बिहार के बगहा में इस वरिष्ठ IPS अधिकारी के नाम पर बना यह चौराहा, …जानिए

अपने कर्तव्य के प्रति सजग और देश के ऐतिहासिक और पौराणिक विरासत पर गहन शोध करने वाले वरिष्ठ आइपीएस अधिकारी और भागलपुर रेंज के डीआइजी विकास वैभव का भागलपुर रेंज में अपराध के ग्राफ को शून्य करने की कवायद ने काफी असर दिखाया है। उनके चल रहे अनवरत प्रयास का असर भागलपुर में दिखने लगा है।

वहीं, दूसरी ओर दिनों-दिन उनके सरोकारी व्यक्तित्व की चर्चा और उसे लेकर आम लोगों का उनके प्रति आकर्षण के बढ़ने का सिलसिला भी जारी है। इसी क्रम में बिहार के बगहा जिले में कर्तव्य के प्रति समर्पित इस वरिष्ठ आइपीएस अधिकारी के नाम से लोग एक सितंबर को एक चौराहे का नामकरण करने जा रहे है।

विकास वैभव के नाम पर चौराहे का नामकरण करने की चर्चा चहुंओर हो रही है। लोगों का कहना है कि इससे पहले राजनेताओं और अंग्रेज अधिकारियों के नाम पर ही चौराहे का नामकरण देखा जाता था, लेकिन अब लोगों ने ऐसे अधिकारियों की ईमानदारी को इस तरह से सम्मानित करने का बीड़ा उठाया है।

विकास वैभव के नाम से चौराहे के नामकरण की कहानी भी काफी रोचक है। बात 2003 की है, जब बगहा के रहने वाले एक युवक ने 2003 में पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए पौधारोपण का काम शुरू किया। गांव के साथ समाज के लोगों की तमाम आलोचनाओं को झेलते हुए, वह दिन रात पौधारोपण कर पर्यावरण के स्वच्छता की अनूठी कहानी लिखने लगा।

इस बीच बगहा में एक आइपीएस अधिकारी का आगमन हुआ, जिनका नाम था विकास वैभव। विकास वैभव ने बगहा को कम ही दिनों में अपराध मुक्त तो बनाया ही, उन्होंने मिनी चंबल के कई खूंखार अपराधियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ा, जो बच गये उन्हें गिरफ्तार किया। इस बात ने बगहा के युवक गजेंद्र यादव ने काफी प्रभावित किया और गजेंद्र विकास वैभव से मिलने पहुंच गये।

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गजेंद्र यादव ने पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को वरिष्ठ आइपीएस अधिकारी विकास वैभव के सामने रखी। उन्होंने मदद का भरोसा दिया और गजेंद्र के साथ मिलकर खुद भी पर्यावरण को संरक्षित करने के काम में जुट गये। 2007 से अपने बगहा के कार्यकाल में विकास वैभव ने सैकड़ों पौधों को जीवन दिया और गजेंद्र को प्रोत्साहित करने लगे। इस बीच इलाके में एक ऐसा चौराहा था, जो बदमाशों का अड्डा था और डर के मारे उधर से कोई गुजरना नहीं चाहता था।

विकास वैभव ने 2008 में वहां एक आम का पेड़ लगाया और वह चौराहा धीरे-धीरे जवान हो चुके आम के पेड़ के साथ लोगों में प्रसिद्ध होता गया। गजेंद्र बताते हैं कि अब लगभग तीन सालों से उस पेड़ पर रसीले आम फलते हैं। गजेंद्र इस परिवर्तन का श्रेय विकास वैभव को देते हैं और उनके सम्मान में चौराहे का नामकरण करना चाहते हैं। अब उस चौराहे का नामकरण विकास वैभव चौराहे के नाम से किया जा रहा है।

अब तक सात लाख पौधों को जीवन दे चुके गजेंद्र पूरी उत्साह के साथ चौराहे के नामकरण की तैयारी में लगे हैं। गजेंद्र ने गांव के साथ उन हजारों लोगों को यह दिखा दिया है कि निःस्वार्थ भाव से की गयी सेवा कभी व्यर्थ नहीं जाती। गजेंद्र के प्रयास से बगहा में पर्यावरण की स्थिति काफी बेहतर हुई है, इलाके में हरित अच्छादन का प्रतिशत बढ़ा है। इसे कहते हैं एक अधिकारी का समाज और राज्य के साथ राष्ट्र के प्रति उम्दा कार्य संस्कृति को अंजाम देकर सरोकारी कार्यों को बढ़ावा देना।

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