दोनों आंखों से नहीं दिखता फिर भी रोज 100 बच्चों को फ्री में देते हैं शिक्षा

बिहार के गोपालगंज के सकलदीप शर्मा की दोनों आंखों में रोशनी नहीं है। वह भले ही कुछ देख न पाएं, लेकिन उनके ज्ञान की रोशनी बांटने के जज्बे को हर लोग सलाम करते हैं। सकलदीप चार बैच में लगभग एक सौ से अधिक बच्चों को फ्री में पढ़ा रहे हैं।

सकलदीप शर्मा सदर प्रखण्ड के कोन्हावा गांव के आशीष शर्मा के बेटे हैं। इनके पिता सेना में थे, जिनकी कुछ दिनों पूर्व मौत हो गई। सिर से पिता का साया उठ जाने के बाद भी सकलदीप के हौसले पस्त नहीं हुए।

वह सुबह 6 बजे से बच्चों पढ़ाना शुरू करते हैं और शाम तक 4 बैच के बच्चों को फ्री में पढ़ाते हैं। सकलदीप बताते हैं कि 1992 में उन्हें ब्रेन ट्यूमर हुआ। उस समय पिता अरुणांचल प्रदेश में सेना में कार्यरत थे। उनके पहुंचने में थोड़ी देर हो गई और इलाज के अभाव में उनकी आंखों की रोशनी चली गई।

फौजी का बेटा हूं, देशभक्ति खून में है
सकलदीप कहते हैं कि समाजसेवा ही जीवन की सार्थकता है। वह देश भक्ति की कवितायें लिखकर अपने हौसले को बढ़ाते हैं। यह पूछे जाने पर कि आप राष्ट्र भक्ति की रचनाएं ही क्यों लिखते हैं। उन्होंने कहा कि फौजी का बेटा हूं तो देश भक्ति का जज्बा तो खून में ही है।

मैट्रिक की परीक्षा में शामिल नहीं हो पाने का दुःख तो उन्हें है ही, लेकिन खुशी इस बात की भी है कि वह हाई स्कूल तक के मैथ के हर सवाल को बड़ी आसानी से हल कर लेते हैं। उनके पास नर्सरी से लेकर हाई स्कूल तक के बच्चे पढ़ने आते हैं।

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राष्ट्र भक्ति की रचनाओं पर मिल चुका है पुरस्कार
सकलदेव ने 100 से ज्यादा कविताएं लिखी हैं। उन्हें कुछ दिन पहले ही विद्वत परिषद् वाराणसी द्वारा विद्वत भूषण का सम्मान मिला है। वहीं, जिले में आयोजित होने वाली प्रतिभा सम्मान से भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।

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