दुनिया में बज रहा मिथिला पेंटिंग का डंका: पीएम मोदी भी दे रहे बढ़ावा, …जानिए

मिथिला की पहचान यहां की मेधा है। मिथिला की मधुरता है। मिथिला की संस्कृति और पेंटिंग है। आज पूरी दुनिया में इसका डंका बज रहा है। मसलन देश ही नहीं, दुनिया के विकसित राष्ट्र मिथिला पेंटिंग की विशिष्टता पर मोहित हैं। खुद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीते गुरूवार को जब चीन दौरे पर जा रहे थे तो उन्‍होंने जो शॉल अपने कंधे पर रखा हुआ था, मिथिला पेंटिंग उसकी खूबसूरती में चार चांद लगा रहा था। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मिथिला पेटिंग से इतना जुड़ाव यह बताने को काफी है कि यह पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हो रही है।

मिथिला पेंटिंग से बदल गई मधुबनी स्‍टेशन की रंगत
बिहार के मधुबनी रेलवे स्टेशन को देखकर यात्रियों को अब अच्छा लगता है। पहले यहां चारो ओर गंदगी फैली रहती थी, अब मिथिला पेंटिंग के बाद लोग इसकी सुंदरता को निहारते हैं। यहां की दीवारों और फुटओवर ब्रिज पर परंपरागत पेंटिंग बनाई बनाई गई है, जो यात्रियों के आकर्षण का खास कारण बन गई है।

भारतीय रेलवे द्वारा ‘रेल स्वच्छ मिशन’ के तहत इस स्टेशन में सफाई अभियान चलाया गया था, जिसमें कलाकारों ने वेतन की मांग न करते हुए 14 हजार वर्ग फीट की दीवार को ट्रेडिशनल मिथिला स्टाइल में पेंट किया है। इसे करीब 225 कलाकारों ने मिलकर तैयार किया है, जिनमें ज्यादातर महिलाएं शामिल थीं। इन कलाकारों ने दो महीने तक बिना वेतन के इस पेंटिंग पर काम किया।

पेटिंग में नए पारंपरिक त्योहार, पर्यावरण, परिवार, महिला और खेत खलिहान, भगवान राम और गणेश के बेहद कलात्मक चित्र बनाए गए हैं। इसी तरह ‘मेरा स्टेशन मेरी शान’ प्रोजेक्ट के तहत आगरा के राजा मंडी रेलवे स्टेशन की दीवारों पर मॉडर्न आर्ट उकेरी गई है। यहां ट्रेन का इंतजार कर रहे यात्रियों का समय पेंटिंग निहारते हुए अच्छा बीतता है।

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मिथिला पेंटिंग से सजाया जा रहा पटना जंक्‍शन
दरभंगा-मधुबनी स्टेशन को मिथिला पेंटिंग से सजाए जाने के बाद पटना रेलवे स्टेशन को भी मिथिला पेंटिंग से सजाया जा रहा है। इसको लेकर कलाकारों का जत्था दिन रात काम कर रहा है। कहा जा रहा है कि पटना के बाद अन्य रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट को भी मिथिला पेंटिंग से सजाने का निर्णय लिया गया है। पटना स्टेशन की दीवारों को खूबसूरत बनाने के लिए मिथिला पेंटिंग के कलाकारों को पटना बुलाया गया है। यहां पर सभी महिला कलाकारों ने मिथिला पेंटिंग के जरिए पटना जंक्शन की दीवारों पर पेंटिंग का काम शुरू कर दिया है।

इसमें खासतौर से बिहार के लोकपर्व छठ का दृश्य, पीपल के पेड़ के नीचे ज्ञान प्राप्ति के लिए तपस्या में लीन गौतम बुद्ध, भगवान महावीर के जन्मस्थान, राजगीर की वादियाें समेत बिहार की विरासत को दर्शाती कई पेंटिंग बनाई जा रही हैं।

मिथिला पेंटिंग के लिए मिल चुका है पद्म पुरस्‍कार
मधुबनी जिला मुख्यालय से दस किलोमीटर दूर रहिका प्रखंड के नाजिरपुर पंचायत का एक गांव है जितवारपुर । करीब 670 परिवारों को अपने दामन में समेटे इस गांव का इतिहास गौरवशाली है। उसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इस गांव की तीन शिल्पियों को पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है।

साठ वर्षों से मिथिला पेंटिंग से जुड़ी बौआ देवी को 2017 में पद्म पुरस्‍कार मिला। बौआ देवी को 1985-86 में नेशनल अवॉर्ड मिल चुका है। वह मिथिला म्यूजियम जापान 11 बार जा चुकी है। जापान के म्यूजियम में मिथिला पेंटिंग की जीवंत कलाकृतियां उकेरी गईं हैं। इससे पहले जगदम्बा देवी और सीता देवी को यह सम्मान मिल चुका है। पूरा जितवारपुर गांव ही मिथिला पेंटिंग और गोदना पेंटिंग विधा में माहिर है। लगभग छह सौ से अधिक लोग इस कला से जुड़कर देश-विदेशों में अपना नाम रोशन कर चुके हैं।

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मिथिला पेंटिंग को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण केंद्र स्‍थापित कर रहे सीएम नीतीश
कहते हैं कि यदि किसी विद्या को संस्थागत रूप और एक खास प्रमाण-पत्र से विहित रूप से नहीं जोड़ेंगे तो यह सिमट जायेगी। मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने मिथिला चित्र कला संस्थान की स्थापना और सुचारू संचालन का निर्णय लिया। वह अब कार्यरूप में परिणत होने लगा है।

सौराठ में रहिका संस्कृत उच्च विद्यालय के समीप साढ़े छह एकड़ भूमि चिह्नित कर, भू अर्जन की प्रक्रिया शुरू हो गयी है। तब तक दूसरे भवन में इसका संचालन होगा। यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। इस सत्र से मिथिला चित्र कला संस्थान का सुचारू तरीके-से संचालन भी होने लगेगा।

मिथिला पेंटिंग में सुनहरा भविष्य
मिथिला पेंटिंग के माध्यम से सुनहरा भविष्य तय किया जा सकता है। इसमें अपार संभावना मौजूद है। देश-विदेश में मिथिला पेंटिंग की मांग दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। आज देश में बेरोजगारी एक गंभीर समस्या है। मिथिला पेंटिंग इसको दूर करने में मददगार साबित हो सकती है। इसके लिए जरूरी है कि आप पूरे लगन से इसे सीखें।

मिथिला पेंटिंग को बढ़ावा दे रहे संजय कुमार झा
सौराठ में मिथिला पेंटिंग प्रशिक्षण केंद्र की स्‍थापना में अहम भूमिका निभाने वाले जदयू के राष्‍ट्रीय महासचिव संजय कुमार झा कहते हैं कि हमारी मेधा, संसाधन, सांस्कृतिक धरोहर, विशिष्टता और पहचान आदि ही हमारा संबल है। सिर्फ इस बूते ही मिथिला आगे हो सकता है। इसके संरक्षण, संवर्द्धन के लिए सरकार सजग रहे। नियमित अंतराल पर उसका ध्यान आकृष्ट कराया जाय। एक सजग स्थानीय नेतृत्व की आवश्यकता है जो अपनी क्षेत्रीय विशिष्टताओं, आवश्यकताओं को दिल से महसूस कर सके। दिमाग से उसकी रूपरेखा बना, दिल्ली-पटना में सक्षम तरीके से रख सके। सिर्फ इतनी सजगता से मिथिला की अपनी अलग पहचान बनी रह सकती है।

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