5 बार लिम्का बुक ऑफ रिकाॅर्ड्स में जगह बनाने वाले 66 साल के इस बिहारी शख्स के हैं अजीब शौक

हर व्यक्ति का अपना-अपना शौक होता है। लेकिन शौक में जब इनोवेशन और कुछ अलग करने का जुनून आ जाए, तो कीर्तिमान बन जाता है। कुछ ऐसे ही इनोवेशन और अनोखे अजीब शौक से बिहार के राजधानी पटना के नाला रोड निवासी नरेश चंद्र माथुर हैं। जिन्होंने पांच बार लिम्का बुक ऑफ रिकाॅर्ड्स में जगह पाई है।

एसबीआई में सहायक महाप्रबंधक के पद से रिटायर्ड माथुर 1975 से अंग्रेजी अखबारों में छपे सामाजिक मुद्दे पर केंद्रित संपादकीय की कटिंग का संग्रह कर रहे हैं। इसके लिए 2013 में लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स में नाम दर्ज किया गया। इसके साथ ही यूनिक न्यूज कलेक्शन, पंच लाइन कोटेबल कोट्स में कैंसर जागरूकता, सेव वाटर का संदेश देते हुए कोट्स और यूनिक कैलेंडर से प्रभावित होकर लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स ने इनका नाम नेशनल रिकॉर्ड में शामिल किया है।

इनके हैं अजूबे शौक, रखे हैं शू-शो के रिकॉर्ड
माथुर का शौक बिल्कुल अलग है। देश-विदेश में हाई पर्सनालिटी पर फेंके गए जूते की अखबारों में प्रकाशित खबरों की लंबी लिस्ट इनके पास संगृहीत है। इनकी दिनचर्या सूर्य नमस्कार और पूजा के बाद अखबारों से होती है। हर दिन दो घंटे अखबार पढ़ते हैं और सामाजिक मुद्दे पर केंद्रित संपादकीय, यूनिक न्यूज की कटिंग कर उसकी फाइलिंग करते हैं। वे नॉन फिक्शन पुस्तकें पढ़ते हैं। इनकी लाइब्रेरी में 33 सौ से अधिक पुस्तकें हैं। हर शनिवार को एक पुस्तक खरीदते हैं।

66 की उम्र में भी कर रहे पढ़ाई
एनसी माथुर 66 साल के हो गए हैं। इसके बावजूद भी अब तक पढ़ाई जारी है। रिटायरमेंट के बाद जर्नलिज्म की पढ़ाई की। संस्कृत में ग्रेजुएशन किया और अभी सिखिज्म की पढ़ाई कर रहे हैं। वे कहते हैं एक व्यक्ति ने कहा रिटायर्ड आदमी की भी कोई वैल्यू होती है क्या? यह बात मेरे जेहन में दौड़ने लगी। फिर मैंने कुछ अलग करने की ठानी और पुराने संग्रह को किताब का शक्ल देने में जुट गया। इस तरह से मैंने तीन पुस्तकें लिखीं।

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कब-कब लिम्का बुक में दर्ज हुआ नाम

  • 2013 : 1975 से दो प्रतिष्ठित अंग्रेजी अखबार के संपादकीय का सबसे बड़ा संग्रह किया। 1000 संपादकीय की कटिंग का संग्रह है।
  • 2013 : जनवरी 2012 में पंच लाइन पुस्तक प्रकाशित हुई। इसमें 1112 कोट्स हैं। पुस्तक की खास बात यह है कि इसमें हर पन्ने के नीचे कैंसर जागरूकता के लिए लिखा कोट है।
  • 2014 : जून 2013 में दो प्रतिष्ठित अखबारों में छपे संपादकीय के अंश को प्रकाशित किया। इसमें 280 पेज की किताब प्रकाशित की गई। हर पेज के नीचे सेव वाटर पर कोट है।
  • 2015 : 2014 में यूनिक न्यूज प्रकाशित हुई। इसमें 251 खबरें हैं जो अलग-अलग अखबारों से इकट्ठा की गई है। इसमें मजाकिया किस्म की खबरें हैं।
  • 2017 : माई कैलेंडर, माई मैसेज नाम से कैलेंडर बनाया। हर कैलेंडर का थीम सामाजिक समस्याओं पर आधारित है। धूम्रपान निषेध, शिक्षा से लेकर पानी बचाने तक के संदेश दिए गए हैं।

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