भारत रत्न अटल ….जानें उनकी पूरी कहानी

अटल बिहारी वाजपेयी यूं तो भारतीय राजनीतिक के पटल पर एक ऐसा नाम है, जिन्होंने प्रधानमंत्री के पद पर हों या विदेश मंत्री के पद पर या विपक्ष के नेता के पद पर, उन्होंने हर भूमिका में अपनी छाप छोड़ी है। प्रखर और स्पष्ट वक्ता, मंजे हुए राजनीतिज्ञ, बेहतरीन लीडर, सभी को साथ लेकर चलने की उनमें अदभुत कला थी।


25 दिसंबर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म हुआ। अटल के पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी और मां कृष्णा देवी हैं। अटलजी छात्र जीवन से ही राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ से जुड़ गए। कानपुर में अपनी एलएलबी की पढ़ाई को बीच में ही छोड़कर अटल जी संघ के फूल टाइम प्रचारक बन गए। अटलजी पांचजन्य, राष्ट्रधर्म, दैनिक स्वदेश और वीर अर्जुन जैसे पत्र-पत्रिकाओं के सम्पादक रहे।

सन् 1955 में उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा, परन्तु सफलता नहीं मिली। अटलजी सन् 1957 के लोकसभा चुनावों में पहली बार उत्तरप्रदेश की बलरामपुर लोकसभा सीट से जनसंघ के प्रत्याशी के रूप में विजयी होकर लोकसभा में पहुंचे। अटलजी सन् 1968 से 1973 तक भारतीय जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। अटलजी 1957 से 1977 तक लगातार जनसंघ की ओर से संसदीय दल के नेता रहे।

1977 के लोकसभा चुनाव में इंदिरा गांधी की हार के बाद मोरार जी देसाई के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार बनी। इसमें अटलजी विदेश मंत्री बनें। अटलजी 1977 से 1979 तक देश के विदेश मंत्री रहे। 1980 में जनता पार्टी के टूट जाने के बाद अटलजी ने अपने सहयोगी नेताओं के साथ ‘भारतीय जनता पार्टी’ की स्थापना की। अटलजी इसके पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। 1996 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। अटलजी देश के प्रधानमंत्री बने, लेकिन यह सरकार 13 दिन में ही गिर गई।

1998 के आम चुनाव में बीजेपी फिर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी और अटलजी दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने। अटल जी की यह सरकार 13 महीने तक चली। तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के समर्थन वापस लेने से उनकी सरकार गिर गई। 1999 के आम चुनाव में बीजेपी को एक बार फिर सबसे ज्यादा सीटें मिली। इस बार अटल जी की सरकार पूरे 5 साल चली।

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2004 के आम चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए ने बीजेपी के एनडीए को हराकर सरकार बनाई। बीजेपी की इस हार के साथ ही अटल जी का राजनैतिक सफर खत्म हो गया। 2014 में उन्हें भारत के राष्ट्रपति ने भारत रत्न देने का ऐलान किया। 2015 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उनके निवास पर जाकर उन्हें इस सम्मान से नवाजा।

BJP को 2 सीटे से 200 पार पहुंचाया
अटलजी भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य थे और उन्होंने डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी और पं. दीनदयाल उपाध्याय जैसे राष्ट्रवादी नेताओं के साथ मिलकर जनसंघ का आगे बढ़ाया। कांग्रेस पार्टी के सामने जब कोई विपक्ष नहीं हुआ करता था ऐसे समय में पहले अटल जी ने जनसंघ को खड़ा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद जब जनसंघ टूटा तो अपने खास सहयोगी लालकृष्ण आडवाणी के साथ मिलकर उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की नींव रखी और आज उसे इस मुकाम पर पहुंचाया कि बीजेपी स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार में है।

बीजेपी को खड़ा करने का श्रेय अटल-आडवाणी को ही जाता है। इस जोड़ी ने हिंदुत्व के मुद्दे के साथ-साथ उन तमाम मुद्दों पर जनता का ध्यान आकर्षित किया जो कांग्रेस नहीं कर सकी। 1984 के आम चुनाव में जो बीजेपी महज 2 सीटें लाई थी उसे अटल जी ने अपने नेतृत्व में 1996 के आम चुनाव तक सबसे ज्यादा सीटें लाने वाली पार्टी में तब्दील कर दिया।

प्रखर वक्ता और जानें-मानें कवि
अटल बिहारी वाजपेयी को स्कूली समय से ही भाषण देने का शौक था और स्कूल में होने वाली वाद-विवाद, काव्यपाठ और भाषण जैसी प्रतियोगिताओं में वे हमेशा हिस्सा लेते थे। आरएसएस के प्रचारक के रूप में उनकी यह कला और निखरती गई और उनकी गिनती देश के प्रखर वक्ताओं में होने लगी। उनके भाषणों को दूर-दूर से लोग सुनने आते थे। यही नहीं विपक्ष भी उनकी भाषण शैली का कायल था। एक बार अटलजी के संसद में दिए ओजस्वी भाषण को सुनकर नेहरूजी ने उनको ‘भविष्य का प्रधानमंत्री’ तक बता दिया था और आगे चलकर नेहरूजी की यह भविष्यवाणी सच भी साबित हुई।

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अटलजी प्रखर वक्ता के साथ ही अपनी बेमिसाल कविताओं के लिए भी जाने जाते हैं। चुनावी रैली हो, संसद का मंच हो या कोई और सार्वजनिक मंच अटल जी ने अपनी कविताओं के माध्यम से हर बार जन समुह को अपनी ओर आकर्षित किया। ‘हार नहीं मानूँगा, रार नहीं ठानूँगा’ उनकी बहुचर्चित कविताओं में से एक है।

पोखरण परमाणु परीक्षण
11 मई, 1998 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने परमाणु परीक्षण किए जाने ऐलान किया। ठीक दो दिन बाद यानी 13 मई को भी पोखरण में दो और परमाणु परीक्षण किए गए। प्रधानमंत्री वाजपेयी ने जानकारी दी कि अब देश का परमाणु कार्यक्रम पूरा हो गया है। इन परमाणु परीक्षण ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया। अमेरिका और यूरोपीय संघ समेत कई देशों ने भारत पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए लेकिन उसके बाद भी भारत, अटलजी के नेतृत्व में हर तरह की चुनौतियों से सफलतापूर्वक निपटने में सफल रहा। अटलजी के साहसिक नेतृत्व की बदौलत आज भारत की गिनती परमाणु संपन्न राष्ट्रों में होती है।

पाक से सम्बंध सुधार की कोशिशें
अटल बिहारी वाजपेयी ने दूसरी बार प्रधानमंत्री रहते हुए पाकिस्तान से संबंधों में सुधार की पहल की। उन्होंने पाकिस्तान की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाते हुए उन्होंने 19 फरवरी 1999 को ‘सदा-ए-सरहद’ नाम से दिल्ली से लाहौर तक बस सेवा शुरू कराई। इस सेवा का उद्घाटन करते हुए अटलजी ने पाकिस्तान की यात्रा करके नवाज शरीफ से मुलाकात की और आपसी संबंधों में एक नई शुरुआत की।

कारगिल युद्ध में जीत
अपने 13 महीनों के दूसरे कार्यकाल के दौरान अटल सरकार को पाकिस्तान से बड़ी चुनौती मिली। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ की शह पर पाकिस्तानी सेना व पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादियों ने कारगिल क्षेत्र में घुसपैठ करके कई पहाड़ी चोटियों पर कब्जा कर लिया। भारतीय सेना ने पाकिस्तान द्वारा कब्जा की गई जगहों पर हमला किया और पाकिस्तान को सीमा पार वापस जाने को मजबूर किया। कारगिल युद्ध में जीत का श्रेय अटल जी के सिर बंधा और उन्हें 1999 के आम चुनाव में जनता ने एक बार फिर सत्ता सौंप दी।

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अटल सरकार की उपलब्धियां…

  • भारत देश के चारों कोनों को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना की शुरुआत की गई। इसके अंतर्गत दिल्ली, कलकत्ता, चेन्नई व मुम्बई को राजमार्ग से जोड़ा गया।
  • सौ साल से भी ज्यादा पुराने कावेरी जल विवाद को सुलझाया गया।
  • इंफ्रास्ट्रक्चर ढांचे के लिए, इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी को प्रमोट करने के लिए, इलेक्ट्रिसिटी पैदा करने के लिए अलग-अलग आयोग बनाए गए। इन आयोगों ने इन क्षेत्रों के विकास में बड़ा सहयोग किया।
  • अटल सरकार में ही राष्ट्रीय सुरक्षा समिति, आर्थिक सलाह समिति, व्यापार एवं उद्योग समिति भी गठित की गई।
  • गरीबी खत्म करने के लिये सात सूत्रीय गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम शुरू किया गया।
  • आवास निर्माण को प्रोत्साहन देने के लिए अर्बन सीलिंग एक्ट समाप्त किया।
  • नई टेलीकॉम नीति लाई गई। राष्ट्रीय राजमार्गों एवं हवाई अड्डों का विकास किया गया
  • रेलवे में बुनियादी संरचनात्मक ढाँचे को मजबूत करने वाले कदम उठाये गए।

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