नेताजी ने बिहार के लोगों में भरा था आजादी का जोश, …जानिए

“तुम मुझे खून दो, मैं तुझे आजादी दूंगा’ नारे से पूरे देश को उत्साहित करनेवाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस 26 अगस्त 1939 को बिहार के मुजफ्फरपुर के तिलक मैदान में सभा कर मुजफ्फरपुर समेत आसपास के कई जिलों से आए लोगों में आजादी के लिए जोश भरा था।

एक तरह से क्रांति का शंखनाद करते हुए लोगों से अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष और तेज करने का आह्वान किया था। सभा में हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। नेताजी का भाषण सुनने आए आजादी के दीवानों ने मंच से उतरते ही उन्हें हाथी पर चढ़ाया और पूरे शहर का भ्रमण कराया था। इस दौरान सड़कों पर दोनों तरफ लोग उनके स्वागत को कतार में खड़े थे।

उसके बाद वे दरभंगा चले गए थे। समाजसेवी एसके चटर्जी बताते हैं कि नेताजी के भाषण सुनकर खून में गर्मी आ जाती थी। यहां भी युवाओं ने अंग्रेजों को देश से भगाने के लिए जान की बाजी लगा देने का संकल्प लिया था। चटर्जी ने बताया कि भागलपुर में उनके रिश्तेदार रहते हैं। वे लोग उस कुर्सी को सजाकर रखते हैं जिस पर कभी नेताजी बैठे थे। उनके जन्मदिन पर कुर्सी की पूजा करते हैं।

मेहसी के नागरिक पुस्तकालय में धरोहर के रूप में आज भी सुरक्षित हैं नेताजी की हस्तलिखित यादें
दोबारा बिहार यात्रा के दौरान नेताजी चंपारण आए थे। मेहसी के नागरिक पुस्तकालय के विजिटर्स बुक में उनकी हस्तलिखित यादें आज भी सुरक्षित रखी हुई हैं। 6 फरवरी 1940 को विजिटर्स बुक में उन्होंने नागरिक पुस्तकालय के संस्थापक की सराहना की थी। चंपारण यात्रा के दौरान नेताजी ने कई स्थानों पर जाकर अंग्रेजों की दासता को खत्म करने की रणनीति बताई थी। वे देवीलाल साह के घर पर ठहरे थे। उनके निकटतम सहयोगी लंबोदर मुखर्जी, मंगल प्रसाद श्रीवास्तव, संत सेवक प्रसाद आदि के घरों में आज भी नेताजी के स्मृति शेष सुरक्षित हैं।

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