2018 से चालू होगा मढ़ौरा रेल इंजन कारखाना, …जानिए

  • पांच सौ से अधिक लोगों को मिलेगा रोजगार
  • इस प्रोजेक्ट से बिहार में साढ़े सात सौ करोड़ रुपये का होगा निवेश
  • कारखाने के लिए रेलवे लाइन व रोड का 90 फीसदी कार्य पूर्ण
  • मशरक पावर ग्रिड से विद्युत कनेक्शन लिया जायेगा

देश का दूसरा और बिहार का पहला विद्युत रेल इंजन कारखाना मढ़ौरा में जून, 2018 से शुरू होने की संभावना है। इसका काम तेजी से चल रहा है। इसके बनने से हर साल 120 इंजन का निर्माण होगा। इससे राज्य में साढ़े सात सौ करोड़ रुपये का निवेश होगा। साथ ही पांच सौ से अधिक लोगों को सीधे रोजगार मिलेगा, वहीं हजारों लोग अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त कर सकेंगे। यह कारखाना भारतीय रेल और अमेरिका की जेनरल इलेक्ट्रिकल कंपनी (जीइ) मिलकर बना रही है।

यह दोनों का संयुक्त उपक्रम है। इसमें जीइ की हिस्सेदारी 51 फीसदी और भारतीय रेल की 49 फीसदी है। इसमें रोजगार के लिए कौशल विकास मंत्रालय स्थानीय युवकों को प्रशिक्षित करेगा ताकि उन्हें रोजगार मुहैया कराया जा सके। 226.90 एकड़ में बनने वाले इस कारखाने की अधिसूचना साल 2008 में जारी हुई थी। मढ़ौरा रेल इंजन कारखाना का निर्माण कार्य शुरू होने से पहले आने-जाने के लिए रेलवे लाइन व सड़क निर्माण का कार्य 90 प्रतिशत पूर्ण कर लिया गया है। उसमें विद्युत कनेक्शन लेने की प्रक्रिया शुरू हो गयी है। मशरक पावर ग्रिड से विद्युत कनेक्शन लिया जायेगा।

कारखाना निर्माण कार्य 60 फीसदी हुआ पूरा
पूर्व मध्य रेल के सीपीआरओ राजेश कुमार ने कहा कि कारखाने का स्ट्रक्चर तैयार हो चुका है। पीलर्स खड़े किये जा चुके हैं। छत बनाने का काम हो रहा है। कुल मिलाकर इसके निर्माण कार्य का 60 फीसदी हिस्सा पूर्ण हो चुका है। अप्रैल 2018 तक छत वगैरह बनते ही इसमें मशीनें लगने लगेंगी। इसके पूरी तरह बनकर तैयार हो जाने के बाद जून 2018 से इंजन निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है।

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भूमि अधिग्रहण में देरी से रेलवे की परियोजनाओं में काफी विलंब हो रहा था। आठ साल पहले तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद ने बिहार के लिए कई रेलवे परियोजनाओं की शुरुआत की थी। भूमि अधिग्रहण में विलंब होता देख उन्होंने रेलवे की परियोजनाओं के लिए भारतीय रेल अधिनियम-1989 लागू कर दिया।

उसके बाद रेलवे ने अपनी परियोजनाओं के लिए स्वयं ही भूमि अधिग्रहण करने की कार्रवाई शुरू कर दी। उक्त अधिनियम के तहत यह पहली परियोजना है जिसके लिए भूमि अधिग्रहण किया गया है। हालांकि इसमें दिक्कत आने के बाद रेलवे ने राज्य सरकार से आग्रह किया था। इसके बाद इस काम में राज्य सरकार ने इसमें सहयोग किया।

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