भारत को जूनियर विश्व हॉकी चैंपियन बना, छपरा के कोच हरेंद्र का सपना पूरा

भारतीय पुरुष जूनियर हॉकी टीम ने जूनियर वर्ल्ड कप हॉकी टूर्नामेंट जीत लिया है। इसके साथ ही टीम के छपरा के कोच हरेंद्र सिंह का भी सपना पूरा हो गया है, 2005 तो में सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया से हारने के बाद अधूरा रह गया था।

जीत के अश्वमेधी रथ पर सवार भारतीय टीम 15 बरस बाद जूनियर विश्व कप हॉकी फाइनल में रविवार को बेल्जियम को 2-1 से हराकर खिताब अपने नाम किया। जूनियर विश्व कप का यह भारत का दूसरा खिताब है। इसके पहले 2001 में ऑस्ट्रेलिया के होबर्ट में भारतीय टीम ने अर्जेंटीना को 6-1 से हराकर एकमात्र जूनियर विश्व कप जीता था।

खेल की दुनिया के प्रतिष्ठित सम्मान द्रोणाचार्य अवार्ड प्राप्त छपरा जिले के दाउदपुर थाना क्षेत्र के बतरहां गांव निवासी हरेंद्र सिंह ने इस जीत में अहम भूमिका निभाई। दो साल आठ महीने पहले उन्हें जब यह जिम्मेवारी मिली तो भारतीय खिलाड़ियों में जीत का जज्बा भरना पहली चुनौती थी। अपने अनुभव, अनुशासन और खेल के प्रति प्रतिबद्धता की वजह हरेन्द्र कामयाब रहे। आज उनकी टीम बेल्जियम को हराकर विश्व विजेता है। देश के विभिन्न प्रदेशों से आने वाले खिलाड़ी आज सर आंखों पर है। लेकिन यह जीत इतनी आसान नहीं थी। हरेन्द्र इसके पहले भी विश्वविजेता टीम के कोच रह चुके हैं। जीत उनकी रगों में है।

हरेंद्र सिंह

जीत के बाद खुद को रोने से रोक ना सका ये बिहारी
11 बरस पहले रोटरडम में कांसे का तमगा नहीं जीत पाने की टीस उनके दिल में नासूर की तरह घर कर गई थी और अपनी सरजमीं पर घरेलू दर्शकों के सामने इस जख्म को भरने के बाद कोच हरेंद्र सिंह अपने आंसुओं पर काबू नहीं रख सके।

अपने जज्बे के लिए मशहूर हैं कोच हरेंद्र सिंह
अपने 16 साल के कोचिंग करियर में अपने जुनून और जज्बे के लिए मशहूर रहे हरेंद्र ने दो साल पहले जब फिर जूनियर टीम की कमान संभाली, तभी से इस खिताब की तैयारी में जुट गए थे। उनका किरदार फिल्म ‘चक दे इंडिया’ के कोच कबीर खान (शाहरुख खान) की याद दिलाता है, जिसने अपने पर लगे ‘कलंक’ को मिटाने के लिए एक युवा टीम की कमान संभाली और उसे विश्व चैंपियन बना दिया।

पढ़े :   PM मोदी के कैशलेस इंडिया पॉलिसी के मुरीद हुए बिहार के दो युवा अफसर ने ऐसे रचाई शादी...

कड़ी मेहनत से जीत को बनाया स्वभाव
हरेन्द्र ने कड़ी मेहनत और समर्पण की बदौलत जीत अपनाने का मूल मंत्र दिया। फोन पर बातचीत में हरेन्द्र ने बताया कि खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के दौरान मैने ‘31सी का फार्मूला अपनाया और खिलाड़ियों में जीत का जुनून पैदा किया। 31 सी का भाव है अंग्रेजी अक्षर सी से प्रारंभ होने वाले 31 शब्द-जो जीत, विश्वास से जुड़े हैं, मसलन- कंट्री, कम्यूनिकेशन, कंट्रोल, कंपोज, कैप्चर आदि-आदि। हरेन्द्र ने खिलाड़ियों से कहा- ये 31 सी आपकी तैयारी को चरम पर पहुंचायेंगे। 32वां सी प्रतियोगिता शुरू होने के एक दिन पहले बताऊंगा।

हरेन्द्र ने प्रतियोगिता के एक दिन पहले खिलाड़ियों को मूल मंत्र दिया- सी फॉर चैंपियन। उनके खिलाड़ियों ने कोच की बात को मन-मस्तिष्क में इस कदर स्थापित किया कि टूर्नामेंट बीतते-बीतते यही उनकी पहचान बन गई।

मध्यम व गरीब तबके के खिलाड़ी टीम में
विश्व विजेता भारतीय टीम वैसे 18 खिलाड़ियों से सजी है जो मध्यम व गरीब तबके से ताल्लुक रखते हैं। कोच हरेन्द्र ने कहा कि इंडियन टीम को सेहत, शोहरत व दौलत मिलने के लक्ष्य पर तैयार कराया गया। तैयारी के दौरान भावनात्मक बातें भी हुई और मैने उन्हें बताया कि लक्ष्य के अनुसार कार्य करने पर कॅरियर की मूल उपलब्धि हासिल होगी। इसके पूर्व वन-टू-वन खिलाड़ियों से बात कर उनकी मानसिक दृढ़ता और खेल के प्रति जुनून को जाना गया।

खिलाड़ियों को मिल रही आर्थिक मदद
वर्ल्ड कप जीतने के बाद टीम इंडिया के खिलाड़ियों के पैतृक राज्य सरकारों ने आर्थिक मदद की घोषणा कर उनके हुनर का सम्मान किया है। विभिन्न राज्यों की सरकार ने अपने खिलाड़ियों को नगद पुरस्कार दिया है। यूपी ने अपने एकमात्र खिलाड़ी को एक करोड़, हरियाणा ने अपने खिलाड़ियों को डेढ़ करोड़ दिया। अन्य राज्य सरकारों ने 50 लाख की घोषणा की है।

पढ़े :   Jio मुफ्त में देगा नया फीचर फोन 'इंडिया का इंटेलीजेंट स्मार्टफोन', जानें इसके बारे में

बिहार का खिलाड़ी नहीं होने का मलाल
अपने हुनर से देश को दो बार विश्व चैपिंयन बनाने वाले छपरा के हरेन्द्र सिंह को इस बात का गहरा मलाल है कि उनके गृह राज्य बिहार का कोई भी खिलाड़ी भारतीय टीम में नहीं है। राष्ट्रीय कोच ने अपनी पीड़ा बांटते हुए कहा कि नेशनल फ्लैग के साथ खिलखिलाता बिहार को कोई चेहरा भी टीम में होता तो जन्मभूमि के प्रति दायित्व का निर्वाह हो जाता। कोच ने कहा कि राज्य सरकार यदि जमीन दे तो वे बिहार में हॉकी की एकेडमी खोलने को तैयार हैं। वे चाहते हैं कि अपने राज्य के युवा भी इस खेल में आगे आयें और राष्ट्रीय स्तर पर नाम रौशन करें।

तिरंगे में डूबा स्टेडियम
खेल शुरू होने से पहले ही पूरा स्टेडियम भारतीय रंग में डूबा था। जैसे ही घड़ी ने खेल शुरू होने का इशारा किया भारतीय खिलाड़ी गेंद लेकर बेल्जियम के पाले में टूट पड़े। भारतीय खिलाड़ियों ने शुरुआत ऐसी की जैसे वे सिर्फ जीतने के लिए उतरे हैं। शुरुआती पांच मिनट में ही भारतीय खिलाड़ियों ने दो खूबसूरत अटैक किए।

Live Bihar News

Our Goal is to Bring Important News, Photos and Information to the Public By Using Social Media, News Paper and E-News.

Leave a Reply

error: Content is protected !!