बिहार के इस गांव में शादी करनी है तो दहेज की बात न करें, …जानिए

बिहार के गया जिले के आमस प्रखंड के सुकराडीह गांव में लड़की के लिए रिश्ता ढूंढने आए हैं तो दहेज की बात भूल कर भी न करें। यही इस गांव का स्लोगन है। यहां न दहेज लिया जाता है, न दिया जाता है और यह बात सबको पता है।

पीढिय़ां दे रहीं गवाही
गांव की बुजुर्ग महिला शांति देवी बताती हैं कि उनके छह बच्चे हैं। तीन बेटे और तीन बेटियां। सभी की शादी बगैर दहेज के हुई। उन्हें अच्छी तरह याद है, जब तीस साल पहले उनके पिता शादी की बात करने इस गांव में आए थे।

घर लौटकर सबको रिश्ता पक्का कर दिए जाने की बात बताई। घर-परिवार से ज्यादा खुशी उन्हें इस बात से थी कि बेटी की शादी उस गांव में कर रहे, जहां दहेज नहीं लिया जाता है। अब शांति देवी की बारी आई तो उन्होंने भी अपनी ससुराल की इस परंपरा का वैसे ही निर्वहन किया।

दहेज पर है पूर्ण पाबंदी
60 घरों का गांव है सुकराडीह। इस गांव के निवासी और झरी पंचायत के पूर्व मुखिया राजदेव सिंह भोक्ता बताते हैं कि यहां दहेज पर पूर्ण पाबंदी है। यह दस-पांच वर्षों से नहीं, पीढिय़ों से है। बाप-दादा ने जो परंपरा कायम की, वह चल रही है। उदय कुमार बताते हैं कि यहां दहेज का चलन नहीं होने के कारण शादी में कोई कठिनाई नहीं होती है। लड़का हो या लड़की, जो भी इस गांव से परिचित हैं, उन्हें पता है कि यहां रिश्ता करना है तो दहेज आदि को भूल जाना होगा।

दहेज मांगने वालों के यहां शादी नहीं
पार्वती देवी इसी गांव की हैं। वे कहती हैं, सात लइकन के शादी में पते नहीं चललो कि कइसे शादी हो गेलइ…। सात बच्चों की शादी की और उन्हें कुछ अहसास ही नहीं हुआ कि खर्च-पानी क्या होता है। गांव में यदि कोई कुटुंब लड़की देखने आता है तो सब लोग मिलकर उनका आदर-सत्कार करते हैं। इसमें कोई कमी नहीं होती, पर अगर उन्होंने दहेज की बात की तो साफ बता दिया जाता है कि हम न दहेज लेते हैं, न देते हैं।

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लड़की वालों की पसंद सुकराडीह
इस गांव के रंजीत कुमार बताते हैं कि दहेज पर पाबंदी की वजह से लड़की वाले यहां रिश्ता करना चाहते हैं। उनकी पहली पसंद यह गांव होता है, क्योंकि इस मायने में गांव ने एक उच्च आदर्श कायम किया हुआ है। गांव में बाल विवाह पर सख्ती से रोक है। शादी की उम्र होने के बाद ही रिश्ता तय किया जाता है।

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