कबाड़ से जुगाड़: BIT के छात्रों ने बना दी ड्रम की कुर्सी व टायर की टेबल, …जानिए

क्रियेटिविटी हो तो बेकार के कबाड़ से भी कमाल के समान बनाए जा सकते हैं। ऐसा ही दिखता है बिहार की राजधानी पटना के बीआइटी कैम्पस में। कबाड़ पर की गई कलाकारी ने लोगों का दिल जीत लिया।

तकनीक की दुनिया में जीने वाले इंजीनियरिंग के छात्र आसपास बिखरे कचरे को लेकर भी संजीदा है। या यूं कहें अपनी समझ से कचरे में भी जिंदगी डालना जानते हैं। वे घर के कोने में पड़े कबाड़ को जुगाड़ शानदार बना रहे हैं।

बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीआइटी) के आर्किटेक्ट विभाग के छात्रों ने ‘बिल्डिंग आउट ऑफ वेस्ट’ के कॉन्सेप्ट पर दो दिवसीय प्रदर्शनी का आयोजन किया। इसके तहत कबाड़ को खूबसूरत आकार देकर उसे उपयोगी सामान में तब्दील किया गया।

महज दो घंटे में कर दिया कमाल
बीआइटी परिसर में आयोजित प्रतियोगिता में बीआइटी, एनआइटी व निफ्ट के छात्रों ने भाग लिया। जहां उन्हें कैंपस में इधर-उधर पड़े कचरे व कबाड़ की चीजों को जमा कर दिया गया। ड्रम, टूटी कुर्सी, टायर, आइसक्रीम स्टिक, कार्टन और न जाने क्या-क्या। इन सब कबाड़ की चीजों से छात्रों को उपयोगी मॉडल तैयार करना था, वो भी महज दो घंटे के भीतर। छात्रों ने अपनी-अपनी समझ के अनुसार कचरे के सामान को जमा करके उसे खूबसूरत रूप दे दिया।

आइसक्रीम स्टिक से साइकिल का मॉडल
छात्रों ने कबाड़ से अजब-गजब प्रयोग किए। बीआइटी के छात्रों ने मिलकर जंग लगे ड्रम को आकार देकर शानदार कुर्सी का रूप दे दिया। ड्रम को काटकर पीछे सपोर्ट लगाया और बैठने के लिए कुर्सी बना दी। पेंट होने के बाद यह लग ही नहीं रहा था कि कभी यह कबाड़ था।

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नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआइटी) के छात्र आशीष, विनय, सुशील व राहुल ने ये प्रयोग किया। इन सभी ने मिलकर सड़क पर बिखरे आइसक्रीम स्टिक को मिलाकर शानदार साइकिल का मॉडल बना दिया जो घर के सजाने में काम आ सकता है।

गजब का वॉल हैंगिंग वार्डरोब
इंजीनियरिंग के छात्रों ने भी कबाड़ से कई मजेदार प्रयोग किए। छोटी-छोटी लकडिय़ों को जमा करके उसे करीने से वार्डरोब का शेप दिया गया। वार्डरोब के पीछे क्लिप लगा इसका इस्तेमाल हैंगिंग वार्डरोब के रूप में भी किया जा सकता है। वार्डरोब को और भी आकर्षक बनाने के लिए उस पर पेंट के छींटे मारे गए थे।

छात्रों ने बताया कि कम समय डिजाइनर वार्डरॉब तैयार करना था इसलिए पेंट करने के बजाय तीन-चार रंगों का कोलाज बनाकर लकड़ी पर छींटे मार दिए। खास बात यह कि इस वार्डरोब के सभी बॉक्स एक शेप के हैं, जिससे इसकी इसकी खूबसूरती देखते बनती है।

पुराने टायर से गार्डन फर्नीचर
पुराने टायर और लकड़ी के टुकड़ों को मिलाकर गार्डन फर्नीचर का निर्माण किया गया। टायर को सपोर्ट देकर टेबल का शेप भी दिया गया है। वहीं पुरानी लकडिय़ों के छोटे-छोटे टुकड़े से कुर्सी बनाई गई है। गार्डन में इस कुर्सी पर बैठकर टायर के बने टेबल पर चाय की चुस्की ली जा सकती है। टायर को चमकीले रंग में रंगकर व नेट से बांधकर उसे स्टूल का रूप दिया गया है।

वहीं इस प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहीं एनआइटी की छात्रा श्रेया व प्रीति ने छोटे-छोटे बोतल के नीचे के भाग के साथ अंडे के कार्टन से इको फ्रेंडली कूलर बना दिया है, जो वजन में भी काफी हल्का है।

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खूब है मड वॉल
शहर में तो दूर अब गांव में भी मड वॉल (मिट्टी की दीवार) कम ही दिखती हैं, लेकिन बीआइटी के छात्रों ने कबाड़ में अपना हुनर दिखाने के लिए इंट्री गेट पर मड वॉल बनाई। ये हर आने-जाने वाले का ध्यान खींच रही है। शराब और पानी की खाली बोतलों को मड वॉल के बीच-बीच में सजाकर उसे खूबसूरत डिजाइन दिया गया है।

वॉल के सेंटर में बेकार पड़े टायर लगाए गए हैं, जिससे मड वॉल और भी खूबसूरत दिखता है। बीआइटी आर्किटेक्ट की छात्रा अक्षिता के अनुसार मिट्टी से बने होने के कारण यह आसपास का तापमान भी चार से पांच डिग्री कम रखता है।

छात्रों के बोल
इस प्रदर्शनी का मकसद आम लोगों के बीच जागरूकता लाना है। वे पुरानी चीजों को भी सजाकर नया कर सकते हैं। घर में बिखरा हुआ कबाड़ बदसूरत लगता है, लेकिन हमें उसे कोई शेप दें तो घर की खूबसूरती बढ़ जाती है।
– अक्षिता

हमारा उद्देश्य कबाड़ को लोकप्रिय बनाया है। कबाड़ से बना उपयोगी सामान बिल्कुल इको फ्रेंडली और सस्ता होता है। उम्मीद है लोग धीरे-धीरे कबाड़ की चीजों को भी नई जिंदगी देंगे।
– जेनी सिंह

बेहद कम समय में छात्रों ने कबाड़ से अलग-अलग प्रकार की खूबसूरत चीजें बना दी हैं। इससे पता चलता है कि इंजीनियरिंग के छात्र सिर्फ तकनीक की दुनिया में ही नहीं जीते बल्कि पर्यावरण के लिए भी उपयोगी हैं।
– साकिब

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