बिहार कैबिनेट का फैसला : नियोजित शिक्षकों के बकाया वेतन के लिए 684 करोड़ मंजूर

बिहार के नियोजित शिक्षकों के लिए खुशखबरी है। कैबिनेट ने शिक्षकों के जुलाई से सितंबर तक के तीन महीने के बकाया वेतन के भुगतान के लिए 684 करोड़ रुपये का बजट जारी कर दिया है।

इसके साथ ही कैबिनेट की बैठक में अनाथ, विकलांग एवं अक्षम बच्चों को ज्यादा से ज्यादा सुविधा देने के लिए खासतौर से नयी योजना शुरू की है। अब राज्य में अनाथ सिर्फ उन बच्चों को ही नहीं माना जायेगा, जिनके माता-पिता का निधन हो गया है। बल्कि, जिन बच्चों के माता-पिता जेल में सजा काट रहे हैं या अन्य कानूनी प्रावधानों में फंसकर अलग रह रहे। साथ ही जिनके माता-पिता मानसिक रूप से विक्षिप्त हैं, उन्हें भी अनाथ के रूप में माना जायेगा और इनके लिए खासतौर से बनायी गयी सभी संबंधित सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जायेगा।

सरकार ने अनाथ बच्चों की देखभाल के लिए चल रही योजनाओं में राशि की बढ़ोतरी भी की है। इसके तहत छह वर्ष तक के बच्चों के लिए प्रति बच्चा 900 रुपये प्रति महीने दिये जायेंगे। जबकि, 6 से 18 वर्ष के सभी बच्चों के लिए एक हजार रुपये प्रति महीने दिये जायेंगे।

इसके अलावा राज्य सरकार ने सभी वर्ग के वंचित समाज के लोगों का उत्थान करने के लिए समाज कल्याण विभाग की कई छोटी-छोटी योजनाओं को समाहित करते हुए पांच नयी योजनाएं बनायी गयी हैं। इसके अलावा राज्य सरकार ने किन्नर समुदाय के लिए एक विशेष योजना ‘किन्नर कल्याण योजना’ शुरू की है। इसमें इनके स्वास्थ्य, संरक्षण और उत्थान के लिए खासतौर से कार्य किये जायेंगे।

इस योजना में किन्नर समुदाय के समुचित कल्याण और उत्थान के लिए खासतौर से प्रावधान किये गये हैं। जो नयी पांच योजनाएं शुरू की गयी हैं, उनमें मुख्यमंत्री वृहद सहायता छत्र योजना, मुख्यमंत्री बाल संरक्षण छत्र योजना, मुख्यमंत्री सामाजिक सहायता ए‌वं प्रोत्साहन छत्र योजना, मुख्यमंत्री दिव्यांगजन सशक्तिकरण छत्र-योजना और समेकित बाल विकास छत्र योजना शामिल हैं।

इन योजनाओं से इन समुदायों का होगा कल्याण
मुख्यमंत्री बाल संरक्षण छत्र योजना : इसमें बाल अधिकारों, किशोर न्याय परिषद और संरक्षण से जुड़ी सभी योजनाओं को शामिल किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य अनाथ, बेसहारा, गंभीर रोग से पीड़ित गरीब माता-पिता के बच्चों और गंभीर रोग से पीड़ित बच्चों का भरण-पोषण और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। बाल संरक्षण के प्रति आम लोगों को जागरूक करना और मौजूदा बाल संरक्षण सेवाओं की जानकारी देना भी इसका उद्देश्य होगा। सभी स्तर पर प्रशासकों और सेवा प्रदाताओं के अलावा स्थानीय निकाय, पुलिस, न्यायपालिका और अन्य को आईसीपीएस से प्रशिक्षण दिलाने की योजना भी है।

मुख्यमंत्री सामाजिक सहायता एवं प्रोत्साहन छत्र-योजना : गरीब, परिवार से निकाले गये वृद्ध, निशक्त, विधवा, कुष्ठ व एड्स रोगियों समेत अन्य को लाभ पहुंचाना इसका मुख्य उद्देश्य है। इसमें लक्ष्मीबाई पेंशन योजना, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय पेंशन योजना, विधवा पेंशन योजना, कुष्ठ रोगी पेंशन योजना समेत अन्य योजनाओं को भी शामिल किया गया है। कबीर अंत्येष्टि योजना समेत अन्य योजनाओं के लिए अलग-अलग बैंक एकाउंट खोले जायेंगे।

मुख्यमंत्री दिव्यांगजन सशक्तीकरण छत्र योजना : इसमें दिव्यांगों के कल्याण के लिए चल रही सभी योजनाओं को समाहित किया गया है। साथ ही इनके लिए चल रही योजनाओं में कुछ अहम बदलाव किये गये हैं। दिव्यांगों के रोजगार के लिए ऋण योजना की राशि को डेढ़ लाख से बढ़ा कर दो लाख रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा दिव्यांगों को कृत्रिम अंग लगाने की पात्रता 14 वर्ष से घटाकर पांच वर्ष कर दी गयी है। यानी अब पांच वर्ष की उम्र से ही किसी दिव्यांग बच्चों को उसकी जरूरत के हिसाब से मुफ्त में कृत्रिम अंग लगाये जायेंगे।

समेकित बाल विकास छत्र योजना : इसका उद्देश्य छह वर्ष तक के बच्चों के लिए चलने वाली सभी योजनाओं को एक साथ लाना और उनका क्रियान्वयन प्रभावी ढंग से करना है। इसमें गर्भवती व प्रसूति महिलाएं और किशोर बालिकाओं के पोषण ए‌वं स्वास्थ्य से जुड़ी सभी योजनाओं को शामिल किया गया है। आंगनबाड़ी केंद्र जैसी केंद्र प्रायोजित योजनाओं को भी इससे जोड़ा गया है।

साथ ही कैबिनेट की बैठक में शराबबंदी कानून को और धार देने के लिए नया पद सृजित करने का फैसला लिया गया। शराबबंदी के लिए अब अलग आइजी होंगे।

आइजी (मद्य निषेध) के नये पद के सृजन को मिली स्वीकृति
राज्य सरकार ने शराबबंदी कानून की सशक्त मॉनीटरिंग और इसका पालन पूरी मजबूती से करने के लिए आइजी (मद्यनिषेध) के नये पद की स्वीकृति प्रदान कर दी है। यह नया पद सीआइडी के अधीन होगा और एडीजी (सीआइडी) को यह सीधे तौर पर रिपोर्टिंग करेगा। इसके अलावा मद्य निषेध कानून का अनुपालन समुचित तरीके से कराने के लिए सीआइडी में एसपी (ओएसडी) को एसपी (मद्य निषेद) के रूप में परिवर्तित कर दिया गया है। इस परिवर्तन के साथ ही एसपी की जिम्मेवारी शराबबंदी कानून का पालन मुस्तैदी से कराने में अहम भूमिका निभाने की होगी।

इसके अलावा पुलिस मुख्यालय के 68 संबंधित पदों को भी प्रत्यर्पित करते हुए मद्य-निषेद कानून को मजबूती से लागू करने में आइजी (मद्य निषेध) के अधीन दिया जायेगा। ये सभी परिवर्तित किये गये पद सीआइडी के अधीन ही होंगे। इसमें डीएसपी से लेकर सिपाही तक के पद शामिल हैं, जिन्हें बीएमपी, विशेष शाखा, बिहार पुलिस अकादमी और पुलिस मुख्यालय से लिया गया है। अभी इस बात का आकलन किया जा रहा है कि कहां से कितने पद लिये जा रहे हैं।

कैबिनेट में लिये गये अन्य महत्वपूर्ण निर्णय
-वर्ष 2017 में अत्याधिक वर्षा या बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त पूर्वी कोशी नहर प्रणाली के जीर्णोद्धार के लिए 50 करोड़ 42 लाख रुपये जारी किया गया।
-राज्य में कार्यरत निजी सुरक्षा अभिकरण के तहत निजी सुरक्षा कंपनी का लाइसेंस लेने के लिए आवेदन की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है।
-सभी सरकारी विभागों को बिना टेंडर के सामानों की खरीद सीधे ऑनलाइन जेम पोर्टल से करना अनिवार्य कर दिया गया है। केंद्र सरकार के इस पोर्टल से खरीदारी अनिवार्य करने के लिए बिहार वित्त नियमावली, 1950 में बदलाव किया गया है।

-नयी दिल्ली के द्वारका में प्रस्तावित ‘बिहार सदन’ के निर्माण कार्य के लिए 78 करोड़ 87 लाख रुपये स्वीकृत किये गये हैं।
-हाजीपुर स्थित बिहार सुधारात्मक प्रशासनिक संस्थान के संचालन के लिए संविदा पर जरूरी कर्मचारियों की बहाली करने की अनुमति दी गयी।
-वामपंथी उग्रवादियों के समर्पण सह पुनर्वास योजना में केंद्र से पैसे नहीं आने की स्थिति में राज्य सरकार अपने स्तर पर इसमें रुपये खर्च करेगी और बाद में इसकी प्रतिपूर्ति केंद्र सरकार से लेगी।

Leave a Reply