बिहार कैबिनेट का फैसला : बैंकों की जगह अब सरकार छात्रों को उपलब्ध कराएगी ऋण

नीतीश सरकार ने छात्र-छात्राओं की उच्च शिक्षा के लिए बड़ी पहल की है। सरकार ने स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के प्रति बैंकों के उदासीन रवैये को देखते हुए छात्रों को एजुकेशन लोन उपलब्ध कराने के लिए राज्य शिक्षा वित्त निगम (एसईएफसी) की स्थापना के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। बिहार राज्य शिक्षा वित्त निगम के इक्विटी शेयर के लिए 9.5 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। सरकार एक कार्पस फंड भी बनाएगी जिसकी राशि अभी तय नहीं की गई है।

बिहार राज्य शिक्षा वित्त निगम पहली अप्रैल से काम करना शुरू कर देगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसका शुभारंभ करेंगे। निगम के लिए 131 पदों का सृजन किया गया है। मुख्य कार्यपालक अधिकारी सह प्रबंध निदेशक और महाप्रबंधक(प्रशासन) के एक-एक पद का गठन हुआ है। इनका वेतन प्रति माह 2.50 लाख और 2.00 लाख तय किया गया है। अब जिला निबंधन सह परामर्श कार्यालय (डीआरसीसी) से छात्र-छात्राओं के आवेदन बैंकों की जगह निगम को ऋण निर्गत करने के लिए भेजे जाएंगे।

सात निश्चय के ‘आर्थिक हल, युवाओं को बल’ कार्यक्रम के तहत स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2 अक्टूबर, 2016 को शुभारंभ किया था। पांच साल में बारहवीं पास 35 लाख छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए चार लाख रुपये तक का ऋण मुहैया करने का लक्ष्य था। पहले साल पांच लाख, दूसरे साल 6 लाख, तीसरे साल 7 लाख, चौथे साल 8 लाख और पांचवें साल 9 लाख छात्र-छात्राओं को ऋण देना था। परन्तु बैंकों द्वारा अबतक मात्र 35 हजार छात्र-छात्राओं को ही ऋण उपलब्ध कराया गया है। इनके अलावा 17 हजार और आवेदन आए हैं जिनमें से 14 हजार को स्वीकृति प्रदान की गई है।

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2018-19 के बजट प्रस्ताव में संशोधन
मंत्रिपरिषद द्वारा मंजूर दूसरा प्रस्ताव विधानमंडल के बजट सत्र से संबंधित है, इसलिए इसकी जानकारी फिलहाल सार्वजनिक नहीं की जा सकती है। सूत्रों ने बताया कि कैबिनेट की पिछली बैठक में पारित बजट से संबंधित प्रस्ताव में संशोधन किया गया है। शिक्षा पर अधिक राशि खर्च करने के लिए वार्षिक योजना आकार में वृद्धि की गई है।

इधर, मुख्य सचिव को मिला तीन माह का एक्सटेंशन
राज्य सरकार ने मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह की सेवा अवधि का तीन महीने विस्तार कर दिया है।मुख्य सचिव ने शनिवार को इसकी पुष्टि कर दी। भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1980 बैच के अधिकारी सिंह 28 फरवरी को सेवानिवृत्त होने वाले थे। अब उनका कार्यकाल 30 जून तक रहेगा। उन्होंने 30 जून 2014 को अशोक कुमार सिन्हा के बाद मुख्य सचिव का कार्यभार संभाल था। सूत्रों के राज्य सरकार के प्रमुख योजनाओं में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए उन्हें एक्सटेंशन दिया गया है। पिछले कुछ वर्षों में मुख्य सचिव को एक्सटेंशन का यह दूसरा मौका है। एनडीए-1 में बिहार में भयावह बाढ़ को देखते हुए वर्ष 2007 में अशोक कुमार चौधरी को 3 माह का एक्सटेंशन मिला था।

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