केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनधारियों को झटका, …जानिए

केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों और पेंशनधारियों को बड़ा झटका दिया है। सरकार ने उनके महंगाई भत्ता (Dearness Allowance) बढ़ाने पर रोक लगा दी है। 1 जनवरी 2020 से 30 जून 2021 तक बढ़ा महंगाई भत्ता नहीं देने का प्रस्ताव है।

सरकार के इस फैसले का असर 54 लाख कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनधारियों पर पड़ेगा। बता दें कि पिछले महीने सरकार ने 01 जनवरी 2020 से कर्मचारियों और पेंशनधारियों के महंगाई भत्‍ते में 4 फीसदी बढ़ोतरी की घोषणा की थी। महंगाई भत्ता को 17 फीसदी से बढ़ाकर 21 फीसदी किया गया था। परन्तु अब उस पर रोक लगा दी गयी है।

क्या है सरकार का आदेश?
सरकार ने बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता रोकने का आदेश दिया है। केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनधारियों को अब 1 जनवरी 2020, 1 जुलाई 2020 और 1 जनवरी 2021 से बढ़ने वाला महंगाई भत्ता नहीं मिलेगा। जो महंगाई भत्ता रोका जा रहा है उसका एरियर के तौर पर भुगतान भी नहीं होगा। हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि मौजूदा दर (17%) पर महंगाई भत्ते का भुगतान होता रहेगा।

सरकार ने क्यों लिया ये फैसला?
कहा जा रहा है कि सरकार का यह फैसला कोरोना वायरस महामारी के चलते लिया गया है। जिसकी वजह से सरकारी राजस्व बुरी तरह प्रभावित हुआ है और देश में जारी लॉकडाउन से देश की अर्थव्यवस्था को भी काफी गहरा नुकसान पहुंचा है।

सरकार को होगी 37,530 करोड़ रुपये की बचत
अनुमान है की केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनधारियों के लिए महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी को रोके जाने से केंद्र सरकार को वित्त वर्ष 2020-21 और 2021-22 में करीब 37,530 करोड़ रुपए की बचत होगी।

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राज्य सरकारें भी रोक सकती हैं महंगाई भत्ता
केंद्र सरकार के फैसले के बाद राज्य सरकारें भी अपने कर्मचारियों और पेंशनधारियों का महंगाई भत्ता रोक सकती हैं। यदि राज्य सरकारें ऐसा करती हैं तो इस मद में करीब 82,566 करोड़ रुपए की बचत होगी। इस प्रकार केंद्र और राज्य सरकारों को महंगाई भत्ते की मद में 1.20 लाख करोड़ रुपए की बचत होगी, जो कोरोना के खिलाफ जंग में काफी मदद करेगी।

क्यों दिया जाता है महंगाई भत्ता, कब से शुरू हुई थी महंगाई भत्ता देने की प्रथा?

  • महंगाई भत्ता ऐसा पैसा है, जो देश के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनधारियों के रहने-खाने के स्तर को बेहतर बनाने के लिए दिया जाता है। पूरी दुनिया में सिर्फ भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश ही ऐसे देश हैं, जिनके सरकारी कर्मचारियों को ये भत्ता दिया जाता है।
  • ये पैसा इसलिए दिया जाता है, ताकि महंगाई बढ़ने के बाद भी कर्मचारी और पेंशनधारियों के रहन-सहन के स्तर में दिक्कत न हो। ये पैसा सरकारी कर्मचारियों, पब्लिक सेक्टर के कर्मचारियों और पेंशनधारियों को दिया जाता है।
  • इसकी शुरुआत दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान हुई थी। सिपाहियों को खाने और दूसरी सुविधाओं के लिए उनकी तनख्वाह से अतिरिक्त पैसा दिया जाता था। इस पैसे को उस वक्त खाद्य महंगाई भत्ता या डियर फूड अलाउंस कहा जाता था। जैसे-जैसे वेतन बढ़ता जाता था, इस भत्ते में भी इजाफा होता था।
  • भारत में मुंबई के कपड़ा उद्योग में 1972 में सबसे पहले महंगाई भत्ते की शुरुआत हुई थी। इसके बाद केंद्र सरकार सभी सरकारी कर्मचारियों और पेंशनधारियों को महंगाई भत्ता देने लगी थी, ताकि बढ़ती हुई महंगाई का असर सरकारी कर्मचारी और पेंशनधारियों पर न पड़े। इसके लिए 1972 में ही कानून बनाया गया, जिससे कि ऑल इंडिया सर्विस एक्ट 1951 के तहत आने वाले सरकारी कर्मचारियों और पेंशनधारियों को महंगाई भत्ता दिया जाने लगे।

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