मधुबनी: मिथिला में रामायण से जुड़े धरोहर का नहीं हो रहा संरक्षण : महंथ

मढ़िया में संकटमोचन हनुमान के प्राण प्रतिष्ठा बाद महाभंडारा का आयोजन 

मधुबनी (हरलाखी): आज भारत नेपाल का संबंध अटूट हो चूका है। इन दोनों देश के बीच पारिवारिक, धार्मिक, व्यवसायिक व व्यवहारिक संबंध है। सबसे खास संबंध मिथिला और अयोध्या के वजह से जुड़ा हुआ है। रामायणकाल में मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम व माता जानकी का पहला मिलन फुलहर स्थित गिरजास्थान में हुआ था। जो रामायण में वर्णित है। लेकिन आज यह धरोहर धवस्त होने के कगार पर है। जिसे संरक्षित करना बहुत ही आवश्यक है। ये उक्त बातें प्रखंड के गंगौर गांव स्थित मढ़िया में संकटमोचन हनुमान जी के प्राण प्रतिष्ठा के बाद आयोजित महाभंडारा के दौरान नेपाल के मटिहानी महंथ ने कहा। उन्होंने आम जनमानस व भारत सरकार से इसके दिशा में पहल करने का आग्रह किया है। बताते चले कि पांच दिवसीय कार्यक्रम के तहत पुरे विधि विधानपूर्वक ग्रामीणों के सहयोग से साधू संत व पंडितों ने वैदिक मन्त्रोच्चारण कर प्रतिमा का स्थापना किया। प्राण प्रतिष्ठा की शुरुआत कुंवारी कन्याओं के द्वारा भव्य कलश शोभा यात्रा से की गई थी। जहां पंडित अनिल झा ने हवन व पूजा अर्चना कर माहौल को भक्तिमय बना दिया। प्राण प्रतिष्ठा निष्ठापूर्वक पुजारी नवलकिशोर दास के द्वारा करवाया गया। पांच दिवसीय कार्यक्रम के समापन पर मिथिला क्षेत्र भारत नेपाल के साधू संतो का महाभंडारा का आयोजन किया गया। कमिटी के अध्यक्ष चंचल यादव व सचिव सुरेंद्र यादव ने बताया कि निष्ठापूर्वक रामभक्त हनुमान जी के प्रतिमा का प्राण प्रतिष्ठा किया गया है। जिसमे सभी ग्रामीण श्रद्धापूर्वक सहयोग दिए है। इस पांच दिवसीय कार्यक्रम अवधि में पूजा, कीर्तन भजन, अष्टयाम व महाभंडारा समेत कई संस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये गए। इस आयोजन में महत्वपूर्ण योगदान सेवा निवृत्त रेलवे के वरिष्ठ लेखा परीक्षा अधिकारी बिरजू कृष्ण यादव जी का रहा है। मौके पर संत बाबा रामभूषण दास निर्मोही, रामपवित्र मिश्रा, राजनंदन यादव, गोविंद यादव, मनोज प्रभाकर, पुकार यादव, चौधरी यादव, भजन यादव, रामाशीष यादव, रामबहादुर यादव व रामबाबू यादव समेत अन्य ग्रामीण मौजूद थे।

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