बिहार के इस शहर का नाला उगलता है सोना-चांदी

बिहार के बेगूसराय शहर का नाला उगलता है सोना। जी हां, यह 16 आने सच है। इससे कई परिवारों की जीविका चल रही है। नाला से सोना-चांदी चुनते हैं सोनझरी समुदाय के लोग।

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ व महाराष्ट्र से ये लोग हर साल ठंड में नाला से सोना निकालने के लिए यहां आते हैं। सोनझरी नामक आदिवासी समुदाय के लोग इस रोजगार में लगे हैं। सुबह की शीतलहर में जहां लोग अपने हाथों को जेब से नहीं निकालते हैं। वहीं कुछ महिला-पुरुष नाले से कचरा निकालकर उसकी सफाई करने में जुटे रहते हैं। ये लोग नालों के कचरा से सोना-चांदी निकालते हैं।

इस धंधे में जुटे बालाघाट जिले (एमपी) के सुरेश मराबी, गंगा मराबी, शैलेन्द्र मराबी, धनवती मराबी ने बताया कि यह उनका पुश्तैनी धंधा है। अपने परिवार के साथ शहर के बाहर तंबू लगाकर रहते हैं। शहर में जहां सोने-चांदी की दुकानें रहती हैं उस क्षेत्र के नाला से कचरा निकालते हैं।

ऐसे निकाला जाता है कचरा से सोना-चांदी
कचरा को बड़ी बारीकी उसे लोहे के बर्तन में धोते हैं। फिर उससे रेत अलग करते हैं। रेत में पारा के मदद से सोना-चांदी के कण अलग किये जाते हैं। अंत में सोना-चांदी के कण को गलाकर बेचा जाता है। पांच-छह की टोली रोजाना डेढ़ से दो हजार का निकालते हैं सोना-चांदी

शैलेन्द्र ने बताया कि सालोंभर वे लोग शहर-शहर घूमकर यह काम करते हैं। एक दिन में लगभग डेढ़ से दो हजार का सोना-चांदी निकाल लेते हैं। इस काम में पांच से छह लोग शामिल होते हैं।

स्वर्ण कारीगर अविनाश कुमार, प्रकाशचंद्र सोनी व अन्य कहते हैं कि सोनझरी जाति के लोग वर्षों से शहर में आकर नाला के कचरा से सोना-चांदी निकालते हैं।⁠⁠⁠⁠

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