नीतीश कैबिनेट का फैसला: राज्य के सभी डॉक्टरों को अब केंद्र की तर्ज पर मिलेगा प्रोन्नति का लाभ

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में बुधवार को संपन्न बिहार कैबिनेट की बैठक में कुल 16 एजेंडों पर मुहर लगायी गयी। कैबिनेट में लिए गए महत्वपूर्ण फैसले इस प्रकार हैं –

राज्य के सभी डॉक्टरों को अब केंद्र सरकार की तर्ज पर वित्तीय उन्नयन या डीएसीपी (डॉयनेमिक एश्योर कॉरियर प्रोमोशन) का लाभ दिया जायेगा। इसमें इन्हें केंद्र के तय मानकों की तर्ज पर प्रोन्नति का लाभ दिया जायेगा। बिहार पहला राज्य है, जहां डॉक्टरों को यह लाभ दिया गया है।

डॉक्टरों को डीएसीपी का यह लाभ 1 अप्रैल 2017 से दिया जायेगा। चिकित्सकों और चिकित्सक शिक्षकों को सातवां वेतन आयोग में भी इसे लागू करने की अनुशंसा की गयी थी। इस घोषणा के बाद बिहार स्वास्थ्य सेवा संवर्ग और बिहार चिकित्सा शिक्षक सेवा संवर्ग की वेतन संरचना के आधार पर वेतन निर्धारण के आधार पर डॉक्टरों को वित्तीय उन्नयन प्रदान किया जा रहा है। वर्तमान में चिकित्सकों और चिकित्सक शिक्षकों को छह वर्ष की सेवा के बाद पहला डायनेमिक एसीपी, 12 वर्षों की सेवा के बाद दूसरा और 18 वर्ष के बाद तीसरा डीएसीपी दिया जाता है।

अन्य महत्वपूर्ण फैसले
कैबिनेट ने एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में राज्य में कार्यरत 14 अस्थायी अवर निबंधन कार्यालय को स्थायी करने का निर्णय लिया है। इन कार्यालयों में एक-एक पद अवर निबंधक (राजपत्रित), रात्रि प्रहरी और आदेशपाल के नये पदों को बनाने की भी स्वीकृति प्रदान की गयी है।

लघु जल संसाधन विभाग के अंतर्गत बिहार शताब्दी निजी नलकूप योजना में कुछ अहम बदलाव किये गये हैं। इसके तहत अब आवेदन लघु जल संसाधन विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन किया जा सकता है। एससी और एसटी को प्राथमिकता दी जायेगी। लघु सीमांत किसानों को खासतौर से प्राथमिकता मिलेगी, लेकिन इसके लिए उनके पास कम से कम 40 डिसमिल जमीन होना अनिवार्य है। एक किसान को एक ही बोरिंग का लाभ मिलेगा।
लघु जल संसाधन विभाग में संविदा के आधार पर कार्यरत 10 कनीय अभियंताओं और भवन निर्माण विभाग में कार्यरत 9 कनीय अभियंताओं को अगले एक वर्ष तक के लिए पुनर्नियोजित करने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति मिली है।

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गया-फतेहपुर-गोपी पथ पर मिट्टी कार्य एवं आरसीसी पुल निर्माण के लिए 47.64 करोड़ और छपरा में तेजपुरा से गौरा बाजार पथ में मिट्टी कार्य एवं इसके चौड़ीकरण के लिए 24.23 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। वहीं, औरंगाबाद-बरबड्डा पथ की 6 लेनिंग के लिए 3.5 एकड़ भूमि एनएचएआइ को निशुल्क हस्तांतरित की गई है।
बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसाइटी को चालू वित्तीय वर्ष के लिए 58.52 करोड़ के सहायक अनुदान के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली है।

वैशाली जिला के भगवानपुर में सीवी रमण निजी विश्वविद्यालय की स्थापना की स्वीकृति दी गयी है। इस विश्वविद्यालय की मध्य प्रदेश में दो-तीन और झारखंड में भी दो शाखाएं चल रही हैं। बिहार में जब तक इस विवि का अपना भवन नहीं तैयार हो जाता, तब तक यह किराये के मकान में संचालित होंगे। इसमें विज्ञान, इंजीनियरिंग के अलावा कॉमर्स, लॉ, आइटी, कृषि, कंप्यूटर, आपदा प्रबंधन समेत अन्य विषयों की पढ़ाई होगी।

राज्य के सभी पोलिटेकनिक और इंजीनियरिंग कॉलेज में कार्यरत 24 सहायक और 58 व्याख्याताओं को बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त अनुशंसा के अंतर्गत नियमित नियुक्ति होने या आदेश जारी होने तक की तिथि से एक वर्ष के लिए विस्तार दिया गया है।
बीपीएससी में सहायक प्रोग्रामर के पांच अस्थायी पदों के लिए अब नियमित नियुक्ति होगी। इसके लिए बीपीएससी अपने स्तर पर नियुक्ति की प्रक्रिया को पूरी करेगा।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधीन चलने वाले छात्रावासों में छात्रावासों प्रबंधों के 37 पदों के सृजन की अनुमति मिली है।

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