अब रेल सफर होगा खुशनुमा: मुंबई-पटना हमसफर एक्सप्रेस 15 जुलाई से

भारतीय रेलवे जनसाधारण से प्रीमियम होती जा रही है। इसी कड़ी में अब एक और आधुनिक सुविधाओं से लैस ट्रेन मुंबई से बिहार की राजधानी पटना तक चलाने वाला है जिसका का नाम है हमसफर एक्सप्रेस। यह ट्रेन पूरी तरह से थर्ड एसी होगी। डायनैमिक फेयर होने के कारण इस ट्रेन का किराया भी सामान्य ट्रेनों के एसी कोच के मुकाबले अधिक होगा।

इस ट्रेन का पहला रैक दिसंबर 2016 में आनंद नगर से गोरखपुर के बीच चला था। मुंबई से पटना के लिए ट्रेन की पहली सर्विस 15 जुलाई से चलने की उम्मीद है।

इस नई ट्रेन में कुल 22 नई डिजाइन वाली कोच होंगी जिनकी रैक बांद्रा पहुंच चुकी है। बांद्रा से पटना के लिए यह पहली हमसफर ट्रेन होगी।

महंगा कोच, आधुनिक सुविधाएं
इस ट्रेन में सभी कोच एलएचबी हैं। आमतौर पर सामान्य ट्रेनों में थर्ड ए.सी. कोच की लागत सवा करोड़ रुपये तक होती है, इस ट्रेन में एक कोच की लागत करीब 2.50 करोड़ रुपये है। इस ट्रेन में डिस्क ब्रेक लगी होगी और जर्क फ्री होने की वजह से झटके भी नहीं लगेंगे। कोच को साउंड प्रूफ बनाया गया है।

इसके अलावा हर केबिन में डस्टबिन की व्यवस्था की गई है, ताकि यात्रियों को सीट से उठना न पड़े। इतना ही नहीं हमसफर के प्रत्येक यात्रियों के लिए साधारण और युएसबी चार्जिंग पॉइंट की सुविधा के अलावा पढ़ने के लिए प्रत्येक सीट पर रीडिंग लाइट लगाई गई है।

मॉर्डन टॉयलेट बचाएगा पानी
आमतौर पर ट्रेनों में पुराने नलों से पानी रिसता रहता है। कईं बार टैप ही गायब होती है लेकिन हमसफर एक्सप्रेस में आधुनिक सेंसर वॉटर टैप, हैंड ड्रायर सोप डिस्पेंसर लगा है। सेंसर वॉटर टैप से पानी का उतना ही इस्तेमाल होगा जितनी जरूरत हो।

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इसके अलावा हवाई जहाज की तरह इस ट्रेन में भी वैक्यूम टॉयलेट की व्यवस्था है। इस ट्रेन में पहली बार बच्चों के नैप्पी बदलने की व्यवस्था भी टॉइलेट में दी गई है। इसके लिए अलग से सीट दी गई है।

सुरक्षित करेगी ‘तीसरी आंख’
इस ट्रेन में अंदर जाते ही दरवाजे के ऊपर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं ताकि ट्रेन के अंदर आने जाने वाले यात्रियों की हलचल पर विशेष ध्यान दिया जा सके। हमसफर एक्सप्रेस में सीसीटीवी फुटेज देखने के अलावा उसे मॅानिटर करने की सुविधा भी उपलब्ध है।

रेलवे ने इस ट्रेन के प्रत्येक कोच की केबिन में पर्दे लगाए हैं, ताकि सफर के दौरान यात्रियों की प्राइवेसी बनी रहे। ट्रेन में स्मॉक डिटेक्टर लगे हैं। इसके अलावा जीपीएस सिस्टम की मदद से आगामी स्टेशन की वास्तविक स्थिति पूर्व में ही बताई जा सकेगी।

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