ठंड से जम गए थे हाथ-पांव, फिर भी इन्होंने कई को डूबने से बचाया

नाव हादसे के बाद गंगा नदी में डूब रहे लोगों के बीच महेंद्रू के गांधी घाट एरिया के रहने वाले शख्स ने अकेले 13 लोगो को बचाया। वहीँ दूसरी तरफ सुमन ने दो महिलाओं व एक बच्ची को बचाया।

अमरनाथ ने गंगा में कूदकर आठ लोगों को बोट पर तो 5 लोगों को पानी से निकालकर घाट के किनारे तक पहुंचाया। दरअसल मकर संक्रांति की शाम करीब 5 बजे ये शख्स अपने फ्रेंड्स के साथ एनआईटी घाट पर पहुंचा था।

जानिए कौन है ये शख्स
13 लोगों को बचाने वाले इस शख्स का नाम है अमरनाथ। मगध यूनिवर्सिटी के एनआरआई कॉलेज (बिहारशरीफ) में बीए का छात्र अमरनाथ बचपन से ही तैराक है। गंगा नदी के पास घर होने के कारण पहले वह नियमित रुप से नदी में तैराकी करता था। घटना के दिन अमरनाथ अपने दोस्त अजय के साथ पटना के एनआईटी घाट पर पहुंचा था।

नाव पर सवार थे 50 लोग
अमरनाथ घटना के ठीक पहले घूमने-फिरने के इरादे से दियारा जाने के लिए मोटरबोट (एमवी कौटिल्या) पर सवार हो गया। अमरनाथ के मुताबिक, शाम का धुंधलका होने के कारण वह दूर से दुर्घटनाग्रस्त नाव को ठीक से नहीं देख पा रहा था। नजदीक जाने पर लगा कि 40 से 50 लोग गहरे पानी में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे थे। थोड़ी ही देर बाद नदी के बीच में पहुंचते ही उसकी नजर डूब रहे लोगों पर पड़ी। जिंदगी के लिए जद्दोजहद कर रहे लोग मौत की मुहाना बनी पानी में हाथ-पैर मार रहे थे। चीख-पुकार मची थी।

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सुमन ने दो महिलाओं व एक बच्ची को बचाया
नाव पर लोग सवार हुए. नाववाले ने नाव को हाथ से खींच कर थोड़ा आगे किया। किनारे से नाव लगभग 20 फुट की दूरी पर होगी। नाववाले ने इंजन को स्टॉर्ट किया। इंजन शुरू होने के साथ ही नाव की निचली तरफ से गंगा का पानी नाव में आने लगा. साथ ही नाव नीचे जाने लगा। लोग डरने लग, जब तक लोग समझ पाते नाव पानी में समा चुका था। मैंने नाव से पानी में छलांग लगायी। किनारे आया। कई लोग नदी में डूब रहे थे। फिर, मैं तुरंत नदी में कूदा। दो महिला और एक बच्ची की जान बचायी। किसी और को बचाने का मौका नहीं मिला. तब तक कई लोग गंगा में समा चुके थे।

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