सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ में इतिहास रच एक बार फिर बिहार ने बनाया विश्व रिकॉर्ड

बिहार में सूरज रविवार सुबह रोज की तरह ही उगा, लेकिन ढलने से पहले इतिहास के एक ऐसे पन्ने का साक्षी बन चुका है जो अरसे तक राज्य के चेहरे को रोशन करता रहेगा। जी हां! सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ संकल्प को स्वर एवं बल देने के लिए विश्व की सबसे लंबी मानव श्रृंखला बनाकर इतिहास रचने के लिए एक बार फिर आज पूरा बिहार एक जुट हुआ।

आज सुबह से ही पूरे बिहार में चहल-पहल देखी जा रही थी। बिहार के लोग खुद को खुशनसीब मान रहे हैं और इसे लेकर उत्साहित थें। करीब पांच करोड़ लोग सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ एक दूसरे का हाथ थामकर 13660 किमी लंबी मानव शृंखला का निर्माण करने के लिए जगह-जगह इकट्ठा हुए थें।

मानव श्रृंखला का निर्माण दोपहर 12:00 बजे हुआ, मुख्य समारोह गांधी मैदान में आयोजित हुआ, जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुब्बारा उड़ाकर समारोह का उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री के साथ गांधी मैदान में उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी सहित बिहार के सभी गणमान्य लोग उपस्थित हुए। लोगों के चेहरे पर मुस्कान, बच्चों के मन में उत्साह और महिलाओं के चेहरे पर गर्व साफ झलक रहा था।

मानव श्रृंखला के बाद बोले नीतीश
मानव श्रृंखला के बाद मीडिया से मुखतिब मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि बाल विवाह और दहेज के खिलाफ संकल्‍प प्रकट करने के लिए यह आयोजन हुआ। इससे लोगों के मन में उत्‍साह का माहौल बना है। बाल विवाह व दहेज के खिलाफ पहले से ही काननू हैं। लेकिन, ये कुरीतियां फैलती जा रही हैं। इसलिए हम बापू के जन्‍मदिवस दो अक्‍टूबर से निरंतर कैंपेन कर रहे हैं। यह कार्यक्रम जारी रहेगा।

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मुख्‍यमंत्री ने कहा कि लोगों में बाल विवाह व दहेज के खिलाफ जागरूकता आ रही है। उनके संकल्‍प का प्रकटीकरण सार्वजनिक तौर पर भी होना चाहिए। इसलिए इस साल 21 जनवरी को बाल विवाह व दहेज के खिलाफ मानव श्रृंखला बनाई गई।

मुख्‍यमंत्री ने कहा कि ठंड के बावजूद लोगों ने हर जगह मानव श्रृंखला बनाई। पिछली बार सड़कों पर ही श्रृंखला बनाई गई थी। इस बार यह लोगों पर छोड़ा गया था। लोगों ने गांव-कस्‍बे-मोहल्‍ले में जहां चाहा श्रृंखला बनाई।

मुख्‍यमंत्री ने कहा कि सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ लोगों के मन में जागृति आ रही है, यह प्रसन्‍नता की बात है। कहा कि विकास का काम चलता रहेगा। लेकिन, साथ-साथ सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ भी जन-जागृति का अभियान जारी रहेगा। ऐसे सामाजिक अभियान निरंतर चलते रहने वाली चीज हैं।

40 ड्रोन से फोटोग्राफी-वीडियोग्राफी
विश्व की सबसे लंबी मानव श्रृंखला की यादों को सहेजने के लिए सरकार ने 40 ड्रोन की सहायता से फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी करवाया। प्रत्येक जिले को एक-एक ड्रोन उपलब्ध कराया गया था। श्रृंखला की सफलता के लिए सरकारी स्तर पर करीब तीन महीने पूर्व ही तैयारियां शुरू कर दी गई थी।

जन-जन को दहेज-बाल विवाह के खिलाफ जागृत करने के लिए अब तक करीब 16.50 लाख नारे रचे गए हैं। इसके अलावा कला जत्था के एक सौ चौबीस कलाकारों ने नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए गांव-गांव में सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ लोगों को जागृत किया।

टूटा पिछला रिकॉर्ड, बना नया कीर्तिमान
पिछले साल 21 जनवरी को शराबबंदी के पक्ष में विश्व रिकॉर्ड मानव श्रृंखला बनी थी। 12,760 किलोमीटर में बनी मानव श्रृंखला में 3,11,08,535 लोग एक-दूसरे का हाथ थामे एक कतार में खड़े हुए थे। कई जगहों पर दो से चार कतारें भी बनी थी। पिछले साल बनी मानव श्रृंखला को लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में सबसे बड़ी मानव श्रृंखला के रूप में दर्ज किया गया था।

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इस वर्ष दहेज और बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ 13668.67 किलोमीटर में बनी मानव श्रृंखला में लगभग पांच करोड़ लोग एक-दूसरे का हाथ थामे एक कतार में खड़े हुए। मुख्यसचिव अंजनी कुमार सिंह ने कहा सरकार को उम्मीद है हम इस बार मानव श्रृंखला में नया कीर्तिमान कायम किये हैं और उसे लिम्का बुक में निश्चित रूप से शामिल किया जाएगा।

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