बिहार के शौकत मौज-मस्ती के पैसों से संवार रहे कई लाइफ

रोजी-रोटी के लिए अपना वतन छोड़कर सउदी अरब में काम करने वाले शौकत अली आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मेधावी छात्र, असाध्य बीमारी से लड़ रहे मरीज आदि लोगों को आर्थिक मदद पहुंचाते हैं। उन्हें हरसंभव सहायता करने की कोशिश करते हैं। इसमें होने वाले आर्थिक खर्च की उन्हें फिक्र नहीं है, क्योंकि इसे वह अल्लाह के खिदमत में किया काम मानते हैं। नेक काम ने समाज में शौकत की अलग पहचान बना दी है।

ऐसे आया हेल्प का ख्याल
गया जिले के आमस के प्रखंड के बैदा गांव के रहनेवाले शौकत अली एमबीए करके सउदी अरब के राजधानी रियाद में जॉब करते हैं। फिलहाल एक महीना से वह गांव आए हुए हैं। उन्होंने बताया कि हमारी परवरिश जिस पृष्ठभूमि में हुई हैं, उसमें बहुत ही लाचार लोगों को देखा है। दस बीस रुपए की लिए जद्दोजहद करते देखा है। पैसे के अभाव में मेधावी छात्र को बर्बाद होते देखा है। कई लोगों को दवा के अभाव में दम तोड़ते हुए देखा है। उन्होंने कहा कि उनलोगों के कुछ करना चाहता था लेकिन कर नहीं पाया। इसके बाद जॉब मिला और फरवरी 2014 में सउदी अरब चला गया।

बनाया “केयर इंडियन”
उन्होंने कहा कि अपने मित्रों के साथ गरीबों और लाचार लोगों के बारे में चर्चा होती रहती थी। तब हमलोग दस मित्रों ने मिलकर केयर इंडियन संगठन बनाया। इसके बैनर तले आमस के कुड़ासीन में कैंसर से जूझ रहे अंकेश को आर्थिक मदद की। रांची में कैंसर से जूझ रही एक महिला को मदद पहुंचाया गया। इस साल संगठन ने दस गरीब बच्चों को गोद लिया है। आर्थिक रूप से कमजोर युवतियों का विवाह कराने का संगठन ने निर्णय लिया है।

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मासिक पार्टी छोड़कर बचाते हैं पैसे
आखिर इतना पैसा कहां से आता है, इस सवाल पर शौकत ने कहा कि हमलोग दस दोस्त पहले मासिक पार्टी करते थे, जिसमें लाखों रुपए खर्च होता था। उन्होंने कहा सउदी अरब में एक व्यक्ति पर दस हजार रुपए ज्यादा महत्व नहीं रखता है। पार्टी से बचे हुए पैसे से लोगों को मदद की जाती है। उन्होंने कहा कि इससे क्या नुकसान होता है। इसकी चिंता उन्हें नहीं है क्योंकि इस काम से दिल को जो सुकून मिलता है उसके फायदे का कोई मोल नहीं है।

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