अतिक्रमण हटाने के नाम पर रेलवे के अधिकारियो ने किया खानापूर्ति

सिमरी बख्तियारपुर, सहरसा

शुक्रवार को रेलवे के द्वारा अतिक्रमण हटाने की तिथि निर्धारित थी। भारी भरकम पुलिस बल के साथ अतिक्रमण तोड़ने रेलवे के अशिकारी एवं काफी पुलिस बल के साथ सिमरी बख्तियारपुर पहुचे। लेकिन रेलवे ने अतिक्रमण हटाने के नाम पर दर्जनों गरीब के दुकान पर बुलडोजर चला दिया। जवकि कई बड़े, पैरवीकार की दुकान को छोड़ दिया। रेलवे का कहना था कि रेलवे के सोन्द्रयकरं करना है, जिन कारन वर्षों से जमी अतिक्रमण को हटाना है। जब अतिकर्मकन हटाने लगा तो पहले वर्षों से जमे दुकानदार को नहीं हटाकर गरीब दुकानदार की दूकान पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। इन गरीबो के दूकान ऐसे जगह था, जहा रेलवे को जमीन की कोई आवश्यकता ही नहीं थी। बाबजूद गरीब एवं फुटकर दुकानदार पर बुलडोजर चला जहा रेलवे के अधिकारी अपनी पीठ थपथपा रहा है, वही गरीब रो रहा है।

दुकानदार से हुई डील-

अतिक्रमण के चपेट में आये दुकानदार का कहना था जकह रेलवे को अतिक्रमण हटाने चाहिए वह नही हटाकर गरीब को बेघर कर दिया। वही अधिकांश दुकानदार से मोटी रकम पर डील कर दुकान को छोड़ दिया। गरीब लोग सड़क पर रात गुजारने को मजबूर है तो रेलवे के अधिकारियो ने अपनी दुकान खोल दुकानदार से लाखों की उगाही कर कई दर्जन दुकान में हाथ तक नहीं लगाया। स्थिति यह थी की अगर दुकान बचाना हो तो मोटी रकम दो। जो दिया उनको छोड़ा, जो नहीं दिया उनके ऊपर बुलडोजर चलाया। विगत 40 साल से भी ज्यादा समय से साइकिल की दुकान चला अपनी एवं परिवार को चला रहे मो मिन्हाज के दुकान पर बुलडोजर चला दिया। जवकि मिन्हाज का रेलवे का नियमित रशीद कटता था। रोते हुए मो मिन्हाज ने बताया कि मेरे दुकान के पीछे मो मोती  का आलीशान बंगला है जो दबंग एवं पैसे वाला है, रेलवे के अधिकारी को मोटी रकम देकर मेरा दुकान तोड़वा दिया। अब मो मिन्हाज के बच्चे सड़क पर रात गुजारने को मजबूर है। इसी तरह कई दर्जन दुकानदार से डील होने पर उनका दूकान को नहीं तोड़ा। अब मिन्हाज कौर्ट जाने की तैयारी में है।

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