बिहार खिलायेगा पूरे देश को मछली, …जानिए

आने वाले दिनों में बिहार पूरे देश में खपत के लायक मछली का उत्पादन कर सकता है। जी हाँ राज्य की पशु एवं मत्स्य संसाधन सचिव एन विजयलक्ष्मी ने कहा है कि बिहार में मछली उत्पादन की अपार संभावना है। सरकार मछली उत्पादन का दायरा बढ़ाना चाहती है। ऐसा होने से बिहार पूरे देश को मछली खिला सकता है। राज्य में नौ लाख हेक्टेयर आर्द्रभूमि है, जहां मछली का उत्पादन हो सकता है। तीसरे कृषि रोड मैप में मछली उत्पाद पर फोकस किया गया है।

मांग और उत्पादन के बीच जो एक लाख टन से अधिक का गैप है उसे एक साल में पाट दिया जायेगा। मछली उत्पादन में सरकार तकनीकी मदद देगी वित्तीय मदद में सरकार सहयोग करेगी। केंद्रीय मत्यस्की संयुक्त सचिव एके जोशी ने कहा कि मछली पालन सबसे तेजी से वृद्धि करने वाला क्षेत्र है। मछली में उच्च स्तर का प्रोटीन पाया जाता है। मछली पालन खासकर मछुआ समाज का पूरा विकास होगा। विजयलक्ष्मी शनिवार को बामेति में आर्द्रभूमि (मीठा जल) में मत्स्य उत्पादन पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित कर रही थीं। कार्यशाला का आयोजन मत्स्य उद्योग (मछली उत्पादन और उसे पकड़ना) पर राष्ट्रीय नीति को बनाने के लिए किया गया है।

कार्यशाला में बिहार सहित यूपी, एमपी, गुजरात, उड़ीसा, झारखंड, राजस्थान और पश्चिम बंगाल के अधिकारियों व प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला में भारत सरकार के संयुक्त सचिव एके जोशी, नेशनल इनलैंड फिशरीज एंड एक्वाकल्चर पॉलिसी कमेटी के अध्यक्ष डॉ दिलीप कुमार तथा राज्य के मत्स्य निदेशक निशात अहमद भी मौजूद थे।

पशु एवं मत्स्य संसाधन सचिव ने विस्तार से कार्यशाला के उद्देश्य व बिहार में मछली उत्पादन की संभावना और उस दिशा में चल रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बिहार मछली उत्पादन में देश में अग्रणी बने इसके लिए सबों को मिलकर प्रयास करना होगा।

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नेशनल पॉलिसी बनाने के लिए बनी कमेटी के अध्यक्ष डॉ दिलीप कुमार ने कहा कि मछली पालन व उसको पकड़ने के कई लाभ है। मछली पालन के लिए पानी चाहिए। पानी से भूजल का भी लेवल ठीक रहेगा। लोगों को रोजगार के साथ-साथ प्रोटीन भी मिलेगा। इस कार्यशाला में मछुआरों को बुलाया गया है ताकि सबसे अंतिम पायदान पर जो लोग इस काम में लगे हैं। उनकी व्यावहारिक परेशानी दूर किया जाये। इसकी जानकारी होगी और तब जाकर सही मायने में नीति का निर्धारण हो पायेगा। इस पालिसी का दूरगामी लाभ मिलेगा। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि देश में समुद्री मछली का उत्पादन कम हो रहा है। साल 2014-15 में 100.69 मछली उत्पादन में समुद्री मछली की हिस्सेदारी 34 फीसदी है। कार्यशाला में विस्तार से मछली पालन के विभिन्न आयोमों पर चर्चा हुई।

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