वर्ल्ड की सबसे बड़ी पेंटिंग: बिहार के इस स्टेशन की दीवारों पर हो रही मधुबनी पेंटिंग, …जानिए

बिहार के मधुबनी स्टेशन का नाम जल्द ही गिनीज बुक में दर्ज हो सकता है। इसके लिए यहां दीवारों पर करीब 7000 से अधिक वर्ग फुट में मधुबनी पेंटिंग उकेरी जा रही है। किसी भी लोक चित्रकला क्षेत्र में इतने बड़े एरिया में पूरे वर्ल्ड में एक रिकॉर्ड हो सकता है।

‘क्राफ्टवाला’ संस्था के राकेश झा की माने तो गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में मात्र 4566.1 वर्ग फुट पेंटिंग दर्ज है। हालांकि भारत में सबसे बड़ी पेंटिंग का रिकॉर्ड मात्र 720 वर्ग फुट का है। इस लिहाज से मधुबनी स्टेशन का पेंटिंग पूरे वर्ल्ड की सबसे बड़ा पेंटिंग होगी।

यहां 46 छोटे व बड़े थीम में बांट कर एक सौ से अधिक कलाकार श्रमदान कर रहे हैं। गांधी जयंती पर दो अक्टूबर को मधुबनी रेलवे स्टेशन पर इसका विधिवत शुभारंभ डीआरएम ने किया था। दिनरात चल रहे इस कार्य को सात अक्टूबर तक पूरा करने का लक्ष्य है।

संभावना है कि उसी दिन इसका लोकार्पण किया जाएगा। इसके बाद जयनगर-दरभंगा रेलखंड के यात्री बगैर स्टेशन का नाम देखे सिर्फ मधुबनी पेंटिंग देखकर पहचान जाएंगे कि ये मधुबनी स्टेशन है।

समस्तीपुर के डीआरएम आरके जैन व मधुबनी के ठाढ़ी गांव निवासी ‘क्राफ्टवाला’ राकेश झा इस काम को मिशन के तौर पर कराने में लगे हैं।

इन थीमों पर हो रही है पेंटिंग
1.रामायण- जिसके तहत सीता जन्म, राम-सीता वाटिका मिलन, धनुष भंग, जयमाल व विदाई, 2.कृष्णलीला- वासुदेव द्वारा जन्म के बाद यमुना पार कर कृष्ण को मथुरा ले जाना, माखन चोरी, कालिया मर्दन, कृष्ण रास, राधा कृष्ण प्रेमालाप, 3.विद्यापति, 4.ग्राम जीवन का विकास, 5.ग्रामीण हाट, 6.ग्रामीण खेल- गिल्ली डंडा, कितकित, पिट्टो, 7.मिथिला लोक नृत्य व पर्व- झिझिया, सामा चकेबा, छठ आदि मुख्य थीम है। हर थीम को लेकर 5 से 10 कलाकारों की टीम बनायी गयी है। इसमें अनुभवी कलाकारों को टीम लीडर बनाया गया है। इनमें टीम लीडर हैं- सोनू निशांत, उमा कुमारी, संजय कुमार जायसवाल, श्रवण जी, रमेश मंडल, रत्नेश्वर झा, चतुरानन्द झा, स्वीटी कुमारी आदि। इसके अलावे पूरे प्रोजेक्ट में शहर निवासी महेंद्र लाल कर्ण, लोहना निवासी नूतन झा, गणनाथ झा, भवेश झा सहित कई लोगों का सहयोग मिल रहा है।

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अधिकारी बोले
मधुबनी क्षेत्र की कला देखते ही बनती है। श्रमदान को नये-नये कलाकार खुद आ रहे हैं और रात तक काम कर रहे हैं। 30-40 कलाकार तो बैठे हुए हैं। हम उन्हें पेंटिंग बनाने को जगह नहीं दे पा रहे हैं। रेलवे स्टेशन को मधुबनी के लोग खुद का घर मानकर प्यार व मेहनत से काम कर रहे हैं। यहां के लोग धन्यवाद के पात्र हैं। रेलवे उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्घ करा रही है।
-उमा कुमारी झा
मिथिला पेंटिंग स्टेट अवार्डी

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