नाव डूबी तो इन लड़कों ने लगा दी छलांग जान पर खेलकर कुछ लोगों को बचाया

पटना में गंगा में हुए हादसे के बाद तीन लड़कों की हर कोई तारीफ कर रहा है। तारीफ इसलिए कि तीनों लड़कों ने जान पर खेलकर 15 लोगों को गंगा से सुरक्षित बाहर निकाला। वहीं दूसरी तरफ रवि नाम के एक लड़के ने मां और दो बहनों को बचाया।

जानिए कौन है ये तीनों लड़के
जिन लड़कों ने 15 लोगों की जान बचाई उनके नाम हैं छोटू, हिमांशु और मो. तनवीर। तीनों ने बताया कि बाद डूब रहे 15 लोगों को बाहर निकाला जिनमें तीन बच्चे व चार-पांच महिलाएं भी हैं। उन्होंने बताया कि गंगा से सुरक्षित बाहर निकाले गए 15 लोगों में से एक बच्ची महज डेढ़ साल की है। उन्होंने बताया कि महेंद्रू के वसंत और उनकी पत्नी वसंती को तो बचा लिया पर उनकी पोती नैंसी को नहीं बचा पाए। नैंसी का हाथ पकड़ा गया था, लेकिन पानी के हिचकोले की वजह से छूट गया।

ऐसे बचाया… छोटू की जुबानी
मैं एनआईटी घाट पर मौजूद था। शाम हो रही थी। सरकारी नाव खुली। मैं भी उसपर सवार हो गया।
लॉ कॉलेज घाट के सामने दियारा के निकट जब हमारी नाव पहुंची, तो देखा कि एक नाव जो लोगों से भरी थी, अचानक डूबने लगी। फौरन नाव को वहां ले चलने को कहा। लोग बचाओ-बचाओ का शोर कर रहे थे। फिर मैंने जान पर खेलकर कड़ाके की ठंड में बिना कुछ परवाह किए नदी में कूद गया और लोगों को बचा कर अपनी नाव पर ले आए।

ऐसे बचाया… हिमांशु की जुबानी
दियारा से कुछ दूरी पर नाव को डूबता देख, काफी परेशान हो गया। नाव भरी हुई थी। नाव में बच्चे, महिलाएं अौर पुरुष भी थे। मैंने ही सबों को बताया कि देखो नाव डूब रहा है। जब तक कुछ समझ पाते, नाव से लोगों ने कूदना शुरू कर दिया। लोगों के कूदने से नाव असंतुलित हो गई और चंद मिनट में ही नाव हिचकोला खाने लगी। कोहराम की आवाज सुनाई दे रही थी। उसके बाद हमसे भी नहीं रहा गया और गंगा नदी में छलांग लगा दी। फिर अपना हाथ और नाव में मौजूद ट्यूब को फेेंका, तीन-चार लोगों ने उसे पकड़ा और लोगों की मदद से खींचकर अपने नाव पर ले आए।

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ऐसे बचाया… तनवीर की जुबानी
उसी नाव पर मैं भी था। नाव को डूबता देख, मैं घबरा गया। कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें। फिर जब लोगों की पानी में चीख-पुकार सुनी तो हमसे रहा नहीं गया। छोटू उस वक्त तक नदी में कूद चुका था। उसे देखकर मैंने हिम्मत किया और ऊपर वाले का नाम लेकर गंगा नदी में छलांग लगा दी। मुझे तैरना आता था। मैं हाथ-पांव मारते उस नाव के पास पहुंचा, जो डूब गई थी। लोग ऊब-डूब कर रहे थे। फिर मैं ने कुछ लोगों को बचाया। किन-किन लोगों को बचाया, उनका नाम नहीं जानते।

वहीं दूसरी तरफ रवि नाम के एक लड़के ने पहले तो डूब रही आपनी मां को बचाया। हादसे में रवि की दो बहनें भी डूब रही थी, मां को बचाने के बाद उसने उन्हें भी बचाया। फिलहाल, पीएमसीएच के इमरजेंसी में रवि की मां और दोनों बहनों का इलाज चल रहा है। रवि ने पूरी घटना एक सांस में बताई।

जानिए रवि ने और क्या बताया
रानी घाट के रहने वाले रवि बताया कि दियारा में वो अपनी दो बहनों और मां के साथ पतंगबाजी देखने गया था। शाम को वापस लौटने के दौरान नाव दुर्घटना की शिकार हो गई जिसमें उसकी मां और दोनों बहनें डूबने लगी। उसने बताया कि मेरी मां डूब रही थीं। मैंने ही तो उन्हें नाव पर बैठाया था। उनसे कहा था कि आप चली जाइए, मैं पीछे से किसी तरह आ जाऊंगा। रवि के मुताबिक, नाव में भीड़ बढ़ गई थी। नाव का चालक नाव को ले जाने के लिए तैयार नहीं था। इसी बीच करीब 20-22 लड़के आए। वे नाव का पंपिंग सेट स्टार्ट होने के साथ ही नाविक के मना करने के बाद भी वे चढ़ गए। नाव करीब 100 मीटर गई थी कि पंपिंग सेट तेज धुआं फेंकने लगा। देखते-देखते नाव नीचे धंसने लगी। मैं देखा और गंगा नदी में कूद पड़ा। तैर कर वहां पर पहुंचा। मां को बाहर निकाला। दो और बहनों को बचाया। उसने बताया कि मेरी मां बेसुध थी, लेकिन वे मुझे नाव में बैठे अन्य लोगों को बचाने के लिए कह रही थी।

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पांच मिनट में सबकुछ बदल गया
पीएमसीएच के इमरजेंसी में मां की सेवा में लगा रवि सामान्य नहीं हो पा रहा था। उसने बताया कि प्रशासन की ओर से एनआईटी घाट से नाव की व्यवस्था की गई थी। इसे देखकर हमलोग भी उस पार चले गए। लेकिन, उधर से आने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई। नाव करीब साढ़े चार बजे खुली। पांच मिनट भी नहीं चली थी कि धुआं काफी तेज उठने लगा। नाव में पानी भरने का हल्ला मचा और वह डूबने लगी। करीब 55-60 लोग पहले से थे। नाव में अतिरिक्त 20-22 लोगों के जाने के कारण नाव डूबने लगी। प्रशासन के सुरक्षा कर्मी वहां मौजूद नहीं थे। वहां मौजूद लोगों में से कुछ नदी में डूब रहे लोगों को बचाने के लिए कूदे। मैं भी कूदा। ठंड का पता नहीं चला।

Rohit Kumar

Founder- livebiharnews.in & Blogger- hinglishmehelp.com | STUDENT

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