बिहार के इस कोर्ट में तारीख पर तारीख नहीं मिलती …जानिए

सुप्रीम कोर्ट से लेकर लोअर कोर्ट तक में लाखों मुकदमें लंबित हैं। पचास-पचास साल से मुकदमे लड़े जा रहे। वहां तारीख पर तारीख मिलती है। लेकिन, इस से ठीक उलट बिहार के बक्सर जिले के मगरांव पंचायत की ग्राम कचहरी तुरंत फैसले सुनाती है।

गांव में ही न्याय मिल जाने से लोग थाना-कोर्ट का चक्कर नहीं लगाते। वर्ष 2016 में गठित इस ग्राम कचहरी में अब तक सौ से च्यादा मामले सुलझाए गए हैं।

इस साल अबतक 23 दिवानी और नौ फौजदारी मामलों में आदेश पारित किया गया। खास बात यह है कि अभी तक ग्राम कचहरी के फैसले को किसी भी पक्ष ने अन्य अदालतों में चुनौती नहीं दी है।

उदाहरण पेश करते फैसले
उतड़ी गांव की विमला देवी ने मगरांव पंचायत की ग्राम कचहरी में शिकायत दर्ज कराई कि उनके पति विश्वनाथ राम विक्षिप्त हैं। परिवार की देखभाल करने में सक्षम नहीं हैं। उनके ससुर संपन्न किसान होते हुए भी उनका साथ नहीं दे रहे हैं। ग्राम कचहरी ने मामले की सुनवाई की। फैसला सुनाया कि ससुर चंद्रिका राम तीन क्विंटल चावल और ढाई क्विंटल गेहूं विमला देवी को दें। इस पंचायत के लोग घरेलू झगड़ों से लेकर सामाजिक विवाद को लेकर ग्राम कचहरी के पास आते हैं।

न्याय पीठ करती है सुनवाई
ग्राम कचहरी का संचालन एक नियमावली के तहत होता है। महिलाओं और पुरुषों से संबंधित मामलों की सुनवाई के लिए दो अलग-अलग न्याय पीठ बनी हुई है। दोनों पीठों में 13 पंचों को शामिल किया गया है। पीठ के प्रमुख सरपंच होते हैं। ग्राम कचहरी में सुनवाई के लिए दो कार्यदिवस तय किए गए हैं। सोमवार और शुक्रवार को मुकदमे की सुनवाई की जाती है। विशेष मामले में कभी भी आपात कचहरी लगाई जा सकती है।

पढ़े :   देश में पहली बार: बिहार के इस रेलवे प्लेटफॉर्म पर पढ़नेवाले स्टूडेंट्स को मिला पहचानपत्र, ...जानिए

महिलाओं के लिए अलग पीठ
गांव में महिला उत्पीडऩ से संबंधित मामलों का निष्पादन पंच कुसुम रानी के नेतृत्व में गठित न्याय पीठ करती है। इस पीठ में फूलवन्ता देवी, फूलमती देवी, राजकुमारी और चन्दा देवी सदस्य के रूप में हैं। वहीं, सामान्य मामलों की सुनवाई सरपंच संजय कुमार सिंह के नेतृत्व में बनी पीठ करती है। इस पीठ में कन्हैया पान्डेय, राधेश्याम प्रजापति, बिकाउ राम, अशोक कुमार सिंह आदि सदस्य हैं।

कैसे मामले निपटाए
मगरांव गांव के दिनेश्वर साह ने कचहरी में गुहार लगाई कि उनके तीन भाई उनके हिस्से की जमीन नहीं दे रहे हैं और वे खुद किराए के मकान में रहने को मजबूर हैं। ग्राम कचहरी ने शिकायत को सही पाया और उन्हें उनके हिस्से की जमीन दिलवाई गई।

दिनेश्वर कहते हैं कि जो काम ग्राम कचहरी से छह महीने में हो गया, उस काम के लिए बड़ी अदालतों में शायद वर्षों उन्हें चक्कर काटने पड़ते। एक अन्य मामले में परवीन बीबी ने कुर्बान मियां पर आरोप लगाया कि मारपीट कर उन्होंने सोने की चेन छीन ली है। ग्राम कचहरी की सुनवाई में चोरी का मामला गलत निकला और दोनों पड़ोसियों को भविष्य में शांतिपूर्वक रहने का फरमान सुनाया गया।

कहा- सरपंच, मगरांव ने
गांवों में संपत्ति और मामूली प्रकृति के विवाद च्यादा होते हैं जो समय के साथ गंभीर हो जाते हैं। ग्राम कचहरी में लोगों का विश्वास जगा है कि यहां आने पर न्याय मिलेगा। ग्राम कचहरी के प्रयास रहता है कि अपने सीमित अधिकारों के दायरे में वादी को न्याय दे।
– संजय कुमार सिंह, सरपंच, ग्राम कचहरी, मगरांव।

पढ़े :   अमेरिका और जर्मनी में 'मिठास' घोल रही मुजफ्फरपुर के शाही लीची की शहद, जानिए

वरीय लोक अभियोजक, बक्सर
बिहार पंचायत राज अधिनियम 2006 के तहत ग्राम कचहरी की स्थापना का प्रावधान किया गया है। मगरांव ग्राम कचहरी का प्रयास बहुत सराहनीय है। इसी तरह से अन्य ग्राम कचहरी भी काम करें तो बड़ी अदालतों पर से मुकदमों का बोझ कम हो जाएगा।
– नंदगोपाल, वरीय लोक अभियोजक, बक्सर

Leave a Reply