आज रिलीज होगी देश के पहले महिला बैंड पर बनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म, …जानिए

बिहार में राजधानी पटना से 15 किमी दूर है गांव ढिबरा। आज इस गांव की पहचान है एक महिला बैंड। यह म्यूजिक बैंड रविदास समुदाय की 10 महिलाओं के संघर्ष और उनकी सफलता की पहचान बन चुका है। इस बैंड की विशेषता यह है कि इसकी सभी सदस्य महिलाएं महिलाएं है। ढ़िबरा गांव की महिलाओं ने एक समूह बना कर जो म्यूजिक बैंड बनाया है। उसका नाम ‘सरगम बैंड’ रखा। यह बैंड सामाजिक बुराइयों को तोड़ रहा है।

ये देश की पहली महिला बैंड पार्टी है। इनकी जिंदगी पर ‘वुमनिया’ नाम की एक डॉक्यूमेंट्री भी बनाई गई, जो आज रिलीज होने वाली है। इस फिल्म को 13 अक्टूबर को शिमला अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में भी दिखाया जाएगा। बैंड पार्टी की महिलाएं अभी ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के सेट पर परफार्मेंस देकर लौटी हैं। अमिताभ बच्चन की फरमाइश पर उन्हें ‘मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है…’, गाना भी सुनाया और बैंड भी बजाया।

इस बैंड की अगुवाई ‘सुधा दीदी’ के नाम से मशहूर सुधा वर्गीस करती हैं, जो ‘नारी गूंज’ नाम का एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) चलाती हैं। सुधा वर्गीस ने बताया कि इस बैंड को शुरु करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। मुझे यह विचार 2016 में आया जब मैं रविदास समुदाय की महिलाओं के लिए काम कर रही थी। 

बैंड पार्टी की सभी महिलाएं अनपढ़ थीं। लेकिन आज सभी अपना नाम लिख लेती हैं। बिना पुरुष सदस्य के दूर-दूर तक ड्रम बजाने जाती हैं। अपनी कमाई के 20 हजार रुपए खर्च कर बैंड पार्टी का ड्रेस भी बना लिया है। 

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बैंड में इकलौती सविता आठवीं पास हैं। 70 साल की चित्रलेखा से लेकर 25 साल की छठिया के अलावा पंचम, लालती, सोना, डोमनी, अनीता, वैजयंती और मानती इसमें शामिल हैं। छठिया बड़ा ड्रम बजाती है, तीन-तीन घंटे लगातार। उसकी बेटी 13 साल की है। स्कूल जाती है। 

बाप रे बाप ई सब त एरोप्लेन से उड़े लगी…
सविता ने बताया कि महिला दिवस पर हम एरोप्लेन से पहली बार दिल्ली गए, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के सामने बैंड बजाया तो हौसला बुलंद हुआ। कुछ लोग तंज कसते थे, कहने लगे-बाप रे बाप, ई सब त अब एरोप्लेन से उड़ने लगी। बैंड की वजह से ही हमारी टीम की सदस्य आज अपने मर्दों की कमाई पर निर्भर नहीं है। साल में 35-40 बुकिंग मिल जाती है। 

सविता के 70 वर्षीय पिता सीताराम दास कहते हैं- बेटी ने जब बैंड बजाना शुरू किया तो मुझे भी खराब लगा था। परन्तु आज इनकी कामयाबी पर गर्व होता है।

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