बिहारी वैज्ञानिक का दुनिया में बजा डंका: खोज लिया डेंगू-जीका का इलाज, …जानिए

बिहार के लाल ने ऐसा कारनामा किया है जो दुनिया को कई घातक बीमारियों से बचाएगा। बिहार के किशनगंज ज़िले के निवासी डॉ. मुमताज़ नैयर ने ज़ीका, डेंगू तथा हेपेटाइटिस आदि जानलेवा बीमारियों के वायरस की रोकथाम के लिए ब्रिटैन के यूनिवर्सिटी ऑफ साउथथेम्प्टन की प्रयोगशाला में टीका की खोज की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है।

डॉ. मुमताज़ नैयर का यह अविष्कार बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश का नाम दुनिया में ऊंचा किया है। दुनियाभर के वैज्ञानिक इसे एक क्रांतिकारी खोज बता रहे हैं।

इस संबंध में ज्यादा जानकारी देते हुए डॉ. नैयर ने बताया कि उन्होंने अपनी टीम के साथ यूनिवर्सिटी ऑफ साउथथेम्प्टन की प्रयोशाला में पिछले पांच सालों से घंटों काम करने के बाद इस टीके को विकसित करने में सफलता पाई है।

उन्होंने उम्मीद जाहिर करते हुए कहा कि अगर हमारा प्रयोग सफल होता है तो यह दुनिया भर में मेडिकल साइंस के क्षेत्र में क्रांति ले आएगा और इससे विश्वभर के लाखों लोगों को इन लाईलाज बीमारियों से छुटकारा मिल सकता है और उनकी जान बच सकती है।

डॉ. मुमताज नैयर का कहना है कि मैं भारत का निवासी हूँ इसलिए मुझे इस बात की भी प्रसन्नता है कि टीके के अविष्कार से देशवासियों को इन जानलेवा बीमारियों से छुटकारा मिलेगा। बताते चलें कि अपने पीएचडी के दौरान डॉ. मुमताज नैय्यर ने कालाजार, एचआईवी व कैंसर रोगों पर नियंत्रण हेतु एक बड़ी खोज की थी जो कि पांच वर्ष पूर्व सितंबर 2012 में प्रकाशित हुआ था।

ज्ञात हो कि डॉ. मुमताज नैयर इंग्लैंड के प्रसिद्ध साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय में पांच साल से भी अधिक से भी पोस्ट-डॉक्टरल रिसर्च एसोसिएट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने नेशनल सेंटर फॉर सेल साइंस, पुणे, भारत से उन्होंने इम्यूनोलॉजी में पीएचडी की डिग्री हासिल की। मास्टर ऑफ साइंस बायोटेक्नोलॉजी में जामिया हमदर्द, नई दिल्ली से किया, जबकि बीएससी बायोटेक्नोलॉजी जामिया मिलिया इस्लामिया, दिल्ली से ही किया।

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बिहार के किशनगंज जिले के प्रखंड ठाकुरगंज मुख्यालय से करीब 10 किमी दूरी पर स्थित बेसरबाटी ग्राम पंचायत के करबलभिट्टा गांव के निवासी है। उच्च विद्यालय ठाकुरगंज में वर्ष 1996 को मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की। 36 वर्षीय युवा वैज्ञानिक डॉ. मुमताज नैय्यर बताते हैं कि उस मुकाम में पहुंचाने में उनके मां और बड़े भाईयों का भी बहुत बड़ा योगदान रहा है।

अपनी सफलता के बारे में बात करते हुए डॉ. मुमताज नैयर ने कहा कि बचपन में ही किसान पिता स्व. जहान अली की मृत्यू के बाद उनकी अम्मी और बड़े भाई मोहम्मद जैनुल आबिदीन व मुश्ताक अहमद के त्याग व परिश्रम से मैं इस मुकाम पर पहुंचा हूँ। उनकी माँ की वर्ष 2006 में देहांत के बाद वो काफी टूट से गए थे पर मां-पिता के न रहते हुए भाइयों ने मेरे पढ़ाई-लिखाई में कोई कसर न छोड़ी।

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