बिहार: सौ साल बाद आज से बदल गया पुलिस मुख्यालय का पता, …जानिए

पटना. सौ साल के बाद आज शुक्रवार को बिहार पुलिस के मुख्यालय का पता बदल गया। पुराना सचिवालय में वर्ष 1917 से चल रहा पुलिस मुख्यालय बेली रोड स्थित अपने नए भवन (सरदार पटेल भवन) में शिफ्ट हो गया। नवनिर्मित मुख्यालय का उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया।

53504 स्क्वायर मीटर बिल्ट-अप एरिया वाले इस सात मंजिला भवन के निर्माण में 305 करोड़ रुपये की लागत आई है। यह पहला इतना हाईटेक पुलिस मुख्यालय है, जो हर तरह की आपदा और माहौल में भी विधि व्यवस्था को नियंत्रण करने में सक्षम है।

बेस आइसोलेशन तकनीक का इस्तेमाल
बिहार में यह पहला भवन है जिसमें बेस आइसोलेशन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इस तकनीक की खासियत यह है कि रिक्टर स्केल पर अगर नौ की तीव्रता के साथ भी भूकंप आता है तो भवन को कुछ नहीं होगा। भूकंप के समय भी यह भवन पूरी तरह से ऑपरेशनल रहेगा। 

भवन में 10 दिनों का पावर बैकअप
पुलिस मुख्यालय भवन की खासियत यह भी है कि अगर 10 दिनों तक प्रदेश में सभी जगहों पर बिजली कटी रहती है, तो भी यहां बिजली रहेगी। यहां इस तरह के उपकरण लगाए गए हैं, जिनसे 10 दिनों के पावर बैक-अप की सुविधा उपलब्ध होगी। भवन को सोलर पावर से भी लैस किया गया है।

पूरी तरह ग्रीन बिल्‍डिंग
यह ग्रीन बिल्डिंग होगी। यहां इस्तेमाल होने वाला पानी भी बाहर नहीं जाएगा। परिसर में वाटर ट्रीटमेट प्लांट लगाया गया है। गंदे पानी के शोधन के लिए सीवेज ट्रीटमेट प्लांट भी काम करेगा।

बगैर कार्ड स्वैप भीतर जाना असंभव
प्रवेश की व्यवस्था भी हाईटेक है। प्रवेश द्वार के तुरंत बाद एक हॉल है। उस हॉल में कई टर्मिनल बने हैं। वहां खास किस्म के इलेक्ट्रॉनिक कार्ड के स्वैप के बगैर भीतर जाने का रास्ता ही नहीं खुलेगा। परिसर में साढ़े चार सौ वाहनों की अंडर ग्राउंड पार्किंग हो सकेगी। भवन की छत पर एक हेलीपैड भी बनाया गया है।

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मुख्यमंत्री से लेकर डीजीपी तक का ऑफिस
इस भवन में मुख्यमंत्री कार्यालय, गृह सचिव, पांच डीजीपी के अलावा सीआइडी, स्पेशल ब्रांच, रेल पुलिस, खुफिया विंग, ट्रेनिंग, बीएमपी, वायरलेस सहित सभी विंग के कार्यालय होंगे। भवन पूरी तरह ऑपरेशनल होगा। यानी क्राइसिस में भवन में सभी विंग के अधिकारी पूरे ऑपरेशन को मॉनिटर कर सकेंगे। जीपीएस सिस्टम से यह पता लगाया जा सकेगा कि जिलों के एसपी कहां हैं पुलिस की गाड़ियां कहां मूव कर रही हैं।

भवन निर्माण की यह है कहानी
पुलिस भवन के सचिवालय से बाहर निर्माण के पीछे का तर्क यह था कि सचिवालय तो सचिवों का आलय है। वहां पुलिस निदेशालय का क्या काम? निदेशालय का मुख्यालय सचिवालय में नहीं होना चाहिए। सरकार को आइडिया पसंद आया और हरी झंडी मिल गई।

लेकिन एक ही छत के नीचे इतने बड़े महकमे को खड़ा करना बड़ा टास्क था। इसके लिए काफी जमीन की दरकार थी। पुलिस मुख्यालय भवन के लिए जमीन भी मिल गई वह भी पुलिस की जमीन। पटना के बीचोंबीच बेली रोड पर। तब वहां सात एकड़ जमीन पर वायरलेस का दफ्तर हुआ करता था। यहीं वायरलेस का टेक्निकल ऑफिस भी था और कई आइजी के दफ्तर भी थे।

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