बिहार में पहली बार पेड़ों का होगा ट्रांसप्लांटेशन, …जानिए

पटना-दीघा सड़क के किनारे माैजूद वृक्षों को काटा नहीं जाएगा। अब इन वृक्षों का ट्रांसप्लांट किया जाएगा। यानी पेड़ को उसकी वर्तमान जगह से निकालकर दूसरी जगह रोपा जाएगा। ताकि पेड़ सूखे नहीं और उसकी हरियाली बरकरार रहे। बिहार में पहली बार प्रयोग के तौर पर पटना-दीघा 6.3 किमी लंबी सड़क पर ये कार्य शुरू भी किए जा चुके हैं।

वर्तमान में यहां जामुन, आम, बेर जैसे फलों के पेड़ के अलावा पीपल और बरगद के वृक्ष मौजूद हैं। बिहार राज्य पथ विकास निगम (बीएसआरडीसी) इस काम को कर रहा है। बीएसआरडीसी इस ट्रांसप्लांटेशन के तहत सड़क के किनारे लगभग 1500 वृक्षों को लगाएगा। इसके साथ ही दीघा से जेपी सेतु और दीदारगंज तक की सड़क के किनारे 200 वृक्षों को लगाने की योजना है।

बीएसआरडीसी दूसरे प्रोजेक्ट से भी वृक्षों को लाकर यहां लगाएगी : पेड़ों के फैलाव को देखते हुए 10-10 मीटर की दूरी पर एक वृक्ष लगाने की योजना है। इसके लिए बीएसआरडीसी हैदराबाद के एक कंपनी से बातचीत कर रहा है। यदि विभाग और कंपनी के बीच समझौता हो गया तो आगे से सड़क निर्माण के साथ ही वृक्षों को लगाने का काम शुरू किया जाएगा। संबंधित कंपनी ने अधिकारियों के सामने ट्रॉयल के रूप में कुछ दिनों पहले इस तकनीक से सड़क के किनारे वृक्ष लगाए।

ऐसे किया जाता है ट्रांसप्लांटेशन : पहले पेड़ाें की उम्र की जांच होती है। फिर 20 से 25 साल के वृक्षों के चारों ओर मिट्टी की कटाई की जाती है। ध्यान रखा जाता है कि जड़ें नहीं कटे। फिर उसे वहां से मशीन के सहारे निकालकर दूसरे जगह रोपा जाता है। इसके लिए जड़ के क्षेत्रफल के हिसाब से गड्‌ढा किया जाता है। उसमें खाद और पानी दिया जाता है और फिर पेड़ रोपा जाता है। पेड़ को उखाड़कर ले जाते वक्त भी जड़ों में मिट्‌टी लगाई जाती है।

विदेशों में ये कारगर तरीका है। पेड़ों काे लगाने से पहले वहां की मिट्‌टी और मौसम की जांच जरूरी है। पेड़ों के ट्रांसप्लांट से पर्यावरण को संरक्षण मिलेगा। – एसआर पद्मदेव, विभागाध्यक्ष, वनस्पति विज्ञान, पीयू

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