पटना यूनिवर्सिटी में राष्ट्रीय डॉल्फिन शोध संस्थान का अक्टूबर में होगा शिलान्यास, …जानिए

विधान परिषद में उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण व अवशिष्ट प्रबंधन को राज्य सरकार ने एक चुनौती के रूप में स्वीकार किया है। इस साल अक्तूबर में विश्व डॉल्फिन डे के अवसर पर पटना विश्वविद्यालय परिसर में 19.16 करोड़ की लागत से ‘राष्ट्रीय डॉल्फिन शोध संस्थान’ की स्थापना की जाएगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसका शिलान्यास करेंगे। वे सोमवार को विभागवार बजट पर चर्चा के बाद पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिर्वतन विभाग के मंत्री के तौर पर सरकार की ओर से जवाब दे रहे थे।  

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल में कराए गए सर्वेक्षण में गंगा, गंडक, कोसी और महानंदा में 1548 गांगेय डॉल्फिन (सोंस) पाई गई हैं। सुल्तानगंज-कहलगांव के बीच गंगा में विक्रमशिला डॉल्फिन आश्रयणी बनाया जा रहा है। सुल्तानगंज-अगुवानी घाट पुल के बीच दर्शक डॉल्फिन की उछल-कूद देख सकेंगे। 

कहा कि कछुआ व लुप्तप्राय: गुरुड़ पक्षी के संरक्षण का प्रयास किया जा रहा है। पूर्वी भारत का एकमात्र कछुआ संरक्षण एवं पुनर्वास केन्द्र भागलपुर के सुंदरवन में स्थापित करने के साथ ही भागलपुर के ही कदवा दियारा व जगतपुरा झील के पास गरुड़ बचाव एवं पुनर्वास केन्द्र बनाया जाएगा।

भीमबांध में 8.90 करोड़ की लागत से गर्म जल कुंड का पुनर्निर्माण : उन्होंने बताया कि भीमबांध में 8.90 करोड़ की लागत से गर्म जल कुंड का पुनर्निर्माण कराया गया है। यहां एक साथ 500 लोग स्नान कर सकते हैं। सदस्यों से भी भीमबांध का भ्रमण करने का आग्रह किया। राजगीर के स्वर्णगिरि व वैभवगिरि पर्वत के बीच 480 एकड़ में बन रहे जू सफारी का एक हिस्से इस साल अक्टूबर में शुरू हो जाएगा। वहां 19.29 करोड़ से नेचर सफारी का निर्माण भी हो रहा है। कहा कि मुंगेर में वानिकी महाविद्यालय की स्थापना की जा रही है। पटना के संजय गांधी जैविक उद्यान में 3 डी थियेटर का निर्माण किया गया है। जैविक उद्यान का 2017-18 में 22.64 लाख दर्शकों ने भ्रमण किया।

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ई-कचरा को लेकर सरकार गंभीर, मोबाइल और कंप्यूटर कंपनियों को स्थापित करना होगा ई-कचरा संग्रह केंद्र
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि ई-कचरा को लेकर राज्य सरकार गंभीर है। नियमानुसार मोबाइल और कंयूटर कंपनियों को ई-कचरा संग्रह केंद्र स्थापित करना चाहिए। जहां लोगा ठीक नहीं होने वाले मोबाइल और कम्यूटर को डंप कर सके। सरकार इसके लिए नियमों का अध्ययन करेगी और नियमानुसा इस संबंध में निर्णय लिया जाएगा।

पटना, मुजफ्फरपुर और गया के वायु प्रदूषण को सरकार ने चुनौती के रूप में लिया है। जाड़े के 4-5 महीनों में पीएम 2.5 के घूलकण के कारण वायुप्रदूषण बढ़ जाता है। इसके अनेक कारणें में वाहनों से होने वाला उत्सर्जन, बिना ढके निर्माण सामग्री का परिवहन, ईंट-भट्ठा से निकलने वाले धुंए और फसल अवशेष का जलाना आदि है।

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