजिंदर सिंह, सचिव महेंद्र सिंह छाबड़ा, वरीय उपाध्यक्ष शैलेंद्र सिंह, कनीय उपाध्यक्ष बीबी कंवलजीत कौर, गुरेंद्रपाल सिंह, आरएसजीत, चरणजीत सिंह, महाराजा सिंह सोनू आदि मौजूद थे।

लाखों श्रद्धालुओं ने मत्था टेका
प्रकाशोत्सव का मुख्य समारोह तख्त साहिब में मनाया गया। दरबार साहिब में लाखों श्रद्धालुओं ने मत्था टेका। देश-विदेश से आए विद्वान, कथा वाचक, प्रचारक, रागी जत्था, ढाढ़ी जत्थों ने गुरु महाराज के संदेश पर प्रकाश डाला। संगत की लंबी कतार अशोक राजपथ तक लगी रही। सुबह चार बजे से विशेष समागम आरंभ हुआ। अरदास के बाद हुकुमनामा, फिर कड़ाह प्रसाद का वितरण हुआ।

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आयोजन पर लोगों की प्रतिक्रिया
अमृतसर के सुखी सिंह ने कहा कि गुरु की कृपा रही तो 2067 में भी पटना आएंगे। इससे पहले गुरु महाराज के 300वें प्रकाशोत्सव में भी पूरी दुनिया से श्रद्धालु आए थे। तब समारोह 15 जनवरी 1967 से 18 जनवरी 1967 तक चला था। श्रद्धालु बिहार की आवभगत से प्रसन्न रहे। पंजाब से आए रविन्दर का कहना था कि उन्हें यहां का डेकोरेशन बहुत बढ़िया लगा। वे पहली बार पटना आए हैं और यहां उन्हें सब कुछ बहुत अच्छा लगा। लुधियाना के तेजेंद्र सिंह ने कहा कि 350वें प्रकाशोत्सव को लेकर शानदार तैयारी की गई। राज्य सरकार ने अतिथियों के लिए बढ़िया व्यवस्था की। श्रद्धालु कहते हैं बिहार ने पंजाबियों का दिल जीत लिया।

अमृतसर की नवजोत कौर ने कहा कि अतिथियों का सेवा-सत्कार करना कोई बिहार से सीखे। गुरु की नगरी में मन ऐसा रम गया है कि जाने की इच्छा नहीं होती। गुरु की कृपा बनी रही तो फिर 351 वें गुरुपर्व में शामिल होने आऊंगी। अमृतसर के नरेंद्र सिंह ने कहा कि गुरु की कृपा बनी रही तो फिर 351वें प्रकाशोत्सव में शामिल होंगे। परिवार के जो लोग गुरुपर्व में नहीं आ सके उनके लिए गुरु नगरी की धूल लेकर जाएंगे। सरकार की ओर से एेसी व्यवस्था देख मन गद‌्गद हो गया।

लुधियाना से अाईं गुरप्रीत कौर ने कहा कि अब तो गुरु की नगरी का नाम आते ही सिर श्रद्धा से झुक जाता है। यहां के लोगों ने जो प्यार दिया है उसे कभी नहीं भूल पाऊंगी। अब तो बार-बार गुरुपर्व में शामिल होने की इच्छा होती है।

पंजाब से आए सुखविंदर सिंह ने कहा कि सरकार की व्यवस्था देखकर मन खुश हो गया। मेरी तो कामना है कि गुरु महाराज की कृपा बिहार पर बनी रहे। नरेंद्र सिंह ने कहा कि समारोह तो बहुत देखे पर प्रकाशोत्सव के सामने सब फेल। मन करता है कि गुरु की नगरी को छोड़कर नहीं जाएं। उनकी कृपा रही तो अगले गुरुपर्व में भी आएंगे।

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