अब बिहार में तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को 10 की बजाए मिलेगा 25 हजार भत्ता

बिहार सरकार अब तलाकशुदा अल्पसंख्यक महिलाओं को प्रति महीने 25 हजार रुपए गुजारा भत्ता देगी, पहले यह राशि 10 हजार रुपए थी। बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के दौरान इस बारे में जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि तलाकशुदा महिलाओं को गुजारा भत्ता देने की शुरुआत 2005 में की गई, जब बिहार में एनडीए की सरकार बनी थी और अब इसमें संशोधन कर तलाकशुदा महिलाओं के गुजारे भत्ते की राशि बढ़ा दी गई है।

कांग्रेस की सरकार ने गुजारा भत्ता से वंचित कर दिया था
31 साल पहले 1986 में सुप्रीम कोर्ट ने शहबानो मामले में गुजारा भत्ता का निर्णय दिया था, मगर तत्कालीन राजीव गांधी की सरकार ने कानून में संशोधन कर मुस्लिम तलाकशुदा महिलाओं को उससे वंचित कर दिया था।

केंद्र और राज्य की सरकारें किसी भी धर्म के अन्दरूनी मामले, रीति-रिवाज आदि में कोई हस्तक्षेप और धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करती हैं मगर महिलाओं, बच्चों के साथ होने वाले भेदभाव, तीन तलाक, दहेज प्रथा, बाल विवाह, छुआछूत जैसी सामाजिक बुराइयों को रोकने की पहल जरूर की जाएगी।

सामाजिक सुधार की कार्रवाई का कुछ लोग विरोध करते हैं, सती प्रथा के उन्मूलन का भी कुछ लोगों ने विरोध किया था। तीन तलाक जैसी कुप्रथा का धर्म से कोई संबंध नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के साथ अन्याय है।

मदरसों में भी सरकारी स्कूलों जैसी होंगी सुविधाएं
मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत सरकारी स्कूलों की भांति मदरसों से 10वीं व 12वीं की परीक्षा अच्छे अंकों में उत्तीर्ण करने वालों को भी छात्रवृत्ति दी जाएगी। मान्यता प्राप्त मदरसों में कक्ष, पेयजल, शौचालय, पुस्तकालय, कम्प्यूटर आदि के लिए राज्य सरकार सहायता देगी।

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गुजारा भत्ता बिल का सबको समर्थन करना चाहिए
बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि पिछले 22 अगस्त को एक साथ तीन तलाक को सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवैध करार दिया गया था।

उसके बाद संसद के आगामी सत्र में भारत सरकार की ओर से तीन तलाक और तलाकशुदा महिलाओं के भरण पोषण के लिए आने वाले संभावित बिल का देश के राजनीतिक दलों व मुस्लिम समाज के प्रगतिशील लोगों को समर्थन करना चाहिए।

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