सिविल कोर्ट के चपरासी की बेटी बनी जज

हौसलों के पंख से एक चपरासी की बेटी ने ऐसी उड़ान भरी कि उसने पिता के सभी सपने पूरे कर दिए। बिहार के भागलपुर सिविल कोर्ट में चपरासी जगदीश साह के मन में जज के रूतबे व प्रतिष्ठा को देखकर लालसा थी कि उनके घर से भी कोई जज बने। वे अपने दिल की बात घर में साझा भी करते थे। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि उनकी लाडली जूली उनके सपनों को पूरा करने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगा रही है।

पूरी-पूरी रात जागकर उसने न्यायिक सेवा की तैयारी की और बुधवार को 29वीं बिहार न्यायिक सेवा परीक्षा के रिजल्ट जारी हुए तो लाडली ने अपने पिता के सपने को सच कर दिखाया। प्रदेश में 194 लोगों की सफलता के बीच वह 251 अंकों के साथ ईबीसी कोटे में 24वें स्थान पर रही। उसे असैनिक न्यायाधीश (कनीय काेटि) का पद मिला है। अपनी मेहनत और पिता के सपोर्ट से अब वह उसी कुर्सी पर बैठेगी, जिसकी चाकरी उसके पिता करते रहे।

2011 में टीएनबी लॉ कॉलेज से है पास आउट
इस खुशखबरी को जूली साझा भी नहीं कर पाई। दो दिनों से गंभीर रूप से बीमार अपने पिता की सेवा में वह और उसके घर के सभी लोग डॉक्टर के यहां दौड़ रहे हैं। बरारी क्षेत्र के मायागंज माेहल्ले की जूली 2011 में टीएनबी लॉ कॉलेज से पासआउट हुई थी। जूली के सहपाठी और सिविल काेर्ट में पदस्थ कर्मचारी मनीष पांडेय ने बताया कि जूली ने परीक्षा में पास करने की जानकारी साझा की। मनीष और जूली दोनों ने एक साथ लॉ की परीक्षा दी थी। पढ़ाई के दौरान भी जूली बार-बार पिता के सपने को पूरा करने की बात करती थी। जूली ने दो बार बीपीएससी की मुख्य परीक्षा भी पास की थी। दोनों परीक्षा में उसने विधि शास्त्र को ही मुख्य विषय के रूप में रखा था।

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जूली ने कहा – आज मैंने पिता का सम्मान बढ़ा दिया
जूली ने मनीष को बताया कि भले ही उसने वकालत के लिए इनरॉल करा लिया है। लेकिन उसका ध्येय पापा का सपना यानी जज बनना है। आम लोगों को अदालत से क्या उम्मीदें हैं? कैसे दबे-कुचलों को इंसाफ दिला पाएंगी। मनीष ने बताया कि पिता के गंभीर रूप से बीमार पड़ जाने के कारण जूली ने सिर्फ इतना ही कहा कि आज उसने पिता का सम्मान बढ़ा दिया है। पिता जब ठीक हो जाएंगे, तब उनके साथ कोर्ट जाऊंगी।

Rohit Kumar

Founder- livebiharnews.in & Blogger- hinglishmehelp.com | STUDENT

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