बिहार में यहाँ प्लेटफार्म पर लगती है वर्दी वाले की पाठशाला, …जानिए

बिहार के पाटलिपुत्र स्टेशन के रेल थानाध्यक्ष दिलीप कुमार झा सुरक्षित सफर की गारंटी के साथ-साथ गरीब बच्चों को अक्षर का ज्ञान करा जिन्दगी की गाड़ी चलाने की सीख दे रहे हैं। पाटलिपुत्र स्टेशन के आसपास के झोपड़पट्टी में रहने वाले डेढ़ सौ से अधिक बच्चे पिछले ढाई वर्षों से स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर ही शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इस दौरान अपने गरीब शिष्यों को वे अल्पाहार के साथ-साथ शिक्षण सामग्री भी मुफ्त मुहैया कराते हैं। उनसे प्रेरित रेलवे के कई बड़े अधिकारी भी इन गरीब बच्चों के साथ अपना और परिजनों का जन्मदिन मनाने पहुंचने लगे हैं।

थानाध्यक्ष दिलीप कुमार झा बताते हैं उन्होंने पहले 25 बच्चों से प्लेटफॉर्म पर संस्कारशाला की शुरुआत की थी। वे स्वयं बच्चों को हिन्दी व अंग्रेजी की वर्णमाला के साथ जोड़-घटाव व टेबल पढ़ाने लगे। बच्चे रोज पढ़ने आएं, इसके लिए उन्होंने प्रतिदिन आने वाले बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ टॉफी देने की शुरुआत की। बाद में बच्चों को मुफ्त स्लेट-पेंसिल भी देना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे बच्चे बढ़ते गए और इनकी संख्या अब 200 तक पहुंच गई है।

प्लेटफॉर्म संख्या एक पर छह दिन होती है पढ़ाई
प्लेटफॉर्म संख्या एक पर चल रही इस संस्कारशाला के बच्चे सप्ताह में छह दिन पढ़ने आते हैं। पहले एक शिफ्ट में पढ़ाई होती थी परंतु भीड़ बढऩे पर इसे दो शिफ्ट में कर दिया गया है। अब सुबह और शाम क्लास लगती है।

बच्चों को बोतल चुनते देख मिली प्रेरणा
गरीब बच्चों को पढ़ाने की प्रेरणा के संबंध में वे कहते हैं कि जब उनका पदस्थापन यहां किया गया तो प्लेटफॉर्म पर गरीब बच्चों को बोतल चुनते देखा। उसी वक्त ख्याल आया कि ये बच्चे किसी दिन चलती ट्रेन की चपेट में आकर अपनी जान गंवा देंगे। उन्होंने उसी वक्त इन बच्चों को पढ़ाने का निर्णय ले लिया। दूसरे दिन से बच्चों को थाने पर बुलाने लगे। शुरू में वर्दी के डर से बच्चे आने से कतराते थे। धीरे-धीरे उन्हें टॉफी आदि देकर साथ बैठाने लगे। फिर उनके दिल से डर निकलने लगा तो उन्हें बैठाकर पढ़ाने लगे। अब तो इनमें से अधिकांश बच्चे नियमित रूप से आने लगे हैं।

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आसपास के सेवानिवृत्त व बेरोजगार युवकों का बड़ा योगदान
थानध्यक्ष बताते हैं कि बच्चों की पढ़ाई जारी रखने में आसपास के सेवानिवृत्त नागरिकों व बेरोजगार युवकों का बड़ा योगदान है। वे भी बच्चों को नियमित रूप से पढ़ाने आते हैं। इन बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए कई पुलिस अधिकारी व रेल अधिकारी अपने बच्चों व परिवार वालों के जन्मदिन पर इन्हें तोहफा व मुफ्त किताब के साथ ही नए वस्त्र भी बांटते हैं। इन गरीब बच्चों को साल में तीन-चार मर्तबा कपड़ा व अन्य सामान मिल जाता है जिससे इनका मनोबल बढ़ा रहता है।

पाटलिपुत्र थानाध्यक्ष की पहल अनुकरणीय है। पटना जंक्शन व राजेन्द्र टर्मिनल स्टेशन समेत अन्य प्रमुख स्टेशनों के लावारिस अथवा पास की झोपड़ी में रहने वाले बच्चों को पढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इन बच्चों का ध्यान पढ़ाई में लगेगा तो वे गलत कार्यों से दूर रहेंगे।

– अशोक कुमार सिंह, रेल एसपी, पटना

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