इस साल भी UPSC में बिहार के होनहारों का दबदबा, …जानिए

यूपीएससी सिविल सर्विसेज 2017 की परीक्षाओं के परिणाम की घोषणा हो गई है। इस साल भी बिहार के होनहारों का दबदबा देखने को मिल रहा है। बक्सर के अतुल प्रकाश को चौथी रैंक मिली है, जबकि सहरसा जिले के चैनपुर के सागर कुमार झा को 13वां और पटना की अभिलाषा अभिनव को 18वां व रविकेश त्रिपाठी को 334वां स्थान मिला है। वहीं कहलगांव की ज्योति को 53वीं, भागलपुर के मोतिउर्रहमान को 154वीं, मुंगेर के अविनाश को 139वीं और बेगूसराय के योगेश गौतम को 172वीं रैंक मिली है।

बिहार के अन्य सफल अभ्यर्थी
अमृतेश कुमार – गया – 363
अविनाथ चंद्र शाडिल्य – मोतिहारी – 391
रतन कुमार झा – मधुबनी – 408
नीतीश कुमार – आरा – 671
समीर किशन – जन्दाहा – 748
विकास – गया – 598
सौरभ – नवगछिया – 389

संघ लोक सेवा आयोग, सबसे कठिन परीक्षा
भारत में संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित की जाने वाली सिविल सर्विस परीक्षा को सबसे अध‍िक मुश्क‍िल माना जाता है। लेकिन आइएएस ये टॉप रैंकर्स कैसे बनते हैं, इसका फिक्स फॉर्मूला तो अब तक किसी को नहीं मिला, लेकिन माना जाता है कि कुछ राज्य ऐसे हैं जिन्होंने इस फॉर्मूले को क्रैक कर लिया है। बिहार इन टॉपर्स को पैदा करने में दूसरे नंबर पर है।

बिहारियों ने कायम रखा है दबदबा
एक आंकड़े के अनुसार देश भर के कुल 4925 आईएएस अधिकारियों में 462 अकेले बिहार से हैं। यानी, 9.38 प्रतिशत टॉप ब्यूरोक्रेट्स बिहारी हैं। 2007 से 2016 के बीच देश भर से चुने गए कुल 1664 आईएएस अधिकारियों में से बिहार से 125 (7.51 प्रतिशत) शामिल हुए। हालांकि यह बढ़ोतरी अभी बिहार से कुल आइएएस अधिकारियों की संख्या में कम है। बिहार से सबसे ज्यादा आईएएस अधिकारी 1987 से 1996 के बीच चुने गए। इस दौरान यूपीएससी के जरिए कुल 982 आईएएस अधिकारियों का चयन हुआ, जिसमें अकेले बिहार से 159 अधिकारी शामिल थे। उस समय बिहार से आईएएस बनने की दर 16.19 फीसदी रही।

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आइएएस ही नहीं, आइपीएस, आइएफएस भी ज्यादातर बिहार से ही आते हैं। पिछले दस साल की बात करें तो सात सौ में से पच्चीस प्रतिशत बिहार के अभ्यर्थियों ने आइएएस और आइपीएस की परीक्षा में सफलता पाई है। वहीं देश के अधिकतम बड़े पदों की शोभा बिहारी बढ़ा रहे हैं, आइबी प्रमुख हों या सीबीआइ प्रमुख, बिहारी राज कायम है। बिहारी भारतीय प्रशासिक सेवा की रीढ़ की हड्डी कहे जाते हैं, दूसरे शब्दों में बिहार पिछड़ेपन और अभावग्रस्त राज्य होने के साथ आइएएस, आइपीएस, आइएफएस की फैक्ट्री कहा जाता है।

बिहार की मेधा का लोहा पूरी दुनिया ने माना है। शून्य का अाविष्कार करने वाले आर्यभट्ट हों या अर्थशास्त्र के प्रणेता चाणक्य, दुनिया को शांति का पाठ पढ़ाने वाले महात्मा बुद्ध हों या शिक्षा का संदेश देने वाला नालंदा विश्वविद्यालय, इनसब पर बिहारियों को नाज है।

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