न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा बने देश के 45वें मुख्य न्यायाधीश, …जानिए

मुंबई के श्रृंखलाबद्ध बम धमाकों के दोषी याकूब मेमन की फांसी के खिलाफ मध्य रात्रि में सुनवाई करने तथा निर्भया बलात्कार कांड के दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रखने वाले न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा ने सोमवार(28 अगस्त) को देश के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ दिलाई।

न्यायमूर्ति मिश्रा देश के 45वें मुख्य न्यायाधीश हैं। न्यायमूर्ति जेएस केहर के बाद मुख्य न्यायाधीश का पदभार उन्हें सौंपा गया है। 27 अगस्त को न्यायमूर्ति जे. एस. केहर सेवानिवृत्त हो गए थे। न्यायमूर्ति केहर ने प्रधान न्यायाधीश पद पर अपने उत्तराधिकारी के रूप में न्यायमूर्ति मिश्रा के नाम की सिफारिश की थी।

वहीं न्यायमूर्ति मिश्रा 14 महीने तक प्रधान न्यायाधीश पद पर रहेंगे। दो अक्टूबर, 2018 को वह सेवानिवृत्त हो जाएंगे।

न्यायमूर्ति मिश्रा पटना और दिल्ली उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश भी रह चुके हैं। तीन अक्टूबर 1953 को जन्मे न्यायमूर्ति मिश्रा को 17 फरवरी 1996 को उड़ीसा उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश बनाया गया था। तीन मार्च 1997 को उनका तबादला मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में कर दिया गया। उसी साल 19 दिसंबर को उन्हें स्थायी नियुक्ति दी गयी।

चार दिन बाद 23 दिसंबर 2009 को उन्हें पटना उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया और 24 मई 2010 को दिल्ली उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया। वहां रहते हुए उन्होंने पांच हजार से ज्यादा मामलों में फैसले सुनाये और लोक अदालतों को ज्यादा प्रभावशाली बनाने के प्रयास किये। उन्हें 10 अक्टूबर 2011 को पदोन्नत करके उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था।

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न्यायमूर्ति मिश्रा ने ही देशभर के सिनेमाघरों में राष्ट्रगान के आदेश जारी किए थे।

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