विश्व की दूसरी बड़ी रेल दुर्घटना, बेमौत मारे गए थे हजारों यात्री

महेंद्र प्रसाद, सहरसा
छह जून 1981 का वह दिन आज भी इतिहास के पन्नों पर दर्ज है जिसको याद करने के बाद रूह कांप जाती है।

जी हाँ हम बात कर रहे हैं बिहार के खगडि़या जिले के धमरा घाट पुल पर एक पैसेंजर ट्रेन और बाहर तेज बारिश। ट्रेन के भीतर यात्री अपने में मस्त, सभी को घर पहुंचने की जल्दी। अचानक ड्राइवर ने ब्रेक लगाई और ट्रेन की नौ में से सात बोगियां फिसलकर पुल तोड़ते हुए लबालब नदी में विलीन हो गईं।

बोगियों के नदी में गिरने के बाद, जाहिर सी बात है कि चीख-पुकार मच गयी। कुछ चोट लगने या डूब जाने से जल्द मर गए, कुछ जो तैरना जानते थे, उन्होंने किसी तरह गेट और खिड़की से अपने और अपने प्रियजनों को निकाला।

तीन हजार तक हुई मौतें
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक करीब 500 लोग ही ट्रेन में थे। लेकिन, बाद में रेलवे के दो अधिकारियों ने मीडिया से बातचीत में मृतकों की संख्या 1000 से 3000 के बीच बताई थी। गौरतलब बात यह है कि यह पैसेंजर ट्रेन थी, जिसमें कितने लोग थे, निश्चित अंदाजा लगा पाना मुश्किल था। यह रेल दुर्घटना भारत की सबसे बड़ी और विश्व की दूसरी सबसे बड़ी ट्रेन दुर्घटना थी।

मानवता पर लगे ये दाग
पर इसके बाद जो हादसा हुआ, वह मानवता के दामन पर बदनुमा दाग बन गया। घटना स्थल की ओर तैरकर बाहर आने वालों से कुछ स्थानीय लोगों ने लूटपाट शुरू कर दी। यहां तक कि प्रतिरोध करने वालों को कुछ लोगों ने फिर से डुबोना शुरू कर दिया। कुछ यात्रियों का तो यहां तक आरोप है कि जान बचाकर किनारे तक पहुंची महिलाओं की आबरू से भी खेला गया।

पढ़े :   खुशखबरी: मधेपुरा रेल कारखाने में 11 अक्टूबर से इंजन निर्माण होगा शुरू

मंजर याद कर सिहर उठता दिल
बाद में जब पुलिस ने घटनास्‍थल के निकटवर्ती बंगलिया, हरदिया और बल्कुंडा गांवों में छापेमारी की तो कई घरों से टोकरियों में सूटकेस, गहने व लूट के अन्य सामान मिले थे। इससे यात्रियों के आरोपों की पुष्टि हुई। मोतिहारी के ठाकुर शशि शेखर बताते हैं कि दुर्घटना के दौरान उनके माता-पिता उसी ट्रेन में थे। मां बुरी तरह घायह हुई थीं। उन्होंने लूटपाट का वो मंजर अपनी आंखों से देखा था।

आज तक दुर्घटना के कारण अज्ञात
आखिर वह दुर्घटना कैसे हुई थी? वजह का आज तक पता नहीं चल सका है। हालांकि, दो कारण बताए गए हैं। पहला यह कि ट्रैक पर अचानक एक भैंस आ गई, जिसे बचाने के क्रम में ड्राइवर ने ब्रेक मारी। ट्रैक पर फिसलन के कारण ट्रेन फिसलकर नदी में जा गिरी।

दूसरा कारण यह बताया जाता है कि उस वक्त तूफानी हवाओं के साथ बारिश हो रही थी। इस कारण यात्रियों ने खिड़कियां बंद कर लीं। इस कारण ट्रेन से तूफानी हवाओं के क्रॉस करने के सारे रास्ते बंद हो गए और भारी दबाव के चलते ट्रेन पलट गई।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

error: Content is protected !!