गूगल डूडल बना कर मना रहा बिहारी कवि अब्दुल कावि देसनवी का जन्मदिन

गूगल किसी व्यक्ति विशेष को अपना डूडल तभी बनाता है। जब वाकई उस शख्श में वो काबिलियत हो जिसका गुण दुनिया गाती हो। इस बार गूगल ने बिहार के एक मशहूर उर्दू कवि और लेखक को अपना डूडल बनाया है। उनका नाम है प्रोफेसर अब्दुल कावि देसनवी।

देसनवी की कई कृतियां प्रसिद्ध हैं, लेकिन मुहम्मद इकबाल, मिर्जा गालिब और अब्दुल कलाम आजाद पर लिखी बिबिलोग्राफी ने उन्हें एक अलग मुकाम पर पहुंचाया।

उर्दू, अरबी और फारसी के जानकार देसनवी ने कई बेहतरीन उर्दू कवियों और लेखकों का मार्गदर्शन किया। इनमें जावेद अख्तर और इकबाल मसूद जैसे कई नाम भी शामिल हैं। 50 वर्षों के कॅरियर में उन्होंने हजारों कविताओं के साथ कई किताबें भी लिखीं।

सेवानिवृत्ति होने के बाद वह मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी, ऑल इंडिया अंजुमन तरक्की उर्दू बोर्ड और बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी में प्रमुख पदों पर रहे। वह ऑल इंडिया रेडियो पर प्रोग्रामिंग सलाहकार समिति के सदस्य भी रहे हैं। देसनवी का 81 वर्ष की उम्र में सात जुलाई, 2011 को भोपाल में निधन हो गया।

देसनवी की जीवनी
अब्दुल कावि देसनवी का जन्म बिहार के नालंदा जिले के देसना गांव निवासी उर्दू, अरबी और फारसी भाषाओं के प्रोफेसर सैयद मोहम्मद सईद रजा के घर वर्ष एक नवंबर, 1930 को हुआ था। कहा जाता है कि जाने-माने मुस्लिम इतिहासकार व विद्वान सुलेमान नदवी उनके पूर्वज थे।

देसनवी की प्रारंभिक शिक्षा बिहार के अरह कस्बे में ही हुई थी। उसके बाद उन्होंने मुंबई के सेंट जेवियर कॉलेज से स्नातक और स्नातकोत्तर किया। मुंबई के सेंट जेवियर कॉलेज में ही उनके पिता उर्दू , अरबी और पारसी भाषाओं के प्रोफेसर थे।

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शिक्षा प्राप्त करने के बाद वर्ष 1961 में उन्होंने सैफिया पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में उर्दू विभाग में नौकरी करने लगे। यहां वह प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष भी बने। उन्होंने यहां अतिरिक्त प्राचार्य का पद भी दो वर्षों तक संभाला। वर्ष 1990 में वह सेवानिवृत्त हो गये।

सेवानिवृत्ति के बाद मध्य प्रदेश सरकार नेउन्हें राज्य उर्दू अकादमी का अध्यक्ष मनोनीत किया। वह अन्य कई संस्थाओं से भी जुड़े रहे। वह ऑल इंडिया अंजुमन तरक्की उर्दू बोर्ड के सदस्य बने। इसके बाद भोपाल ऑल इंडिया रेडियो में प्रोग्राम एडवाइजरी कमिटी से जुड़ गये। वह मजलिस ए आम अंजुमन तरक्की उूर्द (हिंद) नयी दिल्ली के चयनित सदस्य बने।

वर्ष 1980 में वह भोपाल स्थित बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी के एक्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य बनाये गये। बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी में ही वह उर्दू, अरबी और पारसी के चेयरमैन रहने के अलावा डीन का पद भी उन्होंने संभाला। जब वह बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी में पढ़ाते थे, उसी समय उनके छात्रों में बॉलीवुड के जाने-माने गीतकार व लेखक जावेद अख्तर भी शामिल थे।

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