बिहार का एक गांव ऐसा जहां के हर यूथ में है सैनिक बनने का जुनून

बिहार के रोहतास जिले के कहुआरा गांव के लोगों में सेना में जाकर देशसेवा करने का जुनून रहता है। सुबह की बेला में गांव के कच्ची सड़क पर दर्जनों युवकों को दौड़ लगाते दिखने से ही पता चल जाता है। यहां सेना के लिए जूनून इस कदर हावी है कि ठंड, बरसात व गर्मी के कोई मायने नहीं रखते। यहां के युवाओं को सेना में जाने के लायक ट्रेनिंग देते हैं गांव के रिटायर्ड सेना के अधिकारी व सैनिक।

करीब 1400 आबादी और 800 वोटर वाले इस गांव में 145 से भी अधिक लोग आर्मी और बॉडर सिक्यूरिटी फोर्स में तैनात हैं। हर वर्ष कम से कम इस गांव सात-आठ जवान सेना में ज्वाइन करते हैं। वैसे तो गांव के युवा अन्य भी नौकरी में कार्यरत हैं, पर अधिकतर सेना में जाना चाहते हैं। इसके पीछे उनका तर्क होता है देशसेवा।

छुट्‌टी में आते हैं सैनिक तो देते हैं युवाओं को ट्रेनिंग
सेना के कार्यरत गांव के सेना के अधिकारी या सैनिक जब भी छुट्टी में घर अाते हैं, युवकों को सैनिक बनने की ट्रेनिंग देते हैं। इसके लिए हर सुबह युवक सूर्योदय से पहले उठते हैं। दौड़ और कसरत के माध्यम से सेना में जाने लायक खुद को बनाते हैं। यही कारण है कि गांव के युवक चयन के वक्त आसानी से सेना में भर्ती की अहर्ता प्राप्त कर लेते हैं।

शहीद अरविंद हैं प्रेरणास्रोत
तीन चार साल पहले गांव के सैनिक अरविंद शहीद हो गए थे। सरकार ने गांव में शहीद अरविंद की प्रतिमा का अनावरण कराया है। ग्रामीण मदन सिंह कहते हैं गांव के युवाओं के शहीद अरविंद प्रेरणास्रोत भी हैं।

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क्या कहते हैं पूर्व सैनिक
रिटायर्ड कर्नल कुलवंत सिंह कहते है कि सेना के लिए काम करना गांव के युवक शान समझते हैं। युवकों को हमारे जैसे रिटायर्ड जवान युवकों को ट्रेंड किया करते हैं। गांव के अधिकतर युवा सेना में कार्यरत हैं। गांव के मदनलाल यादव कहते हैं कि गांव के युवकों में देशसेवा का जज्बा रहता है।

गांव तीन ओर से नदी से घिरा, पर विकास अधूरा
बिक्रमगंज अनुमंडल का कहुआरा गांव विकास के मामले में पिछड़ा है। गांव तीन तरफ से काव नदी से घिरा है। परंतु नदी को सर्वांगीण विकास का जरिया नहीं बनाया जा सका है। यह गांव बिक्रमगंज मुख्यालय से महज 5 किलोमीटर की दूरी पर है। लेकिन, इस गांव में सड़क मार्ग से जाने के लिए 25 किलोमीटर सफर तय करना पड़ता है।

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