कभी गली-मोहल्लों का कूड़ा उठाती थीं ये महिला, आज होटल की हैं मालकिन

मुजफ्फरपुर के घर-घर चौका-बर्तन से लेकर कूड़ा उठाने तक का काम करनेवाली उर्मिला आज होटल की मालकिन हैं। उर्मिला का यह प्रेरणादायी सफर ऐसे तय नहीं हुआ। इसके लिए उसने कई मुसीबत झेले। रुपये की कमी के कारण अपने छह साल के बेटे को खाे दी। लेकिन, उस घटना ने मुशहरी के बेला छपरा निवासी उर्मिला को ऐसे झकझोरा कि उसने आर्थिक कठिनाई को दूर करने की ठान ली।

2012 में घर-घर चौका-बर्तन करने के बाद अपने मासूम बच्चे को छोड़ कर वह नगर निगम की सफाई एजेंसी निदान में सफाई कर्मचारी के रूप में कूड़े का उठाव करती थी। कुछ इसी दिनचर्या की वजह से व जानकारी के अभाव में उसने अपने छह साल के बच्चे को खो दिया। इसी बीच स्पर की संवर्द्धन परियोजना के तहत समूह से जुड़ी। इस क्षेत्र में लगातार बेहतर कार्य के बाद, नगर निगम प्रशासन की ओर से शहर के मालगोदाम चौक पर रैन बसेरा संचालन की जवाबदेही उर्मिला के हाथों में दी गई। यहां 10 माह से उर्मिला खुद के होटल का संचालन करती हैं। एक तय शुल्क पर शाकाहारी व मांसाहारी दोनों तरह का भोजन लोगों को कराती है।

बनाए 30 समूह
उर्मिला ने 3 वर्षों में 30 स्वयं सहायता समूह व 5 संवर्धन सामूहिक विकास समिति का गठन कर उन्हें बैंक से भी जोड़ा। पांच स्लम के 350 परिवारों के साथ अन्य कार्य भी किए हैं। बड़ी संख्या में समूह का निर्माण होने पर क्षेत्रीय स्तर पर महासंघ का गठन हुआ।

नगर विकास के प्रधान सचिव ने किया था सम्मानित
अपने लगन व बेहतर कार्य को लेकर पूरे समूह में उर्मिला का चयन हुआ। उसके बाद मार्च 2016 में नगर विकास एवं आवास विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव अमृतलाल मीणा ने विभाग की ओर से उर्मिला काे सम्मानित किया। स्पर की एसडीसी सांत्वना भारती ने बताया कि उर्मिला एक बार आगे बढ़ी तो पीछे मुड़ कर नहीं देखती हैं।

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दोबारा मां नहीं बनने पर समाज का ताना भी सहना पड़ा
अपने छह साल के बच्चे को खो देने के बाद उर्मिला दोबारा मां नहीं बन सकीं। इसके लिए भी उन्हें समाज से ताना भी सुनना पड़ा। उर्मिला ने बताया कि ताने सुनकर काफी दिनों तक मानसिक रूप से परेशानी झेलनी पड़ी।

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